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...मेरे शेरों मेरी गजलों में जिगर बोलता है
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sat, 10 Sep 2016 12:30 PM IST
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शहंशाहे गजल जिगर मुरादाबादी के 56 वें यौमे वफात (पुण्य तिथि) पर कंपनी बाग स्थित पंचायत भवन के सभागार में यादे जिगर (शामे गजल) का आयोजन किया गया। आयोजन में मुरादाबाद के अलावा दिल्ली, मुंबई, रामनगर समेत कई महानगरों और शहरों के मशहूर शायरों ने जिगर को याद कर कलाम पेश किये।
जिगर मुरादाबादी को याद करते हुए शायर हजरत शादाब मुरादाबाद ने कहा, ‘मेरे अंदाज मेरी तर्ज मेरी लहजों में उसकी आवाज ओ तरन्नुम का असर बोलता है, कौन कहता है जिगर छोड़ गया दुनिया को, मेरे शेरों मेरी गजलों में जिगर बोलता है’। जिगर पर बोलते हुए डॉ. मीना नकवी ने कहा कि जिगर साहब का शेर पढ़ने का अंदाज कुछ ऐसा था कि उस दौर के नौजवान शायर उन जैसे शेर कहने और उनके अंदाज अपनाने की कोशिश किया करते थे।
नये शायर उन्हीं की तरह बड़ी-बड़ी बेतरतीब जुल्फें, दाढ़ी का इजाफा और लिबास की नकल करते थे। मीना ने जिगर की शख्सियत को बयां करते हुए जिगर का ही शेर पढ़ा, ‘मुझे उठाने को आया है वाइजे नादां जो उठ सके तो मेरा सागरे शराब उठा, किधर से बर्क चमकती है देखें ऐ वाइज, मैं अपना जाम उठाता हू, तू किताब उठा’।
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वहीं जिगर को शायर से कहीं ज्यादा देशभक्त बताते हुए शायर सैयद मोहम्मद हासिम ने जिगर का शेर सुनाया, ‘भाग मुसाफिर मेरे वतन से मेरे चमन से भाग, ऊपर-ऊपर फूल खिले हैं, भीतर-भीतर आग’।
रामपुर से आई शायरा डा. रबाब अंजुम ने जिगर की तारीफ में कहा कि जिगर अपनी नगमा सराई में इश्क मोहब्बत को आम करते हैं और इंसानी दिल में उस जज्बे को पैदा करना सीखाते हैं। शामे गजल को आगे बढ़ते हुए शायर अहमद मुरादाबादी ने शेर पढ़ा, ‘इल्मो फन के गौहर थे हजरते जिगर साहब, फिक्र के समंदर थे हजरते जिगर साहब, छोड़ कर सभी बातें मैं बस इतना कहता हूं, हम में सबसे बेहतर थे हजरते जिगर साहब’।
वहीं जिगर की शान में शेर पेश करते हुए जिया शादानी ने कहा, ‘तारीफे गजल जितनी भी की जाए कम है, ऐ शहरे जिगर जाग उठा तेरा मुकद्दर, है मीर भी अपनी जगह गालिब की गजल भी, आया है न आयेगा जिगर जैसा सुखनवर ’। मुशायरे के बाद जिगर की याद में मुंबई से आये जाने माने गजल गायक जुनैद अख्तर ने जिगर मुरादाबादी की कई गजलें पेश कीं। माई फेयर द्वारा आयोजित शामे गजल में जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर, डीआईजी ओंकार सिंह, सीडीओ उज्जवल कुमार, सपा जिलाध्यक्ष इकराम कुरैशी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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जिगर मुरादाबादी को याद करते हुए शायर हजरत शादाब मुरादाबाद ने कहा, ‘मेरे अंदाज मेरी तर्ज मेरी लहजों में उसकी आवाज ओ तरन्नुम का असर बोलता है, कौन कहता है जिगर छोड़ गया दुनिया को, मेरे शेरों मेरी गजलों में जिगर बोलता है’। जिगर पर बोलते हुए डॉ. मीना नकवी ने कहा कि जिगर साहब का शेर पढ़ने का अंदाज कुछ ऐसा था कि उस दौर के नौजवान शायर उन जैसे शेर कहने और उनके अंदाज अपनाने की कोशिश किया करते थे।
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नये शायर उन्हीं की तरह बड़ी-बड़ी बेतरतीब जुल्फें, दाढ़ी का इजाफा और लिबास की नकल करते थे। मीना ने जिगर की शख्सियत को बयां करते हुए जिगर का ही शेर पढ़ा, ‘मुझे उठाने को आया है वाइजे नादां जो उठ सके तो मेरा सागरे शराब उठा, किधर से बर्क चमकती है देखें ऐ वाइज, मैं अपना जाम उठाता हू, तू किताब उठा’।
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वहीं जिगर को शायर से कहीं ज्यादा देशभक्त बताते हुए शायर सैयद मोहम्मद हासिम ने जिगर का शेर सुनाया, ‘भाग मुसाफिर मेरे वतन से मेरे चमन से भाग, ऊपर-ऊपर फूल खिले हैं, भीतर-भीतर आग’।
रामपुर से आई शायरा डा. रबाब अंजुम ने जिगर की तारीफ में कहा कि जिगर अपनी नगमा सराई में इश्क मोहब्बत को आम करते हैं और इंसानी दिल में उस जज्बे को पैदा करना सीखाते हैं। शामे गजल को आगे बढ़ते हुए शायर अहमद मुरादाबादी ने शेर पढ़ा, ‘इल्मो फन के गौहर थे हजरते जिगर साहब, फिक्र के समंदर थे हजरते जिगर साहब, छोड़ कर सभी बातें मैं बस इतना कहता हूं, हम में सबसे बेहतर थे हजरते जिगर साहब’।
वहीं जिगर की शान में शेर पेश करते हुए जिया शादानी ने कहा, ‘तारीफे गजल जितनी भी की जाए कम है, ऐ शहरे जिगर जाग उठा तेरा मुकद्दर, है मीर भी अपनी जगह गालिब की गजल भी, आया है न आयेगा जिगर जैसा सुखनवर ’। मुशायरे के बाद जिगर की याद में मुंबई से आये जाने माने गजल गायक जुनैद अख्तर ने जिगर मुरादाबादी की कई गजलें पेश कीं। माई फेयर द्वारा आयोजित शामे गजल में जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर, डीआईजी ओंकार सिंह, सीडीओ उज्जवल कुमार, सपा जिलाध्यक्ष इकराम कुरैशी समेत कई लोग मौजूद रहे।