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Moradabad News: पांच महीने में पैनिक के 4652 मामले, घबराहट के बीच जी रहे लोग
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मुरादाबाद। अचानक दिल की धड़कन तेज होना, सांस फूलना और ऐसा महसूस होना कि कुछ बुरा होने वाला है। कुछ देर बाद घबराहट कम हो जाती है, लेकिन दोबारा ऐसा होने का डर बना रहता है।
पैनिक का अनुभव कुछ ऐसा हो सकता है। मुरादाबाद में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 तक चिंता और पैनिक विकार के 4652 मामले दर्ज किए गए।
इसी अवधि में अवसाद के 3710 और सोमैटाइजेशन के 65 मामले भी दर्ज किए गए हैं। यानी अवसाद से ज्यादा लोग चिंता और घबराहट की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा सरकारी ओपीडी का है। निजी अस्पतालों में भी मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे मामले आए हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिष राणा का कहना है कि पैनिक के मामले में अचानक तेज घबराहट, पसीना, कंपकंपी, चक्कर और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने या जान जाने का डर भी महसूस हो सकता है। बार-बार ऐसा होने और अगले अटैक की आशंका में व्यक्ति भीड़ या अकेले बाहर जाने से बचने लगता है। ब्यूरो
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पैनिक का अनुभव कुछ ऐसा हो सकता है। मुरादाबाद में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 तक चिंता और पैनिक विकार के 4652 मामले दर्ज किए गए।
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इसी अवधि में अवसाद के 3710 और सोमैटाइजेशन के 65 मामले भी दर्ज किए गए हैं। यानी अवसाद से ज्यादा लोग चिंता और घबराहट की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा सरकारी ओपीडी का है। निजी अस्पतालों में भी मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे मामले आए हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिष राणा का कहना है कि पैनिक के मामले में अचानक तेज घबराहट, पसीना, कंपकंपी, चक्कर और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने या जान जाने का डर भी महसूस हो सकता है। बार-बार ऐसा होने और अगले अटैक की आशंका में व्यक्ति भीड़ या अकेले बाहर जाने से बचने लगता है। ब्यूरो
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