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शहीदाने कर्बला की शहादत से सबक हासिल करना जरूरी
Updated Mon, 17 Sep 2018 01:12 AM IST
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बिलारी। नगर के मोहल्ला ठाकुरान स्थित शहीदे आजम पार्क में चल रही शहीदे कर्बला कांफ्रेंस में उलेमाओं ने मुसलमानों से कहा कि शहीदाने कर्बला की शहादत से सबक हासिल करने की जरूरत है।
कांफ्रेंस की शुरूआत हाफिज मकबूल हुसैन ने तिलावते कलामे पाक से की। सैयद अजमल हुसैन ने रसूले अकरम की शान में नात शरीफ पेश की। कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में ठाकुरद्वारा से आए मौलाना अनीसुल कादरी ने रसूले अकरम की फजीलत के बारे में विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि वह शहीदाने कर्बला की शहादत से सबक हासिल करें। उन्होंने कहा कि मलाकुल मौत किसी की भी रूह को कब्ज करने के लिए उससे इजाजत नहीं मांगते मगर हमारे आका से इजाजत लेकर घर में आए। अन्य उलेमा ने कहा कि मुसलमान रसूले अकरम की सुन्नतों पर चलें और कुरआने पाक की हिदायतों को मानें।
कांफ्रेंस की सदारत बिलारी के शहर इमाम मौलाना सदाकत हुसैन और निजामत निजामुद्दीन अत्तारी ने की। कांफ्रेंस में हाफिज नाजिम, हाफिज आलेहसन, अब्दुल वहीद रब्बानी आदि ने भी तकरीर की। अंत में सलातो सलाम पढ़ने के बाद मुल्क और कौम की तरक्की तथा शांति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं। कांफ्रेंस आयोजन में हाजी उस्मान अत्तारी, सरताज अत्तारी, इदरीस फारूखी, साबिर फारूखी, अहसान अत्तारी आदि का सहयोग रहा।
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कांफ्रेंस की शुरूआत हाफिज मकबूल हुसैन ने तिलावते कलामे पाक से की। सैयद अजमल हुसैन ने रसूले अकरम की शान में नात शरीफ पेश की। कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में ठाकुरद्वारा से आए मौलाना अनीसुल कादरी ने रसूले अकरम की फजीलत के बारे में विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि वह शहीदाने कर्बला की शहादत से सबक हासिल करें। उन्होंने कहा कि मलाकुल मौत किसी की भी रूह को कब्ज करने के लिए उससे इजाजत नहीं मांगते मगर हमारे आका से इजाजत लेकर घर में आए। अन्य उलेमा ने कहा कि मुसलमान रसूले अकरम की सुन्नतों पर चलें और कुरआने पाक की हिदायतों को मानें।
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कांफ्रेंस की सदारत बिलारी के शहर इमाम मौलाना सदाकत हुसैन और निजामत निजामुद्दीन अत्तारी ने की। कांफ्रेंस में हाफिज नाजिम, हाफिज आलेहसन, अब्दुल वहीद रब्बानी आदि ने भी तकरीर की। अंत में सलातो सलाम पढ़ने के बाद मुल्क और कौम की तरक्की तथा शांति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं। कांफ्रेंस आयोजन में हाजी उस्मान अत्तारी, सरताज अत्तारी, इदरीस फारूखी, साबिर फारूखी, अहसान अत्तारी आदि का सहयोग रहा।
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