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ट्रकों की हड़ताल से बाजार बेहाल
Updated Fri, 27 Jul 2018 02:05 AM IST
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मुरादाबाद।
ट्रांसपोर्टरों की बेमियादी हड़ताल का असर बाजार पर दिखने लगा है। फल एवं सब्जियों के अलावा दैनिक जरूरत के सामान की आवक बाधित होने लगी है। खपत की तुलना में आपूर्ति नहीं होने से उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। सब्जियां उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
बाजार में अधिकांश फल एवं सब्जियां बाहर से आती हैं। थोक मंडी में 2000 क्विंटल सब्जियों और पांच सौ क्विंटल फलों की प्रतिदिन आवक हो रही है। हड़ताल से पूर्व सब्जियों की तीन हजार क्विंटल और फलों की 1200 क्विंटल तक आवक होती थी। फल एवं सब्जियां छोटे माल वाहनों से पहुंच रही हैं। हड़ताल को देखते हुए आलू एवं प्याज का स्टाक होने लगा है। जिससे इनकी कीमत बढ़ गई है। थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजार में सब्जियां महंगी हो रही हैं। टमाटर, मटर, फूल गोभी, बंद गोभी, केला, करेला, पपीता मौसमी समेत अधिकांश फल एवं सब्जियां उत्तराखंड और दिल्ली आजादपुर मंडी से मुरादाबाद पहुंचती हैं। सब्जी विक्रेता रामवती बताती हैं एक हफ्ते में अधिकतर सब्जियों में पांच से लेकर दस रुपये किलो तक तेजी आई है।
परचून का थोक कारोबार भी ठप है। मुरादाबाद में करीब तीन दर्जन गल्ले के बड़े कारोबारी हैं। दिल्ली से परचून का सामान लेकर सीधे उत्तराखंड को सप्लाई देते हैं। इसी तरह मुरादाबाद से कपड़े की उत्तराखंड को सप्लाई होती है। दिल्ली से माल नहीं आ रहा है और कारोबारियों का स्टॉक खत्म हो चुका है। मुरादाबाद में पीतल, एल्युमिनियम, लकड़ी, शीशा, कपड़ा, चमड़ा का बड़ा कारोबार होता है।
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बाहर से आने वाली सब्जियां (ट्रक हड़ताल से प्रति किलोग्राम पांच से 10 रुपये वृद्धि हुई है)
शिमला मिर्च 80 रुपये
आलू 30 रुपये
प्याज 30 रुपये
टमाटर 50 रुपये
खीरा 40 रुपये
बैगन 40 रुपये
गोभी 80 रुपये
मटर 100 रुपये
करेला 40 रुपये
लोकल सब्जियां भी हो जाएंगी महंगी
ट्रकों की हड़ताल से लोकल पैदावार की सब्जियों का बाजार गिर गया है। तुरई, लौकी, पालक समेत अन्य तरकारी सस्ती हैं। लेकिन बारिश में तरकारी खेतों पर ही खराब होने शुरू हो जाएगी। इससे बाजार में आवक गिरने से कीमतें बढ़ जाएंगी।
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ट्रांसपोर्टरों की बेमियादी हड़ताल का असर बाजार पर दिखने लगा है। फल एवं सब्जियों के अलावा दैनिक जरूरत के सामान की आवक बाधित होने लगी है। खपत की तुलना में आपूर्ति नहीं होने से उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। सब्जियां उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
बाजार में अधिकांश फल एवं सब्जियां बाहर से आती हैं। थोक मंडी में 2000 क्विंटल सब्जियों और पांच सौ क्विंटल फलों की प्रतिदिन आवक हो रही है। हड़ताल से पूर्व सब्जियों की तीन हजार क्विंटल और फलों की 1200 क्विंटल तक आवक होती थी। फल एवं सब्जियां छोटे माल वाहनों से पहुंच रही हैं। हड़ताल को देखते हुए आलू एवं प्याज का स्टाक होने लगा है। जिससे इनकी कीमत बढ़ गई है। थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजार में सब्जियां महंगी हो रही हैं। टमाटर, मटर, फूल गोभी, बंद गोभी, केला, करेला, पपीता मौसमी समेत अधिकांश फल एवं सब्जियां उत्तराखंड और दिल्ली आजादपुर मंडी से मुरादाबाद पहुंचती हैं। सब्जी विक्रेता रामवती बताती हैं एक हफ्ते में अधिकतर सब्जियों में पांच से लेकर दस रुपये किलो तक तेजी आई है।
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परचून का थोक कारोबार भी ठप है। मुरादाबाद में करीब तीन दर्जन गल्ले के बड़े कारोबारी हैं। दिल्ली से परचून का सामान लेकर सीधे उत्तराखंड को सप्लाई देते हैं। इसी तरह मुरादाबाद से कपड़े की उत्तराखंड को सप्लाई होती है। दिल्ली से माल नहीं आ रहा है और कारोबारियों का स्टॉक खत्म हो चुका है। मुरादाबाद में पीतल, एल्युमिनियम, लकड़ी, शीशा, कपड़ा, चमड़ा का बड़ा कारोबार होता है।
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बाहर से आने वाली सब्जियां (ट्रक हड़ताल से प्रति किलोग्राम पांच से 10 रुपये वृद्धि हुई है)
शिमला मिर्च 80 रुपये
आलू 30 रुपये
प्याज 30 रुपये
टमाटर 50 रुपये
खीरा 40 रुपये
बैगन 40 रुपये
गोभी 80 रुपये
मटर 100 रुपये
करेला 40 रुपये
लोकल सब्जियां भी हो जाएंगी महंगी
ट्रकों की हड़ताल से लोकल पैदावार की सब्जियों का बाजार गिर गया है। तुरई, लौकी, पालक समेत अन्य तरकारी सस्ती हैं। लेकिन बारिश में तरकारी खेतों पर ही खराब होने शुरू हो जाएगी। इससे बाजार में आवक गिरने से कीमतें बढ़ जाएंगी।