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ट्रकों से पड़ा मंदा, पेट्रोल पंपों का धंधा
Updated Thu, 26 Jul 2018 02:00 AM IST
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मुरादाबाद।
ट्रकों की हड़ताल से ज्यादातर कारोबार सुस्त पड़ गया है। मंडल से बाहर जाने वाला सामान ट्रकों के कारण नहीं जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभाव पेट्रोल पंप के कारोबार पर पड़ा है। मंडल के 10 हजार ट्रकों के पहिए थमने से रोजाना करीब तीन करोड़ का नुकसान डीजल बिक्री का हो रहा है।
ट्रकों की हड़ताल से कारोबार चरमरा गया है। एक ओर जहां माल के आने और बाहर जाने का संतुलन गड़बड़ाया हुआ है, वहीं ट्रकों के डीजल न खरीदने से पंपों का धंधा भी मंदा पड़ गया है। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अनुसार मंडल के 10 हजार ट्रक पूरी तरह से खड़े हुए हैं। ये ट्रक एक दिन में तीन करोड़ से ज्यादा का डीजल खरीदते हैं। पांच दिन में 15 करोड़ का नुकसान पंप मालिकों को हो चुका है। कांठ से मेडिकल गाज-पट्टी का कारोबार देशभर में किया जाता है। ट्रकों की हड़ताल से यह सामान नहीं जा पा रहा है। इसका असर कई राज्यों की मेडिकल सेवाओं पर पड़ सकता है। अमरोहा की ढोलक देशभर में मांग है। ट्रकों की हड़ताल से ढोलक का बाहर भेजा जाना संभव नहीं हो रहा है। मिलों से चीनी की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। इसका असर किसानों के गन्ना भुगतान पर पड़ सकता है। क्षेत्र से दिल्ली को होने वाली आम की आपूर्ति भी थम गई है। इससे स्थानीय मंडियों में आम के भाव गिर रहे हैं।
पेट्रोल पंपों पर कारोबार करीब आधा रह गया है। ट्रक बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते हैं। यह पंपों का प्रमुख कारोबार होता है। हड़ताल से पंपों की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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- हाजी रिजवान कुरैशी, पंप मालिक।
मंडल के 10 हजार ट्रकों का संचालन पांच दिन से बिलकुल ठप है। ये रोजाना करीब तीन करोड़ रुपये का डीजल खरीदते हैं। पंपों का कारोबार प्रभावित होने के साथ ही बाजार में भी 40 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
- मिन्टू मदान, सचिव ट्रक आपरेटर्स यूनियन।
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ट्रकों की हड़ताल से ज्यादातर कारोबार सुस्त पड़ गया है। मंडल से बाहर जाने वाला सामान ट्रकों के कारण नहीं जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभाव पेट्रोल पंप के कारोबार पर पड़ा है। मंडल के 10 हजार ट्रकों के पहिए थमने से रोजाना करीब तीन करोड़ का नुकसान डीजल बिक्री का हो रहा है।
ट्रकों की हड़ताल से कारोबार चरमरा गया है। एक ओर जहां माल के आने और बाहर जाने का संतुलन गड़बड़ाया हुआ है, वहीं ट्रकों के डीजल न खरीदने से पंपों का धंधा भी मंदा पड़ गया है। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अनुसार मंडल के 10 हजार ट्रक पूरी तरह से खड़े हुए हैं। ये ट्रक एक दिन में तीन करोड़ से ज्यादा का डीजल खरीदते हैं। पांच दिन में 15 करोड़ का नुकसान पंप मालिकों को हो चुका है। कांठ से मेडिकल गाज-पट्टी का कारोबार देशभर में किया जाता है। ट्रकों की हड़ताल से यह सामान नहीं जा पा रहा है। इसका असर कई राज्यों की मेडिकल सेवाओं पर पड़ सकता है। अमरोहा की ढोलक देशभर में मांग है। ट्रकों की हड़ताल से ढोलक का बाहर भेजा जाना संभव नहीं हो रहा है। मिलों से चीनी की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। इसका असर किसानों के गन्ना भुगतान पर पड़ सकता है। क्षेत्र से दिल्ली को होने वाली आम की आपूर्ति भी थम गई है। इससे स्थानीय मंडियों में आम के भाव गिर रहे हैं।
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पेट्रोल पंपों पर कारोबार करीब आधा रह गया है। ट्रक बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते हैं। यह पंपों का प्रमुख कारोबार होता है। हड़ताल से पंपों की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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- हाजी रिजवान कुरैशी, पंप मालिक।
मंडल के 10 हजार ट्रकों का संचालन पांच दिन से बिलकुल ठप है। ये रोजाना करीब तीन करोड़ रुपये का डीजल खरीदते हैं। पंपों का कारोबार प्रभावित होने के साथ ही बाजार में भी 40 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
- मिन्टू मदान, सचिव ट्रक आपरेटर्स यूनियन।