{"_id":"5b6216864f1c1b8d3e8b4a5f","slug":"31533154950-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूध की मलाई चोरी कर मालामाल हो रहीं कंपनियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूध की मलाई चोरी कर मालामाल हो रहीं कंपनियां
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
दूध बिक्री करने वाली कई कंपनियां मलाई चोरी करके मालामाल हो रही हैं। इनके दूध की जांच में फैट कम पाया जा रहा है। एक्ट में फैट कम होने को गंभीर अपराध नहीं माना जाता है। इसका फायदा उठाकर कंपनियां रोजाना लाखों रुपये कमा रही हैं। दूध की फैट के दो प्वाइंट कम करने पर कंपनियों को 15 रुपये लीटर तक की बचत हो जाती है।
दूध के ब्रांड के आधार पर उसकी फैट का लेबल निर्धारित है। फुल क्रीम दूध में फैट का मानक 6 है। इसी तरह टोंड का 4 और डबल टोंड का 2 है। दूध की कैटेगरी का निर्धारण फैट के मानक के आधार पर ही किया जाता है। फुल क्रीम दूध की कीमत सामान्यतया 52 रुपये लीटर है। इसके दो प्वाइंट कम होने पर दूध की कीमत में 15 रुपये लीटर तक की कमी आ जाती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए दूध के सैंपल में जांच में कम फैट का खुलासा हुआ है। दूध के 80 फीसदी सैंपल में फैट कम मिलती है। यानी इसमें पानी की मिलावट है। दूध को 52 रुपये लीटर बेचकर कंपनियां लाखों रुपये रोजाना की चोरी कर रही हैं। सैंपल में कम फैट का खुलासा होने पर इन पर मामूली जुर्माना लगाया जाता है। ऐसे में कंपनियां हजारों रुपये का जुर्माना देकर लाखों रुपये की जेब काट रही हैं।
विज्ञापन
कई कंपनियों के दूध में फैट की मात्रा कम मिलती है। बैच नंबर के उत्पादन के आधार पर ही कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाता है। एक्ट के नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जा सकती है।
- महेश कुमार त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
विज्ञापन
दूध बिक्री करने वाली कई कंपनियां मलाई चोरी करके मालामाल हो रही हैं। इनके दूध की जांच में फैट कम पाया जा रहा है। एक्ट में फैट कम होने को गंभीर अपराध नहीं माना जाता है। इसका फायदा उठाकर कंपनियां रोजाना लाखों रुपये कमा रही हैं। दूध की फैट के दो प्वाइंट कम करने पर कंपनियों को 15 रुपये लीटर तक की बचत हो जाती है।
दूध के ब्रांड के आधार पर उसकी फैट का लेबल निर्धारित है। फुल क्रीम दूध में फैट का मानक 6 है। इसी तरह टोंड का 4 और डबल टोंड का 2 है। दूध की कैटेगरी का निर्धारण फैट के मानक के आधार पर ही किया जाता है। फुल क्रीम दूध की कीमत सामान्यतया 52 रुपये लीटर है। इसके दो प्वाइंट कम होने पर दूध की कीमत में 15 रुपये लीटर तक की कमी आ जाती है।
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए दूध के सैंपल में जांच में कम फैट का खुलासा हुआ है। दूध के 80 फीसदी सैंपल में फैट कम मिलती है। यानी इसमें पानी की मिलावट है। दूध को 52 रुपये लीटर बेचकर कंपनियां लाखों रुपये रोजाना की चोरी कर रही हैं। सैंपल में कम फैट का खुलासा होने पर इन पर मामूली जुर्माना लगाया जाता है। ऐसे में कंपनियां हजारों रुपये का जुर्माना देकर लाखों रुपये की जेब काट रही हैं।
विज्ञापन
कई कंपनियों के दूध में फैट की मात्रा कम मिलती है। बैच नंबर के उत्पादन के आधार पर ही कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाता है। एक्ट के नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जा सकती है।
- महेश कुमार त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।