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रिसर्च स्कीम में नहीं मुरादाबाद के शिक्षण संस्थानों का नाम
Updated Fri, 07 Dec 2018 02:11 AM IST
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मुरादाबाद (नीलम सिंह)।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा इंजीनियरिंग कालेजों को दी गई विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम और सेमिनार ग्रांट में मुरादाबाद के किसी भी शैक्षिक संस्थान का नाम नहीं है। कुलपति का कहना है कि विशेषज्ञों की टीम को ऐसा प्रोजेक्ट नहीं मिला होगा, जिससे संस्थानों को शामिल किया जाता।
विश्वविद्यालय ने संबद्ध कालेजों से विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम (पांच लाख रुपये तक की धनराशि) और सेमिनार ग्रांट स्कीम (एक लाख रुपये तक की धनराशि) के अंतर्गत आवेदन मांगे गए थे। इसमें विश्वेसरैया स्कीम में 88 और सेमिनार ग्रांट में 96 संस्थानों ने आवेदन किया था। आवेदन करने वालों में मुरादाबाद के संस्थानों के भी नाम शामिल थे। विवि की गठित समिति ने विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम में स्क्रीनिंग के बाद 35 संस्थानों के शिक्षकों को प्रोजेक्ट्स के प्रस्तुतीकरण के लिए बुलाया था। गुरुवार को 13 संस्थानों को ग्रांट की संस्तुति की गई। जबकि सेमिनार ग्रांट में स्क्रीनिंग के बाद 20 संस्थानों को ग्रांट की संस्तुति मिली है। इसमें बरेली के एक, गाजियाबाद के दो, मेरठ के एक, जीबी नगर के चार, कानपुर के एक, लखनऊ के दो, अंबेडकर नगर में एक, नोएडा में एक संस्थान को विश्वेसरैया स्कीम का लाभ मिला है। कुलपति प्रो. डॉ. विनय कुमार पाठक ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय से संबद्ध शैक्षिक संस्थानों को अन्य जगहों से शोध के लिए ग्रांट मिलती थी, लेकिन अब विवि कालेजों का सहयोग करना चाहता है। इससे विद्यार्थी शोध में अच्छा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने आर्यभट्टा स्टूडियो खोला है। उसमें वर्चुअल पाठ्यक्रम बनाकर लांच किया जाएगा। यदि मुरादाबाद से बेहतर पाठ्यक्रम मिलता है तो वह भी लांच होगा। शिक्षा की बेहतरी के लिए ट्रेनिंग प्लेसमेंट, मूक्स स्टूडियो, उपस्थिति निगरानी सिस्टम भी बनाया है।
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा इंजीनियरिंग कालेजों को दी गई विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम और सेमिनार ग्रांट में मुरादाबाद के किसी भी शैक्षिक संस्थान का नाम नहीं है। कुलपति का कहना है कि विशेषज्ञों की टीम को ऐसा प्रोजेक्ट नहीं मिला होगा, जिससे संस्थानों को शामिल किया जाता।
विश्वविद्यालय ने संबद्ध कालेजों से विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम (पांच लाख रुपये तक की धनराशि) और सेमिनार ग्रांट स्कीम (एक लाख रुपये तक की धनराशि) के अंतर्गत आवेदन मांगे गए थे। इसमें विश्वेसरैया स्कीम में 88 और सेमिनार ग्रांट में 96 संस्थानों ने आवेदन किया था। आवेदन करने वालों में मुरादाबाद के संस्थानों के भी नाम शामिल थे। विवि की गठित समिति ने विश्वेसरैया रिसर्च प्रमोशन स्कीम में स्क्रीनिंग के बाद 35 संस्थानों के शिक्षकों को प्रोजेक्ट्स के प्रस्तुतीकरण के लिए बुलाया था। गुरुवार को 13 संस्थानों को ग्रांट की संस्तुति की गई। जबकि सेमिनार ग्रांट में स्क्रीनिंग के बाद 20 संस्थानों को ग्रांट की संस्तुति मिली है। इसमें बरेली के एक, गाजियाबाद के दो, मेरठ के एक, जीबी नगर के चार, कानपुर के एक, लखनऊ के दो, अंबेडकर नगर में एक, नोएडा में एक संस्थान को विश्वेसरैया स्कीम का लाभ मिला है। कुलपति प्रो. डॉ. विनय कुमार पाठक ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय से संबद्ध शैक्षिक संस्थानों को अन्य जगहों से शोध के लिए ग्रांट मिलती थी, लेकिन अब विवि कालेजों का सहयोग करना चाहता है। इससे विद्यार्थी शोध में अच्छा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने आर्यभट्टा स्टूडियो खोला है। उसमें वर्चुअल पाठ्यक्रम बनाकर लांच किया जाएगा। यदि मुरादाबाद से बेहतर पाठ्यक्रम मिलता है तो वह भी लांच होगा। शिक्षा की बेहतरी के लिए ट्रेनिंग प्लेसमेंट, मूक्स स्टूडियो, उपस्थिति निगरानी सिस्टम भी बनाया है।
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