{"_id":"59ee53cc4f1c1b59678b750d","slug":"161508791244-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहेज हत्या में पति को सात साल की कैद की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहेज हत्या में पति को सात साल की कैद की सजा
Updated Tue, 24 Oct 2017 02:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एफटीसी प्रथम की अदालत ने सुनाई सजा
मुरादाबाद। पाकबड़ा के तीन साल पुराने दहेज हत्या के मामले में एफ टीसी प्रथम सत्य प्रकाश द्विवेदी की अदालत ने पति को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
पाकबड़ा थानाक्षेत्र के भाड़ला निवासी छत्रपाल ने अपनी बेटी अंशु की शादी दो जून 2013 को शाहपुर डसर निवासी पोपिल के साथ की थी। 22 मई 2014 की शाम अंशु की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। छत्रपाल ने पाकबड़ा थाने में पति पोपिल, सास सावित्री, देवर राहुल और जेठ राजू के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के दौरान जेठ और देवर का नाम केस से निकाल दिया था। जबकि पति और सास के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस मामले की सुनवाई एफटीसी प्रथम सत्य प्रकाश द्विवेदी की अदालत में चल रही थी। सरकार की ओर से एडीजीसी रेशमा बेगम ने जिरह की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पति पोपिल को 498 ए, 304 बी एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिरोध अधिनियम के आरोप में दोषी करार देते हुए सात साल की कैद की सजा और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अदालत ने सास को बरी कर दिया।
विज्ञापन
मुरादाबाद। पाकबड़ा के तीन साल पुराने दहेज हत्या के मामले में एफ टीसी प्रथम सत्य प्रकाश द्विवेदी की अदालत ने पति को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
पाकबड़ा थानाक्षेत्र के भाड़ला निवासी छत्रपाल ने अपनी बेटी अंशु की शादी दो जून 2013 को शाहपुर डसर निवासी पोपिल के साथ की थी। 22 मई 2014 की शाम अंशु की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। छत्रपाल ने पाकबड़ा थाने में पति पोपिल, सास सावित्री, देवर राहुल और जेठ राजू के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के दौरान जेठ और देवर का नाम केस से निकाल दिया था। जबकि पति और सास के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस मामले की सुनवाई एफटीसी प्रथम सत्य प्रकाश द्विवेदी की अदालत में चल रही थी। सरकार की ओर से एडीजीसी रेशमा बेगम ने जिरह की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पति पोपिल को 498 ए, 304 बी एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिरोध अधिनियम के आरोप में दोषी करार देते हुए सात साल की कैद की सजा और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अदालत ने सास को बरी कर दिया।
विज्ञापन