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डरावना खंडहर बना सोर्सिंग हब
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मुरादाबाद। पीतल नगरी के निर्यातकों का ड्रीम प्रोजेक्ट सोर्सिंग हब शुरू होने से पहले खंडहर में बदल गया है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) और कार्यदायी संस्था के आपसी विवाद के चलते सोर्सिंग हब आज तक लटका है। आधे अधूरे हब की दीवारें दरक और शीशे चकनाचूर हो चुके हैं। हब की दुकानों में कई निर्यातकों के लाखों रुपये भी फंसे हैं। शासन के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी 15 जून को रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपेंगे। इसके बाद ही सोर्सिंग हब भविष्य तय हो पाएगा।
मुरादाबाद में दो हजार निर्यातक हैं। सालाना करीब साढ़े आठ करोड़ का निर्यात कारोबार करते हैं। निर्यातकों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एमडीए ने नया मुरादाबाद सेक्टर चार में 2007 में सोर्सिंग हब की नींव रखीं। हब निर्माण की लागत 28 करोड़ थी। इसमें करीब नौ करोड़ रुपये केंद्र सरकार का अनुदान था। एमडीए ने हब निर्माण कार्य एक कंपनी को सौंप दिया। एमडीए ने करीब तीन साल पहले हब की कई दुकानें निर्यातकों को आवंटन कर दी। आवंटन भी आनन फानन में किया गया। इससे ठेकेदार और एमडीए के बीच भुगतान को लेकर विवाद बढ़ गया।
तत्कालीन चीफ इंजीनियर इंदु शेखर की ओर से ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। ठेकेदार एक नेता का रिश्तेदार है। ठेकेदार कोर्ट चला गया और करोड़ों का बकायेदारी बताई। मामला कोर्ट पहुंचने से हब लटक गया। शासन ने तभी कमिश्नर से इसकी जांच कराने के आदेश दे दिए। वित्तीय लेनदेन का मामला होने के कारण कमिश्नर ने अपर आयुक्त वित्त को जांच सौंप दी। इसमें एमडीए के अधिकारियों को शामिल किया गया। जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है। लेकिन हब पूरी तरह जर्जर हो गया है। अपर आयुक्त की ओर से 15 जून को जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी जानी है।
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- एमडीए और कार्यदायी संस्था के बीच विवाद है। कार्यदायी संस्था ने अनुबंध शर्तों से निर्माण नहीं किया है। इन सालों में प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ी है। कमिश्नर के निर्देश पर अपर आयुक्त वित्त को जांच सौंपी गई है। इसमें एमडीए के अधिकारी भी शामिल हैं। 15 जून को अपर आयुक्त वित्त को जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपनी है। - देशराज गौतम, संयुक्त निदेशक उद्योग
- एमडीए और ठेकेदार के विवाद का खामियाजा निर्यातक भुगतान रहे हैं। शासन ने 2017 में कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में कई बार मुद्दा उठाया है। समाधान आज तक नहीं हो सका है। - तंजील अहमद, अध्यक्ष मुरादाबाद ई डेवलपमेंट सोसायटी
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मुरादाबाद में दो हजार निर्यातक हैं। सालाना करीब साढ़े आठ करोड़ का निर्यात कारोबार करते हैं। निर्यातकों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एमडीए ने नया मुरादाबाद सेक्टर चार में 2007 में सोर्सिंग हब की नींव रखीं। हब निर्माण की लागत 28 करोड़ थी। इसमें करीब नौ करोड़ रुपये केंद्र सरकार का अनुदान था। एमडीए ने हब निर्माण कार्य एक कंपनी को सौंप दिया। एमडीए ने करीब तीन साल पहले हब की कई दुकानें निर्यातकों को आवंटन कर दी। आवंटन भी आनन फानन में किया गया। इससे ठेकेदार और एमडीए के बीच भुगतान को लेकर विवाद बढ़ गया।
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तत्कालीन चीफ इंजीनियर इंदु शेखर की ओर से ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। ठेकेदार एक नेता का रिश्तेदार है। ठेकेदार कोर्ट चला गया और करोड़ों का बकायेदारी बताई। मामला कोर्ट पहुंचने से हब लटक गया। शासन ने तभी कमिश्नर से इसकी जांच कराने के आदेश दे दिए। वित्तीय लेनदेन का मामला होने के कारण कमिश्नर ने अपर आयुक्त वित्त को जांच सौंप दी। इसमें एमडीए के अधिकारियों को शामिल किया गया। जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है। लेकिन हब पूरी तरह जर्जर हो गया है। अपर आयुक्त की ओर से 15 जून को जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी जानी है।
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- एमडीए और कार्यदायी संस्था के बीच विवाद है। कार्यदायी संस्था ने अनुबंध शर्तों से निर्माण नहीं किया है। इन सालों में प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ी है। कमिश्नर के निर्देश पर अपर आयुक्त वित्त को जांच सौंपी गई है। इसमें एमडीए के अधिकारी भी शामिल हैं। 15 जून को अपर आयुक्त वित्त को जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपनी है। - देशराज गौतम, संयुक्त निदेशक उद्योग
- एमडीए और ठेकेदार के विवाद का खामियाजा निर्यातक भुगतान रहे हैं। शासन ने 2017 में कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में कई बार मुद्दा उठाया है। समाधान आज तक नहीं हो सका है। - तंजील अहमद, अध्यक्ष मुरादाबाद ई डेवलपमेंट सोसायटी