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कल्कि महोत्सव की धर्म संसद में गरमाएगा मंदिर का मुद्दा
Updated Mon, 12 Nov 2018 01:15 AM IST
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चंदौसी। 12वें कल्कि महोत्सव की धर्म संसद में श्रीराम मंदिर का मुद्दा गर्मा सकता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनाव का भी असर भी महोत्सव में दिखेगा। 14 नवंबर को उद्घाटन के दौरान भाजपा सांसद वरुण गांधी के साथ भाजपा विरोधी दलों के कई दिग्गज एक मंच पर आ सकते हैं। इसलिए यह कल्कि महोत्सव भी एक बार फिर सुर्खियां बन सकता है।
कल्किधाम ऐंचोड़ा कंबोह में यूं तो कल्कि उत्सव को 2005 में ही शुरू हो गया था, लेकिन 2006 में इसे कल्कि महोत्सव नाम दिया गया। 2007 में यह महोत्सव उस समय देश में सुर्खियों में आया, जब पहली बार आतंकी संगठनों के खिलाफ यज्ञ में आहुतियां दी गई। हेमा मालिनी की मीरा और राधा कृष्ण नाटिका के बाद गंगा मुक्ति अभियान का मुद्दा उठा जिसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम को गंगा मुक्ति संग्राम का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। इसके बाद कल्कि महोत्सव में धर्म संसद हुई, जिसमें पूरे देश में साई बाबा के विरोध में स्वर उठ रहे थे तो संतों ने सांई बाबा के पक्ष में खड़े होने का एलान किया। दिलेर मेहंदी, कुमार शानू, शब्बीर कुमार, हंसराज के नगमे गूंजें तो धर्म मंच पर शेफाली जरीबाला के कांटा लगा गीत पर नृत्य से कल्कि पीठाधीश्वर को देशभर में भारी आलोचना झेलनी पड़ी। इसके बाद जब जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और मौलाना तौकीर रजा खां की गोरक्षा की अपील पर भी खूब हंगामा मचा। इस बार नूरा सिस्टर के सूफी गीत धर्म मंच पर गूंजेंगे तो मध्य प्रदेश व राजस्थान के चुनाव के रंग भी बिखरेंगे, क्योंकि इस बार मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री से इस्तीफा देने वाले कंप्यूटर बाबा, गुजरात में पाटीदार आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, भाजपा के तेज तर्रार सांसद वरुण गांधी, देश के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, जनता दल यू के अध्यक्ष शरद यादव, समाजवादी सेकुलर मोर्चा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, पूर्व राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम डा. फारूक अब्दुल्ला एक मंच पर एक साथ दिखाई देंगे। उज्जैन के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद, श्रीराम जन्म भूमि न्यास के सदस्य डा. राम विलास वेदांती, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती आदि के आने भी सहमति मिल गई हैं। कुल मिलाकर इस बार भी कल्कि महोत्सव सुर्खियों में रह सकता है।
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कल्किधाम ऐंचोड़ा कंबोह में यूं तो कल्कि उत्सव को 2005 में ही शुरू हो गया था, लेकिन 2006 में इसे कल्कि महोत्सव नाम दिया गया। 2007 में यह महोत्सव उस समय देश में सुर्खियों में आया, जब पहली बार आतंकी संगठनों के खिलाफ यज्ञ में आहुतियां दी गई। हेमा मालिनी की मीरा और राधा कृष्ण नाटिका के बाद गंगा मुक्ति अभियान का मुद्दा उठा जिसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम को गंगा मुक्ति संग्राम का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। इसके बाद कल्कि महोत्सव में धर्म संसद हुई, जिसमें पूरे देश में साई बाबा के विरोध में स्वर उठ रहे थे तो संतों ने सांई बाबा के पक्ष में खड़े होने का एलान किया। दिलेर मेहंदी, कुमार शानू, शब्बीर कुमार, हंसराज के नगमे गूंजें तो धर्म मंच पर शेफाली जरीबाला के कांटा लगा गीत पर नृत्य से कल्कि पीठाधीश्वर को देशभर में भारी आलोचना झेलनी पड़ी। इसके बाद जब जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और मौलाना तौकीर रजा खां की गोरक्षा की अपील पर भी खूब हंगामा मचा। इस बार नूरा सिस्टर के सूफी गीत धर्म मंच पर गूंजेंगे तो मध्य प्रदेश व राजस्थान के चुनाव के रंग भी बिखरेंगे, क्योंकि इस बार मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री से इस्तीफा देने वाले कंप्यूटर बाबा, गुजरात में पाटीदार आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, भाजपा के तेज तर्रार सांसद वरुण गांधी, देश के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, जनता दल यू के अध्यक्ष शरद यादव, समाजवादी सेकुलर मोर्चा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, पूर्व राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम डा. फारूक अब्दुल्ला एक मंच पर एक साथ दिखाई देंगे। उज्जैन के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद, श्रीराम जन्म भूमि न्यास के सदस्य डा. राम विलास वेदांती, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती आदि के आने भी सहमति मिल गई हैं। कुल मिलाकर इस बार भी कल्कि महोत्सव सुर्खियों में रह सकता है।
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