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जीनस मिल में एक सप्ताह पहले घायल हुए मजदूर की उपचार के दौरान मौत
Updated Mon, 09 Jul 2018 01:12 AM IST
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कांठ (अगवानपुर)। जीनस पेपर मिल में काम करते समय एक सप्ताह पहले घायल हुए मजदूर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों और गांव वालों ने शव को मिल गेट पर लाकर हंगामा किया। भीड़ ने मिल का गेट तोड़ने की कोशिश भी की। पुलिस ने उन्हें समझाबुझाकर शांत किया। वह मुआवजे की मांग कर रहे थे।
कांठ तहसील अंतर्गत पाकबड़ा थाने के गांव सुल्तानपुर फलैदा का धर्मपाल सिंह (45) पुत्र रामचरन सिंह पिछले तीन साल से ठेकेदार की ओर से अगवानपुर स्थित जीनस पेपर मिल में मजदूरी करता आ रहा था। दो जुलाई की रात को भी वह मिल में ड्यूटी पर था। आधी रात के बाद वायलर पर काम करते वक्त वह मशीन के पट्टे में आ गया। गंभीर हालत में उसे मुरादाबाद के एक निजी नर्सिंग होम भर्ती कराया गया। तीन जुलाई की तड़के परिजनों को पता लगा तो वह अस्पताल पहुंचे। हालत खराब देख वह धर्मपाल को कॉसमॉस अस्पताल ले आए। जहां शनिवार की रात उसने दम तोड़ दिया।
रविवार को परिजन धर्मपाल के शव को एंबुलेंस में डालकर लए। उन्होंने एंबुलेस को मिल के अंदर ले जाना चाहा तो सुरक्षा गार्डों ने रोक दिया। जिससे मृतक के परिजन और गांव वाले भड़क गए। उन्होंने मिल गेट को तोड़ने की कोशिश की। मिल प्रबंधकों पर गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने समझाबुझाकर भीड़ को शांत किया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर मुआवजा दिए जाने की मांग की। हंगामे के बीच मिल प्रबंधकों से घंटो वार्ता चलने के बाद शाम को दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
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कांठ तहसील अंतर्गत पाकबड़ा थाने के गांव सुल्तानपुर फलैदा का धर्मपाल सिंह (45) पुत्र रामचरन सिंह पिछले तीन साल से ठेकेदार की ओर से अगवानपुर स्थित जीनस पेपर मिल में मजदूरी करता आ रहा था। दो जुलाई की रात को भी वह मिल में ड्यूटी पर था। आधी रात के बाद वायलर पर काम करते वक्त वह मशीन के पट्टे में आ गया। गंभीर हालत में उसे मुरादाबाद के एक निजी नर्सिंग होम भर्ती कराया गया। तीन जुलाई की तड़के परिजनों को पता लगा तो वह अस्पताल पहुंचे। हालत खराब देख वह धर्मपाल को कॉसमॉस अस्पताल ले आए। जहां शनिवार की रात उसने दम तोड़ दिया।
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रविवार को परिजन धर्मपाल के शव को एंबुलेंस में डालकर लए। उन्होंने एंबुलेस को मिल के अंदर ले जाना चाहा तो सुरक्षा गार्डों ने रोक दिया। जिससे मृतक के परिजन और गांव वाले भड़क गए। उन्होंने मिल गेट को तोड़ने की कोशिश की। मिल प्रबंधकों पर गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने समझाबुझाकर भीड़ को शांत किया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर मुआवजा दिए जाने की मांग की। हंगामे के बीच मिल प्रबंधकों से घंटो वार्ता चलने के बाद शाम को दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
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