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आधार कार्ड दिखाने पर ही लगेगा एआरवी
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मुरादाबाद।
जिला अस्पताल में मुरादाबाद देहात एवं बाहरी जिलों के लोगों को अब कुत्ते के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) इंजेक्शन नहीं लगेगा। अचानक एआरवी की खपत बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। अस्पताल प्रशासन के इस फैसले से बाहरी जिलों एवं देहात से इंजेक्शन लगवाने पहुंचने वालों की परेशानी बढ़ गई है।
मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में एआरवी का संकट बना है। मुरादाबाद जिला अस्पताल को छोड़कर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एआरवी नहीं है। कुत्ते के काटने पर देहात एवं मंडल के अन्य जिलों से लोग जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार के मुताबिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब दो सौ लोग पहुंच रहे हैं। जबकि जनवरी पहले सप्ताह तक औसतन 60 से 70 लोग पहुंचते थे। जनवरी दूसरे सप्ताह में अस्पताल में एआरवी की खपत बढ़ गई है। इससे अस्पताल के महीने भर का कोटा एक ही सप्ताह में खत्म हो जाएगा।
ओपीडी चिकित्सक डा. शकील के मुताबिक एआरवी लगाने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता कर दी है। आधार कार्ड मांगने से इंजेक्शन लगवाने आने वाले व्यक्ति की आसानी से पहचान हो रही है। मुरादाबाद देहात और अन्य जिले का होने पर उसे इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। मुरादाबाद शहर के लोगों की भी स्क्रीनिंग की जा रही है। जिन लोगों के शरीर पर कुत्ते के हमला करने पर दांत नहीं लगे हैं, उन्हें भी इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। जिला अस्पताल से रोजाना दर्जनों लोग बिना इंजेक्शन लगाए वापस लौट रहे हैं। इनमें कुछ लोग मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदकर निजी अस्पतालों में लगवा रहे हैं। निजी अस्पताल में एआरवी की एक डोज करीब साढ़े चार सौ रुपये की है। कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन की पांच डोज लगानी पड़ती हैं।
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- एआरवी का सभी सरकारी अस्पतालों में संकट है। जिला अस्पताल में भी सीमित स्टॉक है। इंजेक्शन के लिए शहर के लोग पहली प्राथमिकता हैं। फिलहाल बाहरी से आने वालों को इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। श्ह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
- डा. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में मुरादाबाद देहात एवं बाहरी जिलों के लोगों को अब कुत्ते के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) इंजेक्शन नहीं लगेगा। अचानक एआरवी की खपत बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। अस्पताल प्रशासन के इस फैसले से बाहरी जिलों एवं देहात से इंजेक्शन लगवाने पहुंचने वालों की परेशानी बढ़ गई है।
मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में एआरवी का संकट बना है। मुरादाबाद जिला अस्पताल को छोड़कर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एआरवी नहीं है। कुत्ते के काटने पर देहात एवं मंडल के अन्य जिलों से लोग जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार के मुताबिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब दो सौ लोग पहुंच रहे हैं। जबकि जनवरी पहले सप्ताह तक औसतन 60 से 70 लोग पहुंचते थे। जनवरी दूसरे सप्ताह में अस्पताल में एआरवी की खपत बढ़ गई है। इससे अस्पताल के महीने भर का कोटा एक ही सप्ताह में खत्म हो जाएगा।
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ओपीडी चिकित्सक डा. शकील के मुताबिक एआरवी लगाने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता कर दी है। आधार कार्ड मांगने से इंजेक्शन लगवाने आने वाले व्यक्ति की आसानी से पहचान हो रही है। मुरादाबाद देहात और अन्य जिले का होने पर उसे इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। मुरादाबाद शहर के लोगों की भी स्क्रीनिंग की जा रही है। जिन लोगों के शरीर पर कुत्ते के हमला करने पर दांत नहीं लगे हैं, उन्हें भी इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। जिला अस्पताल से रोजाना दर्जनों लोग बिना इंजेक्शन लगाए वापस लौट रहे हैं। इनमें कुछ लोग मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदकर निजी अस्पतालों में लगवा रहे हैं। निजी अस्पताल में एआरवी की एक डोज करीब साढ़े चार सौ रुपये की है। कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन की पांच डोज लगानी पड़ती हैं।
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- एआरवी का सभी सरकारी अस्पतालों में संकट है। जिला अस्पताल में भी सीमित स्टॉक है। इंजेक्शन के लिए शहर के लोग पहली प्राथमिकता हैं। फिलहाल बाहरी से आने वालों को इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। श्ह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
- डा. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल