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खरना पूजा के साथ शुरू किया छठ का व्रत
Updated Tue, 13 Nov 2018 02:41 AM IST
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मुरादाबाद। शहर में चारो ओर छठ महापर्व की धूम मची हुई है। चार दिवसीय पर्व के दूसरे दिन सोमवार को खरना पूजा के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हुआ। विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों ने घाटों और पार्कों की साफ-सफाई करवाई। इसके अलावा बाजार में पूजा का सामान खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।
सोमवार सुबह स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने छठ मैया की पूजा-अर्चना की। शाम को मिट्टी के नए चूल्हे में आम की लकड़ियां जलाकर उस पर गुड़ की खीर और पूरी बनाई। परिवार के सभी सदस्यों के साथ कुल देवता की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। केले के पत्ते पर रोटी और खीर रखी गई। हवन के बाद बच्चों को प्रसाद खिलाया। महिलाओं ने छठी मैया के गीत गाए। व्रती महिलाएं मंगलवार शाम को डूबते सूरज को अर्घ्य देने के बाद बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूर्ण करेंगी।
पूजा सामग्री की हुई जमकर खरीदारी
छठ महापर्व की तैयारियों को लेकर बाजार में काफी रौनक रही। पर्व के तीसरे दिन मंगलवार को होने वाली प्रमुख पूजा के लिए लोगों ने सभी प्रकार के फल, लाल चुनरी, गन्ने, सूप, बाग की टोकरी (दौरा) आदि खरीदे। लोगों के उत्साह को देखते हुए दुकानदारों ने सूप और टोकरी के दामों में बढ़ोतरी कर दी। सामान्य तौर पर 140 रुपये की मिलने वाली टोकरी सोमवार को 250 रुपये तक बिकी।
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पक्के घाटों की हुई पुताई
पूर्वांचल सेवा समिति के महानगर अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि पार्क की सजावट की गई है। बुद्धि विहार के पक्के घाट पर प्रतिवर्ष सौ से डेढ़ सौ परिवार पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। यहां पर गांगन, पाकबड़ा, बुद्धिविहार, खुशहालपुर, मीरपुर के श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा रामगंगा नदी के पास, लाइनपार में केजीके पुल के पास, कपूर कंपनी पर हुल्का माता मंदिर के पास और पीतल नगरी में भी दिनभर घाटों की सफाई और पुताई चलती रही। लोगों ने मुख्य पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। पूर्वांचल जन कल्याण संस्था रेलवे हरथला कालोनी के उपाध्यक्ष शारदानंद पांडे ने बताया कि आरपीएफ लाइन में मंदिर के पास करीब 50 साल से छठ पूजा की जा रही है। मंगलवार शाम पहला अर्घ्य और बुधवार सुबह दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा।
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सोमवार सुबह स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने छठ मैया की पूजा-अर्चना की। शाम को मिट्टी के नए चूल्हे में आम की लकड़ियां जलाकर उस पर गुड़ की खीर और पूरी बनाई। परिवार के सभी सदस्यों के साथ कुल देवता की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। केले के पत्ते पर रोटी और खीर रखी गई। हवन के बाद बच्चों को प्रसाद खिलाया। महिलाओं ने छठी मैया के गीत गाए। व्रती महिलाएं मंगलवार शाम को डूबते सूरज को अर्घ्य देने के बाद बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूर्ण करेंगी।
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पूजा सामग्री की हुई जमकर खरीदारी
छठ महापर्व की तैयारियों को लेकर बाजार में काफी रौनक रही। पर्व के तीसरे दिन मंगलवार को होने वाली प्रमुख पूजा के लिए लोगों ने सभी प्रकार के फल, लाल चुनरी, गन्ने, सूप, बाग की टोकरी (दौरा) आदि खरीदे। लोगों के उत्साह को देखते हुए दुकानदारों ने सूप और टोकरी के दामों में बढ़ोतरी कर दी। सामान्य तौर पर 140 रुपये की मिलने वाली टोकरी सोमवार को 250 रुपये तक बिकी।
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पक्के घाटों की हुई पुताई
पूर्वांचल सेवा समिति के महानगर अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि पार्क की सजावट की गई है। बुद्धि विहार के पक्के घाट पर प्रतिवर्ष सौ से डेढ़ सौ परिवार पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। यहां पर गांगन, पाकबड़ा, बुद्धिविहार, खुशहालपुर, मीरपुर के श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा रामगंगा नदी के पास, लाइनपार में केजीके पुल के पास, कपूर कंपनी पर हुल्का माता मंदिर के पास और पीतल नगरी में भी दिनभर घाटों की सफाई और पुताई चलती रही। लोगों ने मुख्य पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। पूर्वांचल जन कल्याण संस्था रेलवे हरथला कालोनी के उपाध्यक्ष शारदानंद पांडे ने बताया कि आरपीएफ लाइन में मंदिर के पास करीब 50 साल से छठ पूजा की जा रही है। मंगलवार शाम पहला अर्घ्य और बुधवार सुबह दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा।