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42 घंटे बाद लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग बहाल
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मुरादाबाद।
लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग सोमवार को 42 घंटे बाद बहाल हो पाया। मंडल के बघौली और बालामऊ के बीच शनिवार शाम कोयला लदी मालगाड़ी के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। डिब्बे हटाने और ट्रैक साफ करने में दो दिन लग गए। इस दौरान सौ से ज्यादा ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया गया। इस हादसे की वजह से सोमवार को भी चार ट्रेनें रद्द रहीं। रेल संचालन ठप होने से यात्रियों को खासी परेशानियां झेलीं। वाराणसी से दिल्ली जाने वाली महामना एक्सप्रेस ट्रेन यहां से गुजारकर अफसरों ने राहत की सांस लीं। इसके बाद अप और डाउन पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया। इस मामले में उत्तर रेलवे मुख्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं। टीम के दौरे के बाद ही हादसे की सही वजह साफ हो पाएगी।
हरदोई के बघौली और बालामऊ के बीच शनिवार साढ़े चार बजे कोयला लदी मालगाड़ी की 17 बोगियां बेपटरी हो र्गईं थीं। जिससे लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग पर अप और डाउन ट्रेनों का संचालन ठप हो गया था। मुरादाबाद, रोजा और लखनऊ की एआरटी मौके पर बुला ली गई थीं। इस दौरान कई ट्रेनें रद्द गई गई, जबकि सौ से ज्यादा गाड़ियां बदले रूट से चलाई थीं। सोमवार सुबह साढ़े चार बजे ट्रैक साफ कराने के बाद डाउन लाइन का अफसरों ने निरीक्षण किया। निरीक्षण में सब कुछ सही मिलने पर डाउन लाइन पर ट्रेन संचालन शुरू कर दिया है, जबकि साढ़े ग्यारह बजे 42 घंटे बाद अप लाइन पर भी ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। दो दिन बाद लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग बहाल हो पाया। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि महामना एक्सप्रेस ट्रेन गुजारी गई है। इस मामले में मुख्यालय से ही जांच के आदेश दिए गए हैं। दिल्ली से टीम जांच करने आएगी। इसके बाद ही हादसे की वजह साफ हो जाएगी।
हादसे ने खोली रेलवे की पोल, लेनी पड़ी सेना की मदद
मुरादाबाद। हरदोई हादसे ने रेलवे की पोल खोल दी। ट्रैक साफ करने में रेलवे के संसाधन कम पड़ गए। सेना की मदद से ट्रैक साफ किया गया। सेना की क्रेन से ट्रैक पर पड़े डिब्बों को हटाया गया। इसके बाद ही ट्रैक साफ हो पाया।
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शनिवार शाम साढ़े चार बजे हादसा हुआ था। जिससे लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन ठप हो गया था। ट्रैक साफ होने में 42 घंटे का लंबा समय लग गया। इस दौरान रेलवे के सभी संसाधन कम पड़ गए थे। हादसे के बाद मुरादाबाद, रोजा और लखनऊ से एआरटी मौैके पर बुलाई गई थीं। लेकिन एआरटी डिब्बों को नहीं हटा पाई। इसके बाद रेलवे ने सेना की मदद ली और क्रेन मंगवाई। सेना की क्रेन से डिब्बों को हटाकर ट्रेनों का संचालन शुरू करा दिया गया।
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लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग सोमवार को 42 घंटे बाद बहाल हो पाया। मंडल के बघौली और बालामऊ के बीच शनिवार शाम कोयला लदी मालगाड़ी के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। डिब्बे हटाने और ट्रैक साफ करने में दो दिन लग गए। इस दौरान सौ से ज्यादा ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया गया। इस हादसे की वजह से सोमवार को भी चार ट्रेनें रद्द रहीं। रेल संचालन ठप होने से यात्रियों को खासी परेशानियां झेलीं। वाराणसी से दिल्ली जाने वाली महामना एक्सप्रेस ट्रेन यहां से गुजारकर अफसरों ने राहत की सांस लीं। इसके बाद अप और डाउन पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया। इस मामले में उत्तर रेलवे मुख्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं। टीम के दौरे के बाद ही हादसे की सही वजह साफ हो पाएगी।
हरदोई के बघौली और बालामऊ के बीच शनिवार साढ़े चार बजे कोयला लदी मालगाड़ी की 17 बोगियां बेपटरी हो र्गईं थीं। जिससे लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग पर अप और डाउन ट्रेनों का संचालन ठप हो गया था। मुरादाबाद, रोजा और लखनऊ की एआरटी मौके पर बुला ली गई थीं। इस दौरान कई ट्रेनें रद्द गई गई, जबकि सौ से ज्यादा गाड़ियां बदले रूट से चलाई थीं। सोमवार सुबह साढ़े चार बजे ट्रैक साफ कराने के बाद डाउन लाइन का अफसरों ने निरीक्षण किया। निरीक्षण में सब कुछ सही मिलने पर डाउन लाइन पर ट्रेन संचालन शुरू कर दिया है, जबकि साढ़े ग्यारह बजे 42 घंटे बाद अप लाइन पर भी ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। दो दिन बाद लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग बहाल हो पाया। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि महामना एक्सप्रेस ट्रेन गुजारी गई है। इस मामले में मुख्यालय से ही जांच के आदेश दिए गए हैं। दिल्ली से टीम जांच करने आएगी। इसके बाद ही हादसे की वजह साफ हो जाएगी।
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हादसे ने खोली रेलवे की पोल, लेनी पड़ी सेना की मदद
मुरादाबाद। हरदोई हादसे ने रेलवे की पोल खोल दी। ट्रैक साफ करने में रेलवे के संसाधन कम पड़ गए। सेना की मदद से ट्रैक साफ किया गया। सेना की क्रेन से ट्रैक पर पड़े डिब्बों को हटाया गया। इसके बाद ही ट्रैक साफ हो पाया।
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शनिवार शाम साढ़े चार बजे हादसा हुआ था। जिससे लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन ठप हो गया था। ट्रैक साफ होने में 42 घंटे का लंबा समय लग गया। इस दौरान रेलवे के सभी संसाधन कम पड़ गए थे। हादसे के बाद मुरादाबाद, रोजा और लखनऊ से एआरटी मौैके पर बुलाई गई थीं। लेकिन एआरटी डिब्बों को नहीं हटा पाई। इसके बाद रेलवे ने सेना की मदद ली और क्रेन मंगवाई। सेना की क्रेन से डिब्बों को हटाकर ट्रेनों का संचालन शुरू करा दिया गया।