{"_id":"5b996ca2867a550139683d52","slug":"11536781474-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुंदरकी में पहली मुहर्रम को निकला जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुंदरकी में पहली मुहर्रम को निकला जुलूस
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुंदरकी। पहली मुहर्रम को नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन के गम में शिया अजादारों ने या हुसैन की सदाओं के साथ अलम मुबारक का जुलूस निकाला। गम का प्रतीक काला अलम कर्बला में नस्ब किया गया। जुलूस में सीनाजनी-नोहाख्वानी की गई।
बुधवार की शाम तेज बारिश के बीच कुंदरकी नगर के मोहल्ला सादात में कमर अब्बास नकवी के अजाखाने में मजलिस हुई जिसमें कैसर रिजवी ने वाक्यात ए कर्बला ब्यान करते हुए कहा कि रसूले करीम और अहलेबैत की जिंदगी हमारे लि नमूना ए अमल है। सुन्नत ए रसूल पर अमल करके हमें जिंदगी गुजारनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यजीद इस्लाम में बदलाव करके शैतानी हुकूमत कायम करना चाहता था, जिससे कि इस्लाम बदनाम हो जाए। आज भी कुछ यजीदी सोच रखने वाले इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में इंसानियत को बचाने के लिए अपने 72 जानिसारों के साथ कुर्बानी दी और आपसी भाईचारे का पैगाम दिया। शहादत का ब्यान सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गई। मजलिस में गुलाम मेंहदी रिजवी ने मरसिया पढ़ा। मजलिस के बाद या हुसैन की सदाओं के साथ काले अलम का जुलूस निकला। जुलूस नगर में ही मोहल्ला पश्चिमी सादात और पैंठ बाजार से होता हुआ कर्बला पहुंचा।
जुलूस के दौरान रईस मियां, गुलाम मेहंदी, आरिफ रजा, साजिद रजा, शहजी अब्बास रजा असकारी आदि ने नौहाख्वानी की वहीं युवाओं ने या हुसैन की सदाओं के बीच सीनाजनी की। जुलूस के दौरान अजादार की काफी संख्या में शािमल रहे। जुलूस में सुरक्षा व्यवस्था को पुलिस फोर्स के साथ मुस्तेहद नजर आए। उधर पहली मुहर्रम को इमामबाडों और अजाखानों में मजलिसों और शहादतनामों की महफिलें हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार की शाम तेज बारिश के बीच कुंदरकी नगर के मोहल्ला सादात में कमर अब्बास नकवी के अजाखाने में मजलिस हुई जिसमें कैसर रिजवी ने वाक्यात ए कर्बला ब्यान करते हुए कहा कि रसूले करीम और अहलेबैत की जिंदगी हमारे लि नमूना ए अमल है। सुन्नत ए रसूल पर अमल करके हमें जिंदगी गुजारनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यजीद इस्लाम में बदलाव करके शैतानी हुकूमत कायम करना चाहता था, जिससे कि इस्लाम बदनाम हो जाए। आज भी कुछ यजीदी सोच रखने वाले इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में इंसानियत को बचाने के लिए अपने 72 जानिसारों के साथ कुर्बानी दी और आपसी भाईचारे का पैगाम दिया। शहादत का ब्यान सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गई। मजलिस में गुलाम मेंहदी रिजवी ने मरसिया पढ़ा। मजलिस के बाद या हुसैन की सदाओं के साथ काले अलम का जुलूस निकला। जुलूस नगर में ही मोहल्ला पश्चिमी सादात और पैंठ बाजार से होता हुआ कर्बला पहुंचा।
विज्ञापन
जुलूस के दौरान रईस मियां, गुलाम मेहंदी, आरिफ रजा, साजिद रजा, शहजी अब्बास रजा असकारी आदि ने नौहाख्वानी की वहीं युवाओं ने या हुसैन की सदाओं के बीच सीनाजनी की। जुलूस के दौरान अजादार की काफी संख्या में शािमल रहे। जुलूस में सुरक्षा व्यवस्था को पुलिस फोर्स के साथ मुस्तेहद नजर आए। उधर पहली मुहर्रम को इमामबाडों और अजाखानों में मजलिसों और शहादतनामों की महफिलें हुई।
विज्ञापन