{"_id":"5c0838e7bdec2241c54d1436","slug":"111544042727-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चकबंदी के घपलों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चकबंदी के घपलों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
Updated Thu, 06 Dec 2018 02:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
चकबंदी की आड़ में मुगलपुर अगवानपुर में 10 साल से चल रहे अधिकारियों के खेल की शिकायतें शासन तक पहुंचने के बाद अब बिलारी और कुंदरकी के कई गांवों के लोगाें ने यही शिकायतें दोहराई हैं। ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराने के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया है। चकबंदी विभाग के निचले स्तर से अधिकारियों पर भूमि की खरीद फरोख्त में शामिल होने और चकबंदी के नाम पर ग्रामीणों का शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मुगलपुर अगवानपुर मामले मेें शासन पहले से गोपनीय जांच करा रहा है। इन घपलों पर बड़े अधिकारी कार्रवाई करने में नाकाम हैं।
बिलारी तहसील में कुंदरकी थाना क्षेत्र के गांव अब्दुल्लापुर के ग्रामीणों ने बुधवार का कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन सौंपा। लेखपाल, कानूनगो समेत चकबंदी विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इन्हाेंने जांच और दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चकबंदी में बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर जांच कराएं तो करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आएगा। प्रदर्शन करने वालों में चेतराम, सुखदेवी, विजय, मकसूद, मुंशीराम, नरेश शर्मा, सतीश, अशोक आदि थे। चकबंदी आयुक्त से भी मामले की शिकायत की गई है।
पिछले 10 वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया झेल रहे मुगलपुर अगवानपुर के लोगों ने भी चकबंदी आयुक्त और पीएमओ को शिकायतें भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। मुगलपुर अगवानपुर के लोगों का आरोप है कि शहर की सीमा से सटा होने की वजह से जमीन के रेट आसमान को छू रहे हैं। इसलिए मुगलपुर अगवानपुर में चकबंदी विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों ने खुद जमीन की खरीद फरोख्त शुरू कर दी है और 10 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया को लटका रखा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यदि सीबीआई जांच हुई तो करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये का घोटाला उजागर होगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बड़े अधिकारी सबकुछ जानने के बाद भी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
आयकर की नजरों में चढ़े कई चकबंदी वाले
मुरादाबाद।
चकबंदी विभाग के खेल को जानने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने में नाकाम हैं। डीडीसी/ एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हाेंने मुगलपुर अगवानपुर में चकबंदी में कुछ कर्मचारियों की भूमिका गड़बड़ देख उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग को भी चकबंदी विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में सटीक जानकारियां मिली हैं। इसके बाद आयकर विभाग इनकी संपत्तियों की छानबीन में जुट गया है।
विज्ञापन
चकबंदी की आड़ में मुगलपुर अगवानपुर में 10 साल से चल रहे अधिकारियों के खेल की शिकायतें शासन तक पहुंचने के बाद अब बिलारी और कुंदरकी के कई गांवों के लोगाें ने यही शिकायतें दोहराई हैं। ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराने के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया है। चकबंदी विभाग के निचले स्तर से अधिकारियों पर भूमि की खरीद फरोख्त में शामिल होने और चकबंदी के नाम पर ग्रामीणों का शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मुगलपुर अगवानपुर मामले मेें शासन पहले से गोपनीय जांच करा रहा है। इन घपलों पर बड़े अधिकारी कार्रवाई करने में नाकाम हैं।
बिलारी तहसील में कुंदरकी थाना क्षेत्र के गांव अब्दुल्लापुर के ग्रामीणों ने बुधवार का कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन सौंपा। लेखपाल, कानूनगो समेत चकबंदी विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इन्हाेंने जांच और दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चकबंदी में बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर जांच कराएं तो करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आएगा। प्रदर्शन करने वालों में चेतराम, सुखदेवी, विजय, मकसूद, मुंशीराम, नरेश शर्मा, सतीश, अशोक आदि थे। चकबंदी आयुक्त से भी मामले की शिकायत की गई है।
विज्ञापन
पिछले 10 वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया झेल रहे मुगलपुर अगवानपुर के लोगों ने भी चकबंदी आयुक्त और पीएमओ को शिकायतें भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। मुगलपुर अगवानपुर के लोगों का आरोप है कि शहर की सीमा से सटा होने की वजह से जमीन के रेट आसमान को छू रहे हैं। इसलिए मुगलपुर अगवानपुर में चकबंदी विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों ने खुद जमीन की खरीद फरोख्त शुरू कर दी है और 10 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया को लटका रखा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यदि सीबीआई जांच हुई तो करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये का घोटाला उजागर होगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बड़े अधिकारी सबकुछ जानने के बाद भी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
आयकर की नजरों में चढ़े कई चकबंदी वाले
मुरादाबाद।
चकबंदी विभाग के खेल को जानने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई करने में नाकाम हैं। डीडीसी/ एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हाेंने मुगलपुर अगवानपुर में चकबंदी में कुछ कर्मचारियों की भूमिका गड़बड़ देख उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग को भी चकबंदी विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में सटीक जानकारियां मिली हैं। इसके बाद आयकर विभाग इनकी संपत्तियों की छानबीन में जुट गया है।