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पानी घटने के साथ दुश्वारियां शुरू
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 29 Aug 2016 12:14 AM IST
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घाट पर कीचड़
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बाढ़ का असर कम होने के साथ ही कई क्षेत्रों में कीचड़ गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। इससे संक्रामक बीमारियाें का खतरा बढ़ता जा रहा है। सिल्ट और कचरे में धूप निकलने के साथ ही सड़न शुरू हो गई है। इससे उठने वाली दुर्गंध के कारण वहां टिकना मुश्किल हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाईयाें का वितरण भले ही कर दिया जा रहा हो, लेकिन संक्रामक बीमारियाें पर रोकथाम नहीं लग पा रहा है। बाढ़ क्षेत्रों में वाइरल फीवर, उल्टी-दस्त आदि बीमारियां फैलने लगीं हैं।
नगर के रुक्खड़ घाट,नार घाट, संकठा घाट, पक्का घाट, सुंदर घाट, ओलियर घाट आदि के किनारे रहने वालों के लिए अब मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। यहां सिल्ट जमा हो गया है। इससे आसपास रहने वालों के लिए दुर्गंध ने मुश्किल पैदा कर दिया है। इन इलाकों में नगरपालिका सफाई का कोई इंतजाम नहीं कर रहा है। इससे लोगों में नाराजगी है।
जिगना संवाददाता के अनुसार आयुक्त के निर्देश पर नायब तहसीलदार छानबे उमेश कुमार एवं राजस्व निरीक्षक शोभनाथ पाठक ने रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं बाढ़ चौकियों व राहत शिविर का निरीक्षण किया। काशी सरपत्ती में सफाई कर्मी के अनुपस्थित रहने पर उसके विरूद्ध कार्रवाई के लिए लिखा। बाढ़ चौकी श्रीनिवासधाम पर चौकी प्रभारी के अनुपस्थित रहने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेखपालों से फसल नुकसान तथा गिरे मकानाें की सूची उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य विभाग कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने को कहा।
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घट रहा पानी- लगातार बाढ़ से लोगों को निजात मिलती जा रही है। गंगा का जलस्तर प्रति घंटे पांच सेंटीमीटर की दर से नीचे जा रहा है। नदी का पानी तेजी से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों से हट रहा है। अपने पीछे कीचड़ और गंदगी छोड़ रहा है। रविवार की रात आठ गंगा का जलस्तर 76.00 रहा जो खतरे के निशान 77.724 से एक मीटर 724 सेंटीमीटर नीचे आ गया है।
बाढ़ से प्रभावित 50 फीसदी गांवों से पानी वापस जा चुका है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। कुछ गांवों में पानी बना हुआ है तो वह भी अब घुटने भर पानी रह गया है। छानबे, मझवां, सीखड़ और कोन में कुछ गांवों में पानी भरा हुआ है। आधा दर्जन मार्गों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
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नगर के रुक्खड़ घाट,नार घाट, संकठा घाट, पक्का घाट, सुंदर घाट, ओलियर घाट आदि के किनारे रहने वालों के लिए अब मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। यहां सिल्ट जमा हो गया है। इससे आसपास रहने वालों के लिए दुर्गंध ने मुश्किल पैदा कर दिया है। इन इलाकों में नगरपालिका सफाई का कोई इंतजाम नहीं कर रहा है। इससे लोगों में नाराजगी है।
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जिगना संवाददाता के अनुसार आयुक्त के निर्देश पर नायब तहसीलदार छानबे उमेश कुमार एवं राजस्व निरीक्षक शोभनाथ पाठक ने रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं बाढ़ चौकियों व राहत शिविर का निरीक्षण किया। काशी सरपत्ती में सफाई कर्मी के अनुपस्थित रहने पर उसके विरूद्ध कार्रवाई के लिए लिखा। बाढ़ चौकी श्रीनिवासधाम पर चौकी प्रभारी के अनुपस्थित रहने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेखपालों से फसल नुकसान तथा गिरे मकानाें की सूची उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य विभाग कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने को कहा।
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घट रहा पानी- लगातार बाढ़ से लोगों को निजात मिलती जा रही है। गंगा का जलस्तर प्रति घंटे पांच सेंटीमीटर की दर से नीचे जा रहा है। नदी का पानी तेजी से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों से हट रहा है। अपने पीछे कीचड़ और गंदगी छोड़ रहा है। रविवार की रात आठ गंगा का जलस्तर 76.00 रहा जो खतरे के निशान 77.724 से एक मीटर 724 सेंटीमीटर नीचे आ गया है।
बाढ़ से प्रभावित 50 फीसदी गांवों से पानी वापस जा चुका है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। कुछ गांवों में पानी बना हुआ है तो वह भी अब घुटने भर पानी रह गया है। छानबे, मझवां, सीखड़ और कोन में कुछ गांवों में पानी भरा हुआ है। आधा दर्जन मार्गों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।