मिर्जापुर। गंगा व उसकी सहायक नदियों में बाढ़ का पानी घटने के बावजूद तटवर्ती इलाको की मुसीबत बढ़ गयी हैं। तो जिले के तमाम बाढ़ प्रभावित इलाकों में जगह-जगह अब भी जलभराव से नई समस्याएं आ खड़ी हुई हैं। तटवर्ती इलाकों में ग्रामीण अब गंदगी, दुर्गंध से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। प्रभावित गांवों में साफ-सफाई, व दवाओं के छिड़काव न होने से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। कहीं-कहीं दवाओं के छिड़काव के नाम पर सिर्फ कोरम ही पूरा किए जा रहे हैं। गंगा में आई बाढ़ से सदर व चुनार तहसील क्षेत्र के छानबे विकास खंड समेत कोन, मझवां, सीखड़, सिटी, पहाड़ी, नरायनपुर विकास खंड के सैकड़ो गांव प्रभावित रहे। बाढ़ से छानबे, कोन व सीखड़ ब्लाक के गांव प्रभावित रहे। चील्ह प्रतिनिधि के अनुसार, कोन विकास खंड के हरसिंहपुर, मल्लेपुर, श्रीपट्टी, मवैया, मझिगवां, चील्ह, दलापट्टी, कमासीन, गड़गेड़ी, गहिया समेत कई गांव प्रभावित रहे। गंगा में पानी कम होने के बावजूद अधिकांश गांवों बस्तियों के आसपास व सिवानों में बाढ़ का पानी लगा हुआ है। खेतो फसलों और गांव के आसपास घांस सड़ने से भीषण दुर्गंध उठ रही है। गंदगी के चलते संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर ग्रामीणों को सता रहा है। कैलहट, क्षेत्र में आई बाढ़ से गंगा किनारे बसे ग्रामीण बेहाल हैं। एक तरफ जहां सारी फसलें डूब कर नष्ट हो गई हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग घर से बेघर हो गए हैं। ऐसे संकट की घड़ी में गंगा में आई बाढ़ तो चली गई मगर पीछे किसानों को दर्द दे गई। लोग बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। कैलहट, सझौली, नकहरा, पचेवरा, बेला,जलालपुर माफी, बगही, चंदापुर, गोविंदपुर, भवानीपुर, धरम्मरपुर, चित्रहा, गांगपुर, रामराय पुर के रामबली सिंह, विजय सिंह, नागेश, तेहबहादुर सिंह, मोहन सिंह, जय सिंह, गुड्डू सिंह आदि किसानों ने प्रशासन से डूबे फसलों के मुआवजा देने तथा गांव में पांव पसार रही संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए दवाओं के छिड़काव की मांग की है।