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मां का शृंगार दर्शन कर भक्त निहाल
संवाददाता विंध्याचल।
Updated Sun, 30 Aug 2015 12:26 AM IST
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श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर मां विंध्यवासिनी के दरबार में आस्थावानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जगत जननी का तरह-तरह के फूलों से किया गया भव्य श्रृंगार दर्शन पाकर श्रद्घालु निहाल हो उठे। मंदिर की छत पर जहां एक ओर कतार में बैठ साधक मंत्रोच्यार के बीच साधना करने में मशगूल रहे, वहीं दूसरी तरफ मुंडन संस्कार कराने का दौर अनवरत चलता रहा।
घंटा व घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
पूर्णिमा की भोर में मंगला आरती के बाद से ही विंध्यधाम में माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्घालु पहुंचने लगे थे। नारियल-चुनरी, रोरी-रक्षा एवं प्रसाद लिए भक्तजन मंदिर पहुंचे जहां माता का भव्य श्रृंगार दर्शन कर निहाल हो उठे।
महिला भक्तों ने जहां एक ओर माता को हलवा-पूड़ी का भोग लगाकर पूजन-अर्चन किया, वहीं पुरुषों ने मंदिर में हाजिरी लगाकर सुख-समृद्घि के लिए कामना की। विंध्याचल के गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान-ध्यान करने के लिए स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। गंगा घाटों पर फैली गंदगी और कीचड़ के चलते स्नानार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की अर्चना की।विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने के बाद भक्तों ने विंध्याचल की गलियों में सजी दुकानों से अपने जरूरत की वस्तुओं की जमकर खरीदारी की। विंध्य क्षेत्र में उमड़ी श्रद्घालुओं की भारी भीड़ के चलते धाम क्षेत्र की सभी गलियां पटी रहीं।
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धाम क्षेत्र के कई मार्गों पर जाम लगने से दर्शनार्थियों को असुविधा का भी सामना करना पड़ा। तरह-तरह के फूलों से की गई मंदिर की सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के मद्देनजर पुलिस और पीएसी के जवान मुस्तैद रहे, वहीं श्री विंध्य पंडा समाज के लोग भी भक्तों की सेवा करने में तल्लीन दिखे।
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घंटा व घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
पूर्णिमा की भोर में मंगला आरती के बाद से ही विंध्यधाम में माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्घालु पहुंचने लगे थे। नारियल-चुनरी, रोरी-रक्षा एवं प्रसाद लिए भक्तजन मंदिर पहुंचे जहां माता का भव्य श्रृंगार दर्शन कर निहाल हो उठे।
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महिला भक्तों ने जहां एक ओर माता को हलवा-पूड़ी का भोग लगाकर पूजन-अर्चन किया, वहीं पुरुषों ने मंदिर में हाजिरी लगाकर सुख-समृद्घि के लिए कामना की। विंध्याचल के गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान-ध्यान करने के लिए स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। गंगा घाटों पर फैली गंदगी और कीचड़ के चलते स्नानार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की अर्चना की।विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने के बाद भक्तों ने विंध्याचल की गलियों में सजी दुकानों से अपने जरूरत की वस्तुओं की जमकर खरीदारी की। विंध्य क्षेत्र में उमड़ी श्रद्घालुओं की भारी भीड़ के चलते धाम क्षेत्र की सभी गलियां पटी रहीं।
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धाम क्षेत्र के कई मार्गों पर जाम लगने से दर्शनार्थियों को असुविधा का भी सामना करना पड़ा। तरह-तरह के फूलों से की गई मंदिर की सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के मद्देनजर पुलिस और पीएसी के जवान मुस्तैद रहे, वहीं श्री विंध्य पंडा समाज के लोग भी भक्तों की सेवा करने में तल्लीन दिखे।