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नाले के गड्ढे का पानी पीने को विवश हैं ग्रामीण
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लालगंज। आधुनिक दौर में विकास के दावे के बीच लालगंज ब्लॉक व तहसील मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर स्थित रामपुर कामता पहाड़ी बस्ती के निवासी गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं। बस्ती में हैंडपंप तक नहीं है। इसलिए ग्रामीण गड्ढा खोदकर परिवार का प्यास बुझा रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस क्षेत्र को प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजना डोर टू डोर पाइप लाइन योजना से भी नहीं जोड़ा गया है।
विकासखंड लालगंज रामपुर कामता बस्ती के डेढ़ सौ के लगभग लोगों को पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण बस्तीवासी नाले में गड्ढे खोदकर पानी पीने को विवश हैं। बरसात के मौसम में नदी के बढ़ने के कारण गड्ढे में गंदा पानी भर जाता है। खास बात यह है कि विकास की चलती फिरती योजनाओं को आकार देने का काम जनप्रतिनिधियों द्वारा किया तो जा रहा है लेकिन ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं से ग्रामीण वंचित हैं। ऐसी कटु सच्चाई का स्थलीय सत्यापन जिले के आला अधिकारियों द्वारा किए जाने की जरूरत है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के बस्ती में आने से पेयजल की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। परेशानी उस समय बस्ती वासियों के सामने आती है जब नाले में बाढ़ आती है और गंदा पानी गड्ढे में भर जाता है। बरसात के मौसम में पेयजल की किल्लत हो जाती है। हाल यह होता है कि जब तक पानी साफ नहीं हो जाता पीने लायक नहीं होता। जिसके कारण ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन बना हुआ है। बस्ती निवासी दशरथ प्रजापति मुन्नू, श्यामलाल, जयलाल, अजय कुमार, सियाराम प्रजापति, मक्खन , दया, सुरेश, कल्लू, करन और रामनरेश प्रजापति ने बताया कि पेयजल का इंतजाम बेहद चुनौती बना हुआ है। नाली के गड्ढे से पानी लाकर हम लोग घर परिवार का पोषण कर रहे हैं लेकिन सरकारी तौर पर बस्ती में पेयजल की व्यवस्था नहीं दी गई है। हैंडपंप तक नहीं है। कहा कि गरीबों के पास हैंडपंप बोर कराने की सामर्थ नहीं है।
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विकासखंड लालगंज रामपुर कामता बस्ती के डेढ़ सौ के लगभग लोगों को पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण बस्तीवासी नाले में गड्ढे खोदकर पानी पीने को विवश हैं। बरसात के मौसम में नदी के बढ़ने के कारण गड्ढे में गंदा पानी भर जाता है। खास बात यह है कि विकास की चलती फिरती योजनाओं को आकार देने का काम जनप्रतिनिधियों द्वारा किया तो जा रहा है लेकिन ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं से ग्रामीण वंचित हैं। ऐसी कटु सच्चाई का स्थलीय सत्यापन जिले के आला अधिकारियों द्वारा किए जाने की जरूरत है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के बस्ती में आने से पेयजल की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। परेशानी उस समय बस्ती वासियों के सामने आती है जब नाले में बाढ़ आती है और गंदा पानी गड्ढे में भर जाता है। बरसात के मौसम में पेयजल की किल्लत हो जाती है। हाल यह होता है कि जब तक पानी साफ नहीं हो जाता पीने लायक नहीं होता। जिसके कारण ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन बना हुआ है। बस्ती निवासी दशरथ प्रजापति मुन्नू, श्यामलाल, जयलाल, अजय कुमार, सियाराम प्रजापति, मक्खन , दया, सुरेश, कल्लू, करन और रामनरेश प्रजापति ने बताया कि पेयजल का इंतजाम बेहद चुनौती बना हुआ है। नाली के गड्ढे से पानी लाकर हम लोग घर परिवार का पोषण कर रहे हैं लेकिन सरकारी तौर पर बस्ती में पेयजल की व्यवस्था नहीं दी गई है। हैंडपंप तक नहीं है। कहा कि गरीबों के पास हैंडपंप बोर कराने की सामर्थ नहीं है।
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