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त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने भक्त
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:40 AM IST
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शारदीय नवरात्र के चौथे दिन विंध्यधाम में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। मंदिर पहुंचे भक्तों ने बड़े ही श्रद्धाभाव से मां विंध्यवासिनी का दर्शन किया। गंगा घाटों पर जहां स्नान करने को तांता लगा रहा, वहीं त्रिकोण परिक्रमा करने के लिए अष्टभुजा पहाड़ पर भक्तों का जमघट रहा।
विंध्याचल मंदिर सहित विंध्य क्षेत्र के कालीखोह स्थित मां काली और अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान माता अष्टभुजी के पावन दरबार में भोर से लेकर देर रात तक दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
विंध्यधाम में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन देश के कोने-कोने से पहुंचे आस्थावानों ने दर्शन-पूजन कर सुख के लिए कामना किया। माता के पावन दरबार में भोर से मंगला आरती के बाद आरंभ हुआ भक्तों के आने का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा।
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गंगा में डुबकी लगाने के बाद माला-फूल नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए मंदिर पहुंचे आस्थावानों ने जगत जननी आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया।
तरह-तरह के फूलों से किया गया मां का भव्य श्रृंगार का दर्शन करन दर्शनार्थी भावविभोर हो उठे। मंदिर के छत पर शहनाई और नगाड़े के धुन पर नाई समाज के लोग बच्चों का मुंडन संस्कार कराने में मशगूल रहे, वहीं मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के मंदिरों में पहुंचे भक्तों ने विधिवत दर्शन-पूजन किया।
मंदिर परिसर में जगह-जगह साधक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान पूर्वक पूजन-अनुष्ठान करने में तल्लीन दिखाई दिए।
मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। माता का दर्शन-पूजन करने के बाद महिला व पुरुष भक्तों ने विंध्य की गलियों में सजी दुकानों से अपने-अपने जरूरत की वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी की।
व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए जवानों सहित स्काउट-गाइड लगे रहे।
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विंध्याचल मंदिर सहित विंध्य क्षेत्र के कालीखोह स्थित मां काली और अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान माता अष्टभुजी के पावन दरबार में भोर से लेकर देर रात तक दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
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विंध्यधाम में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन देश के कोने-कोने से पहुंचे आस्थावानों ने दर्शन-पूजन कर सुख के लिए कामना किया। माता के पावन दरबार में भोर से मंगला आरती के बाद आरंभ हुआ भक्तों के आने का सिलसिला देर रात तक अनवरत चलता रहा।
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गंगा में डुबकी लगाने के बाद माला-फूल नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए मंदिर पहुंचे आस्थावानों ने जगत जननी आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया।
तरह-तरह के फूलों से किया गया मां का भव्य श्रृंगार का दर्शन करन दर्शनार्थी भावविभोर हो उठे। मंदिर के छत पर शहनाई और नगाड़े के धुन पर नाई समाज के लोग बच्चों का मुंडन संस्कार कराने में मशगूल रहे, वहीं मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के मंदिरों में पहुंचे भक्तों ने विधिवत दर्शन-पूजन किया।
मंदिर परिसर में जगह-जगह साधक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान पूर्वक पूजन-अनुष्ठान करने में तल्लीन दिखाई दिए।
मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। माता का दर्शन-पूजन करने के बाद महिला व पुरुष भक्तों ने विंध्य की गलियों में सजी दुकानों से अपने-अपने जरूरत की वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी की।
व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए जवानों सहित स्काउट-गाइड लगे रहे।