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Mirzapur News: सिर्फ नाम का ट्रॉमा सेंटर, न्यूरो और कार्डियो के मरीजों की तुरंत बन जाती है रेफर पर्ची
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मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। हादसे में घायल होने पर या फिर सीने में तेज दर्द होने पर आपको इलाज कराना है तो जिले के निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ेगा। मंडलीय अस्पताल में पांच साल पहले बनाए गए ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो और कार्डियो के मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं है। हां, यह जरूर कि यहां जाने के बाद मरीजों की रेफर पर्ची तुरंत बना दी जाएगी। अब परिवार के लोगों को तय करना है कि वह बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर मरीज को जाएंगे या फिर प्रयागराज। कभी-कभी तो निर्णय लेने में देर होने से मरीज की जान भी चली जाती है।
जिले में सड़क हादसे सबसे अधिक होते हैं। इसमें हाथ-पैर की हड्डी टूटने का इलाज तो ट्रॉमा सेंटर मिर्जापुर में हो जाता है। अगर सिर में चोट लगी है तो इसका उपचार यहां नहीं होता है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी अस्पताल से रेफर होकर मरीज यहां अच्छे उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां आने के बाद पता चलता है कि न्यूरो और कार्डियो विभाग के डॉक्टर यहां नहीं हैं। इसके बाद यहां से रेफर पर्ची बनवाकर वह वाराणसी या फिर प्रयागराज के लिए रवाना हो जाते हैं।
गंभीर मरीज के आते ही तीमारदारों को रेफर के लिए समझाने में जुट जाते हैं स्टाफ
मंडलीय अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया जाता है। जूनियर स्टाफ गंभीर मरीजों के आते ही उनके तीमारदारों को समझाने में जुट जाते हैं कि यहां इस रोग के डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। बीएचयू और प्रयागराज के अस्पतालों में करोड़ों रुपये की मशीनें लगी हैं। वहां बेहतर उपचार होगा। अब बताइए कि कहां के लिए आपकी रेफर पर्ची तैयार कराई जाए।
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सीएचसी में सीटी स्कैन की मशीन नहीं होने से किया जाता है रेफर
हलिया स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी अवधेश कुमार ने बताया कि सिर में चोट होने पर प्राथमिक उपचार के बाद सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। मशीन नहीं होने के कारण रेफर करना हमारी मजबूरी है। विंध्याचल के प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि सीने में तेज दर्द या हादसे में घायल होने के पांच से छह मरीज प्रतिदिन आते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है। सीखड़, पड़री, जिगना, लालगंज, मड़िहान, राजगढ़, पटेहरा आदि केंद्रों का भी यही हाल है।
सीएचसी और पीएचसी में सिर में चोट लगने या सीने में तेज दर्द होने पर प्राथमिक उपचार की सुविधा रहती है। प्राथमिक उपचार कर उनको मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध मंडलीय अस्पताल रेफर किया जाता है। जिससे उसकी जान बचाई जा सके।
डा. सीएल वर्मा, सीएमओ
सिर में चोट लगने पर सीटी स्कैन की सुविधा है। दवा से इलाज किया जाता है। ऑपरेशन के केस में न्यूरो व कार्डियो सर्जन नहीं होने के कारण रेफर किया जाता है। ईसीजी की भी सुविधा है। मरीज की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। यदि यहां सुविधा मिले तो रेफर करने का सवाल ही नहीं उठेगा।
डा. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस
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जिले में सड़क हादसे सबसे अधिक होते हैं। इसमें हाथ-पैर की हड्डी टूटने का इलाज तो ट्रॉमा सेंटर मिर्जापुर में हो जाता है। अगर सिर में चोट लगी है तो इसका उपचार यहां नहीं होता है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी अस्पताल से रेफर होकर मरीज यहां अच्छे उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां आने के बाद पता चलता है कि न्यूरो और कार्डियो विभाग के डॉक्टर यहां नहीं हैं। इसके बाद यहां से रेफर पर्ची बनवाकर वह वाराणसी या फिर प्रयागराज के लिए रवाना हो जाते हैं।
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गंभीर मरीज के आते ही तीमारदारों को रेफर के लिए समझाने में जुट जाते हैं स्टाफ
मंडलीय अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया जाता है। जूनियर स्टाफ गंभीर मरीजों के आते ही उनके तीमारदारों को समझाने में जुट जाते हैं कि यहां इस रोग के डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। बीएचयू और प्रयागराज के अस्पतालों में करोड़ों रुपये की मशीनें लगी हैं। वहां बेहतर उपचार होगा। अब बताइए कि कहां के लिए आपकी रेफर पर्ची तैयार कराई जाए।
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सीएचसी में सीटी स्कैन की मशीन नहीं होने से किया जाता है रेफर
हलिया स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी अवधेश कुमार ने बताया कि सिर में चोट होने पर प्राथमिक उपचार के बाद सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। मशीन नहीं होने के कारण रेफर करना हमारी मजबूरी है। विंध्याचल के प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि सीने में तेज दर्द या हादसे में घायल होने के पांच से छह मरीज प्रतिदिन आते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है। सीखड़, पड़री, जिगना, लालगंज, मड़िहान, राजगढ़, पटेहरा आदि केंद्रों का भी यही हाल है।
सीएचसी और पीएचसी में सिर में चोट लगने या सीने में तेज दर्द होने पर प्राथमिक उपचार की सुविधा रहती है। प्राथमिक उपचार कर उनको मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध मंडलीय अस्पताल रेफर किया जाता है। जिससे उसकी जान बचाई जा सके।
डा. सीएल वर्मा, सीएमओ
सिर में चोट लगने पर सीटी स्कैन की सुविधा है। दवा से इलाज किया जाता है। ऑपरेशन के केस में न्यूरो व कार्डियो सर्जन नहीं होने के कारण रेफर किया जाता है। ईसीजी की भी सुविधा है। मरीज की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। यदि यहां सुविधा मिले तो रेफर करने का सवाल ही नहीं उठेगा।
डा. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस