मिर्जापुर। केबीपीजी कॉलेज के छात्रों ने महाविद्यालय में सप्ताह के सभी छह दिन कक्षाओं के ना संचालित होने के विरोध में जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। छात्रों ने कार्रवाई न होने पर एक सप्ताह बाद चक्का जाम करने का अल्टीमेटम दिया। छात्रों ने बताया कि वर्तमान में कोविड-19 के गाइडलाइन के अनुसार कक्षाओं में छात्रों की संख्या आधी करने के लिए लड़के और लड़कियों की कक्षाओं को सप्ताह में अलग-अलग तीन दिन चलाया जाता है। अगर बीच में कोई आकस्मिक अवकाश पड़ जाता है तो छात्रों को पढ़ने के लिए सप्ताह में केवल दो दिन मिलता हैं। छात्र संघ उपाध्यक्ष प्रतीक पाण्डेय ने कहा कि महाविद्यालय में कोरोना महामारी के पहले भी आधे ही लड़के प्रतिदिन पढ़ने आते थे। ऐसे में संख्या को और आधी करने की क्या जरूरत पड़ गई। अब हकीकत यह है कि कक्षाओं में केवल दो-चार छात्र ही पढ़ने के लिए आ रहे है। बहुत सारे छात्र छानबे, हलिया और राजगढ़ जैसे सुदूर इलाकों से शहर में कमरा ले कर के रह रहे हैं। ऐसे में अगर कक्षाएं केवल दो-तीन दिन ही चले तो यह बेईमानी है। इसलिए सभी छात्र अपनी मांग पूरी ना होने पर महाविद्यालय के पास की सड़क पर एक सप्ताह बाद चक्का जाम करेंगे। महाविद्यालय में लगाया गया यह नियम लैंगिक आधार पर भेदभाव भी है। जो संविधान में उल्लेखित अनुच्छेद 14 के तहत लैंगिक आधार पर समानता का उल्लंघन है। समस्या यह है कि कक्षाओं की संख्या तो कम होकर के एक तिहाई हो गई है लेकिन परीक्षा में सारे प्रश्न पूछे जाएंगे तो फिर हमारा भविष्य उज्जवल कैसे होगा। इस अवसर पर छात्र नेता मनीष सिंह , श्रेय मिश्रा, पुस्तकालय मंत्री सौम्या विश्वकर्मा, रूपा, पवन प्रजापति, विजय यादव, विनीत दुबे आदि रहे।