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न स्पेशलिस्ट डाक्टर है न टेक्नीशियन, सिर्फ नाम का सीसीयू
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मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में दो वर्ष पूर्व पूर्वांचल का पहला कार्डियक केयर यूनिट बताकर सीसीयू का शुभारंभ किया गया था कि अब मिर्जापुर के ह्रदय, हार्ट अटैक व अन्य गंभीर मरीजों को प्रयागराज और वाराणसी नहीं जाना पड़ेगा। अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई थी, पर अब तक यहां पर न तो स्पेशलिस्ट डाक्टर न ही उपकरणों को चालाने के लिए टेक्निशीयन की तैनाती हो सकी। यही नहीं अन्य स्टाफ की भी कमी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ह्रदय रोगियों के बेहतर उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल में दो वर्ष पूर्व 19 जनवरी 2019 को सीसीयू की स्थापना हुई। डेढ़ करोड़ की लागत से 10 बेड के सीसीयू मेें अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई। इसके अलावा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष आपरेशन कास्ट के रुप में दिए जाने का भी प्रावधान था। सीसीयू में अत्याधुनिक मशीने तो लगा दी गई, पर सबसे जरुरी मरीजों का उपचार करने के लिए हृदय रोग स्पेशलिस्ट और उपकरणों को चलाने के लिए टेक्निशीयन की तैनाती नहीं हो सकी है। ईको और अन्य उपकरणों का संचालन तो छोड़ दिजिए, ईसीजी चलाने के लिए भी टेक्निशीयन नहीं है। कोविड के समय इसका उपयोग कोविड के गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए भी किया गया, फिलहाल यहां पर ह्रदय रोगियों के साथ स्ट्रोक आदि के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, पर उनका सफल उपचार नहीं हो पा रहा है। अधिकांश मरीज को रेफर कर दिया जा रहा है। अगर स्पेशलिस्ट डाक्टर और टेक्निशीयन रहे तो मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ह्रदय रोगियों के बेहतर उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल में दो वर्ष पूर्व 19 जनवरी 2019 को सीसीयू की स्थापना हुई। डेढ़ करोड़ की लागत से 10 बेड के सीसीयू मेें अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई। इसके अलावा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष आपरेशन कास्ट के रुप में दिए जाने का भी प्रावधान था। सीसीयू में अत्याधुनिक मशीने तो लगा दी गई, पर सबसे जरुरी मरीजों का उपचार करने के लिए हृदय रोग स्पेशलिस्ट और उपकरणों को चलाने के लिए टेक्निशीयन की तैनाती नहीं हो सकी है। ईको और अन्य उपकरणों का संचालन तो छोड़ दिजिए, ईसीजी चलाने के लिए भी टेक्निशीयन नहीं है। कोविड के समय इसका उपयोग कोविड के गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए भी किया गया, फिलहाल यहां पर ह्रदय रोगियों के साथ स्ट्रोक आदि के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, पर उनका सफल उपचार नहीं हो पा रहा है। अधिकांश मरीज को रेफर कर दिया जा रहा है। अगर स्पेशलिस्ट डाक्टर और टेक्निशीयन रहे तो मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
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