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प्यूमिस प्रजाति का है गंगा में बहता मिला पत्थर

Mon, 17 Oct 2022 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 01:15 AM IST
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The stone found flowing in the Ganges is of pumice species
गंगा नदी में बहते हुए मिला पत्थर रामसेतु का नहीं, बल्कि छह करोड़ वर्ष पुराना है। इसका खुलासा रविवार को सीखड़ पहुंचे बीएचयू के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने जांच पड़ताल के बाद किया।
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सीखड़ स्थित बावन जी मंदिर में पूजा के लिए रखे पत्थर की जांच करने रविवार को बीएचयू के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. बीपी सिंह और प्रो. प्रदीप कुमार सिंह पहुंचे। उन्होंने बताया कि पत्थर को देखने पर पता चला कि वह प्यूमिस प्रजाति का पत्थर है। इसका वजन करीब ढाई किलोग्राम है। प्यूमिस प्रजाति पत्थर की ऐसी वैराइटी है, जिसमें जगह-जगह छेद होता है। इससे उसमें हवा भर जाने के कारण यह हल्का हो जाता है। ऐसे पत्थर भी कभी-कभी तैरते हैं। इस तरह के पत्थर सबसे अधिक मध्य भारत यानी दक्कन के पठार क्षेत्र में ही अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसी संभावना हो सकती है कि चंबल नदी से होते हुए यह पत्थर पहले यमुना फिर गंगा नदी के रास्ते मिर्जापुर में आ गया हो। अनुमान है कि यह पत्थर लगभग छह करोड़ वर्ष पुराना है। यह पत्थर ज्वालामुखी फटने के बाद लावा से बना प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि रामसेतु में जो पत्थर लगाए गए थे और इस पत्थर में अंतर है।
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ज्ञात हो, सीखड़ के हीलालपुर गांव निवासी बचाऊ शर्मा शनिवार को सुबह गंगा में स्नान करने गए थे। उसी दौरान उन्हें नदी में बहता हुआ पत्थर दिखाई दिया। जिसको गांव के लोगों ने नदी से निकाल कर बार-बार पानी में डुबोने का प्रयास किया, लेकिन पत्थर पानी में उतराता रहा। जिससे कुछ लोगों ने इसे त्रेता युग में बने रामसेतु का पत्थर मान कर पूजा-पाठ शुरू कर दी।
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