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संसाधनों और प्रतिभा की दृष्टि से दक्षिणी परिसर में अपार संभावनाएं : कुलपति
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दक्षिणी परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चत
मिर्जापुर। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बुधवार को बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर दौरा किया। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों से संवाद किया।
दक्षिणी परिसर के विकास के प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बीएचयू और इसके सदस्यों की प्रगति के लिए धन बाधा नहीं बनेगा। संसाधनों और प्रतिभा की दृष्टि से दक्षिणी परिसर में अपार संभावनाएं है। हमारे शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति के इंजन बन सकते हैं। यदि हम वास्तव में विश्वविद्यालय को तेजी से आगे बढ़ते देखना चाहते हैं तो हमें इसका लाभ उठाना होगा।
सलाह दी कि समस्याओं के समाधान में देरी से प्रणाली पर विश्वास नहीं डगमगाना चाहिए बल्कि इससे और अधिक उत्साह और नए दृष्टिकोण के साथ समाधान की दिशा में प्रयास करने की भावना मजबूत होनी चाहिए। हम सभी एक ऐसी व्यवस्था के हिस्सा हैं जो दशकों से फल-फूल रही है।
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इसमें कमियां हो सकती हैं, लेकिन हमें टीम भावना से काम करते हुए इन खामियों को दूर कर प्रभावी समाधान निकालने होंगे।
जब तक हम बाधाओं के मूल कारण को नहीं समझेंगे, तब तक समस्या का समाधान नहीं कर सकते हैं। अतीत में क्या हुआ, इस पर अटकने की बजाय सकारात्मक और भविष्य की ओर देखने वाले दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े प्रस्ताव आगे लाएं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित समस्याओं को उच्चस्तर तक पहुंचाने में संकोच न करें। दक्षिणी परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. वीके मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया को प्रो. चतुर्वेदी ने कार्यभार ग्रहण करने के एक महीने के भीतर ही आरंभ कर दिया। छात्रावास की क्षमता में 600 सीटों की वृद्धि की गई है। अब दक्षिणी परिसर अपने सभी विद्यार्थियों को छात्रावास सुविधा प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय ने अनुबंधित शिक्षकों के पारिश्रमिक में भी वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि इनडोर स्टेडियम और सौर ऊर्जा पर आधारित सोलर पार्क जैसे बुनियादी ढांचे की जरूरतें हैं, जो विद्यार्थियों और शिक्षकों के परिसर जीवन को और समृद्ध करेगी। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केंद्र के तहत नए कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने के सुझाव भी दिए।
पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. अमित राज गुप्ता बताया कि संकाय की योजना अपनी दो इकाइयों को पूर्ण विभागों में अपग्रेड करने की है। कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीराम सिंह ने कृषि विकास और किसानों के सशक्तिकरण में केवीके की भूमिका को रेखांकित किया। धन्यवाद प्रो. अंचित्य सिंघल, संचालन डॉ. अर्चना महापात्रा ने किया।
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दक्षिणी परिसर के विकास के प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बीएचयू और इसके सदस्यों की प्रगति के लिए धन बाधा नहीं बनेगा। संसाधनों और प्रतिभा की दृष्टि से दक्षिणी परिसर में अपार संभावनाएं है। हमारे शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति के इंजन बन सकते हैं। यदि हम वास्तव में विश्वविद्यालय को तेजी से आगे बढ़ते देखना चाहते हैं तो हमें इसका लाभ उठाना होगा।
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सलाह दी कि समस्याओं के समाधान में देरी से प्रणाली पर विश्वास नहीं डगमगाना चाहिए बल्कि इससे और अधिक उत्साह और नए दृष्टिकोण के साथ समाधान की दिशा में प्रयास करने की भावना मजबूत होनी चाहिए। हम सभी एक ऐसी व्यवस्था के हिस्सा हैं जो दशकों से फल-फूल रही है।
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इसमें कमियां हो सकती हैं, लेकिन हमें टीम भावना से काम करते हुए इन खामियों को दूर कर प्रभावी समाधान निकालने होंगे।
जब तक हम बाधाओं के मूल कारण को नहीं समझेंगे, तब तक समस्या का समाधान नहीं कर सकते हैं। अतीत में क्या हुआ, इस पर अटकने की बजाय सकारात्मक और भविष्य की ओर देखने वाले दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े प्रस्ताव आगे लाएं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित समस्याओं को उच्चस्तर तक पहुंचाने में संकोच न करें। दक्षिणी परिसर के आचार्य प्रभारी प्रो. वीके मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया को प्रो. चतुर्वेदी ने कार्यभार ग्रहण करने के एक महीने के भीतर ही आरंभ कर दिया। छात्रावास की क्षमता में 600 सीटों की वृद्धि की गई है। अब दक्षिणी परिसर अपने सभी विद्यार्थियों को छात्रावास सुविधा प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय ने अनुबंधित शिक्षकों के पारिश्रमिक में भी वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि इनडोर स्टेडियम और सौर ऊर्जा पर आधारित सोलर पार्क जैसे बुनियादी ढांचे की जरूरतें हैं, जो विद्यार्थियों और शिक्षकों के परिसर जीवन को और समृद्ध करेगी। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केंद्र के तहत नए कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने के सुझाव भी दिए।
पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. अमित राज गुप्ता बताया कि संकाय की योजना अपनी दो इकाइयों को पूर्ण विभागों में अपग्रेड करने की है। कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीराम सिंह ने कृषि विकास और किसानों के सशक्तिकरण में केवीके की भूमिका को रेखांकित किया। धन्यवाद प्रो. अंचित्य सिंघल, संचालन डॉ. अर्चना महापात्रा ने किया।