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Mirzapur : राज्यपाल ने साइकिल के साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओ को किया 7.84 करोड़ के चेक का वितरण

Thu, 19 Dec 2024 08:07 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Thu, 19 Dec 2024 08:07 PM IST
सार

यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल मिर्जापुर दौरे पर थी इस दौरान इन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को चेक का वितरण किया इसके साथ ही साइकिल भी दिया। इनके स्वागत में ग्रीन आर्मी ने घरेलू हिंसा नशा मुक्ति नाट्य का मंचन किया।
 

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The Governor distributed cheques worth Rs 7.84 crore along with bicycles to women of self-help groups
कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल यूपी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाली ग्रीन आर्मी की महिलाओं से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संवाद किया। साथ ही साईकिल वितरण तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति-पत्र/प्रशस्ति पत्र एवं विन्ध्य स्वच्छता प्रतिष्ठान की चाभी वितरण किया। ग्रीन आर्मी ने घरेलू हिंसा नशा मुक्ति नाट्य का मंचन किया। ग्रीन आर्मी ने नशा मुक्ति का नाट्य मंचन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने स्पांशरशिप योजना के तहत शहीद चंद्र प्रकाश पटेल की पत्नी स्नेहा पटेल व पुत्र आयांश को लाभार्थी प्रमाण पत्र वितरण किया।

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स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाओं सविता देवी, रेखा देवी, ममता मौर्या को 7.84 करोड़ का चेक प्रदान किया। साथ ही बैंक सखी को प्रशस्ति पत्र के अलावा विद्युत सखी को थर्मल प्रिंटर और ओडीओपी वित्त पोषण योजना के लाभार्थी रामकुमार, दुर्गावती को नौ लाख रुपये का चेक, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लाभार्थी संदीप कुमार अग्रहरी को 10 लाख तथा पवन को 5 लाख का चेक वितरित किया। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत, कंचन को मशीन, कृष्णावति को सिलाई मशीन देने के अलावा प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के एक-एक लाभार्थी को चाभी वितरित किया गया।
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उद्यान विभाग के एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के दो लाभार्थियों को चाभी (पावर ट्रिलर) दिया गया। कृषि विभाग यंत्रीकरण के दो लाभार्थी को प्रमाण पत्र, विन्ध्य प्रतिष्ठान के केयर टेकर को चाभी व दो सफाई कर्मी को जैकेट भी पहना दिया गया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के एक लाभार्थी को 18 लाख का चेक, ग्रीन आर्मी की महिलाओं को साइकिल, साड़ी, कम्बल, टीबी किट वितरण किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ग्रीन आर्मी के संस्थापक रवि मिश्रा को चेक दिया। इसके अलावा घरेलू हिंसा से आम महिलाओं को बचाने के साथ बालिका शिक्षा के क्षेत्र में शासन स्तर पर किए जा रहे प्रयास तथा कार्यक्रम की जानकारी दी।
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कहाकि महिला सुरक्षा के क्षेत्र में ग्रीन आर्मी के कार्यशैली की अहम भूमिका है। पूरे देश में ग्रीन आर्मी की विचारधारा का गठन होना चाहिए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, मंडलायुक्त डा. मुथुकुमार स्वामी बी., डीआईजी आर पी सिंह, जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, एसपी अभिनंदन, सीडीओ विशाल कुमार, एसडीएम चुनार राजेश वर्मा, न्यायिक एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित कई थानों की पुलिस फोर्स व पीएसी बल मौजूद रही।

ग्रीन आर्मी की टीम है महिलाओं का सशक्त संगठन
ग्रीन आर्मी महिलाओं का एक संगठन है, जो महिलाओं से दुर्व्यवहार करने वाले पुरुषों से सुरक्षा प्रदान करा रही है। 2014 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों ने मिलकर बनारस के कुशियार गांव में 25 महिलाओं की टीम बनाकर ग्रीन आर्मी की शुरूआत की इसमें ज्यादातर दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ी जाति की महिलाएं शामिल है। जिसका उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्गों की महिलाओं को घरों से बाहर लाने और उत्पीड़न, यौन व घरेलू हिंसा के खिलाफ खड़े होने के लिए सशक्त बनाना है। ये महिलाएं हाथों में लाठिया, हरी साड़ी पहने और घूंघट में घूमती है।

ये महिलाएं न केवल घरेलू हिंसा को रोकती है बल्कि दहेज प्रथा, अंधविश्वासी कुरीति-रिवाजों और शराब व जुआ के खिलाफ भी संघर्ष करती है। इसी के साथ बालिकाओं को शिक्षित करने की दिशा में भी काम करती है। उनका काम न सिर्फ पुरुषों का व्यक्तित्व निखारना है बल्कि उनके गांवों की स्थिति भी सुधारना है। ग्रीन आर्मी की महिलाओं को पुलिस ‘पुलिस मित्र (मित्र) परिचय पत्र दिया गया हैं। ग्रीन आर्मी जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेती और अपराधों की रोकथाम में मदद करती हैं। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रीन आर्मी ने महिलाओं को मतदान के लिए जागरूक किया था, जिसका बहुत असर पड़ा। निर्वाचन आयोग ने भी महिलाओं की सराहना करते हुए सम्मान किया।




महिला उत्पीड़न हिंसा जुआ तथा शराबबंदी कराती हैं
महिला उत्पीड़न हिंसा युवा तथा शराब की रोकथाम के लिए निजी संस्था द्वारा महिलाओं की काउंसलिंग कराई जाती है। उसके बाद व्यक्तित्व विकास और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाता है। ढ़ाई महीने बाद ये महिलाएं हरी साड़ी पहनकर पूरे गांव का भ्रमण करती है और शराब जुआ के अड्डों पर पहुंचकर खड़ी होकर बंद कराती हैं। ग्रीन आर्मी की इस टीम का कोई सामना करना आसान नहीं होता। अहिंसात्मक तरिके से अपराध पर नियंत्रण इनका उद्देश्य है। पुरुषों को परामर्श देने और न मानने पर लाठियों का हथियार बनाकर सामने खड़ी होती हैं। गांव में शराब और जुआ बंद करवाना तथा गांवों में घरेलू हिंसा की रोकथाम में ग्रीन आर्मी को महारत है।

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