- भागवत कथा में पूतना वध और श्रीकृष्ण के नामकरण की हुई कथा
लालगंज। तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन शनिवार को कथा व्यास पवन कुमार महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने पूतना वध, शकट भंजन, तृणावर्त उद्धार और नामकरण संस्कार के प्रसंग सुनाए। कहा कि कंस के आदेश पर पूतना बालकों का वध करने के लिए गोकुल पहुंची। उसने सुंदर युवती का रूप धारण कर नंद बाबा के घर में प्रवेश किया और बालक श्रीकृष्ण को गोद में उठा लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने दूध के साथ उसके प्राण भी खींच लिए। कथा व्यास ने शकट भंजन की लीला बताते हुए कहा कि उत्सव के दौरान छकड़े के नीचे सो रहे श्रीकृष्ण ने पैर चलाया तो छकड़ा उलट गया। इसके बाद तृणावर्त बवंडर का रूप धारण कर श्रीकृष्ण को आकाश में उठा ले गया लेकिन भगवान के बढ़ते भार से वह उन्हें संभाल नहीं सका। श्रीकृष्ण ने गला पकड़ लिया और उसका उद्धार हो गया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अनेक नाम और रूप हैं। मुख्य यजमान अंतर्राष्ट्रीय बाल योगी संत संजय महाराज और अमरनाथ, जानकी देवी, अशोक तिवारी व नवीन तिवारी आरती की। इस दौरान कथा श्रवण करने वाले पूर्व भाजपा के जिलाध्यक्ष बालेंदुमणि त्रिपाठी, अधिवक्ता चंद्र दत्त त्रिपाठी, फूलचंद, नागेंद्र शुक्ला, राजेंद्र सिंह यादव आदि थे।