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पांच माह की गर्भवती हुई ट्रेन में मिली किशोरी, दर्ज होगा मुकदमा
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मिर्जापुर। तीन माह पूर्व ट्रेन में युवक के साथ पकड़ी गई किशोरी को बालिका गृह में रखा गया है। अब जांच में पता चला है कि वह गर्भवती है। मामले की जांच कर रहे मजिस्ट्रेट ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। जबकि जीआरपी ने युवक को उस समय बिना किसी पूछताछ और जानकारी लिए बिना ही छोड़ दिया था। सूत्रों की मानें तो जीआरपी ने चाइल्ड लाइन के जरिए किशोरी को बालिका गृह में भेजवाकर युवक के खिलाफ बिना कोई कार्रवाई नहीं की।
सात दिसंबर को मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर टीईटी ने एक युवक और किशोरी को पकड़ कर चाइल्ड लाइन और जीआरपी को सौंपा था। किशोरी आसाम की रहने वाली थी और युवक मिर्जापुर का रहने वाला था। युवक किशोरी के साथ रहने के बाद उसे अपने घर शादी करने के लिए लेकर आ रहा था। चाइल्ड लाइन और जीआरपी ने युवक के घर वालों को बुलाया। युवक के घर वालों के आने पर जीआरपी ने बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया। उस समय जीआरपी ने ये तर्क दिया कि किशोरी ने युवक के साथ होने से इंकार किया और उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। किशोरी को ज्ञानोदय बालिका गृृह में भेज दिया गया। बालिका गृह में रह रही किशोरी का मेडिकल जांच हुआ तो पता चला कि वह गर्भवती है। इसके बाद पूछताछ पर किशोरी ने आप बीती बताई। मामले की जानकारी होने पर डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र बहादुर ने किशोरी का बयान लेकर मामले की जांच शुरू की। मामले में डिप्टी कलेक्टर ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
दिसंबर माह में पकड़े जाने पर किशोरी को ज्ञानोदय बालिका गृह में रखा गया था। उस समय मेडिकल में पता चला था कि किशोरी गभर्वती है। महिला अस्पताल के डाक्टर के जांच कर अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। मिर्जापुर महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने पर दो दिन पूर्व किशोरी को सोनभद्र भेजकर अल्ट्रासाउंड कराया गया। किशोरी पकड़े जाने के दो माह पूर्व की गर्भवती है।
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आसाम निवासी किशोरी पिता के बाद माता के निधन से अनाथ हो गई थी। काम की तलाश में चार लड़कियों के साथ वह दिल्ली गई थी। दिल्ली में लड़के के संपर्क में आई। युवक गोवा में नौकरी करता था। वह किशोरी को गोवा ले गया। वहां से शादी करने के लिए अपने घर लेकर आ रहा था कि ट्रेन में दोनों पकड़े गए। इसमें जीआरपी ने बिना किसी कार्रवाई के युवक को छोड़ दिया।
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सात दिसंबर को मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर टीईटी ने एक युवक और किशोरी को पकड़ कर चाइल्ड लाइन और जीआरपी को सौंपा था। किशोरी आसाम की रहने वाली थी और युवक मिर्जापुर का रहने वाला था। युवक किशोरी के साथ रहने के बाद उसे अपने घर शादी करने के लिए लेकर आ रहा था। चाइल्ड लाइन और जीआरपी ने युवक के घर वालों को बुलाया। युवक के घर वालों के आने पर जीआरपी ने बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया। उस समय जीआरपी ने ये तर्क दिया कि किशोरी ने युवक के साथ होने से इंकार किया और उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। किशोरी को ज्ञानोदय बालिका गृृह में भेज दिया गया। बालिका गृह में रह रही किशोरी का मेडिकल जांच हुआ तो पता चला कि वह गर्भवती है। इसके बाद पूछताछ पर किशोरी ने आप बीती बताई। मामले की जानकारी होने पर डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र बहादुर ने किशोरी का बयान लेकर मामले की जांच शुरू की। मामले में डिप्टी कलेक्टर ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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दिसंबर माह में पकड़े जाने पर किशोरी को ज्ञानोदय बालिका गृह में रखा गया था। उस समय मेडिकल में पता चला था कि किशोरी गभर्वती है। महिला अस्पताल के डाक्टर के जांच कर अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। मिर्जापुर महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने पर दो दिन पूर्व किशोरी को सोनभद्र भेजकर अल्ट्रासाउंड कराया गया। किशोरी पकड़े जाने के दो माह पूर्व की गर्भवती है।
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आसाम निवासी किशोरी पिता के बाद माता के निधन से अनाथ हो गई थी। काम की तलाश में चार लड़कियों के साथ वह दिल्ली गई थी। दिल्ली में लड़के के संपर्क में आई। युवक गोवा में नौकरी करता था। वह किशोरी को गोवा ले गया। वहां से शादी करने के लिए अपने घर लेकर आ रहा था कि ट्रेन में दोनों पकड़े गए। इसमें जीआरपी ने बिना किसी कार्रवाई के युवक को छोड़ दिया।