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बहन ने दिलाई शादी की याद, तो पुनवासी ने उसे पहचाना
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मिर्जापुर। 11 वर्ष से पाकिस्तान की जेल में बंद पुनवासी की वतन वापसी के बाद घर वापसी के लिए उसे लेने अमृतसर पहुंची उसकी बहन तो शनिवार को भाई को देख फफक कर रो पड़ी, पर पाकिस्तान में दी गई यातनाओं के चलते याद्दाश्त खो चुका पुनवासी उसी हालत में रहा। तब बहन ने उसे गले लगाया और फिर बैठा कर उसे बचपन की बातें और उसकी शादी कराने की बाद याद दिलायी। शादी की बात बताने पर पुनवासी ने अपनी बहन को पहचाना और उसे गले लगाया। शादी के बाद गौना होने के पूर्व ही पुनवासी लापता हो गया था।
देहात कोतवाली के भरुहना निवासी पुनवासी 11 वर्ष पूर्व 2009 में भटककर पाकिस्तान चला गया था। दो वर्ष पूर्व पाकिस्तान की सरकार ने मानसिक रूप से कमजोर हो चुके पुनवासी द्वारा बताए गए अधूरे नाम पते की जानकारी भारत सरकार को भेजा। इसकी सूचना मिर्जापुर में आई। जिसके बाद जिले के एलआईयू निरीक्षक इंद्रभूषण यादव ने दो वर्ष के अथक प्रयास के बाद किसी तरह से पुनवासी का पता खोजा। 17 नवंबर को पुनवासी को अटारी बार्डर पर बीएसएफ को सौंपा गया। वतन वापसी के बाद उसके घर वापसी में परेशानी हुई। घर वापसी के लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया। इसका असर रहा कि निर्वतमान जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल और एसपी अजय कुमार सिंह के प्रयास से एक सिपाही के साथ उसकी बहन किरण और जीजा मुन्नू को एक जनवरी को वाराणसी से बेगमपुरा एक्सप्रेस से भेजा गया। शनिवार को बहन किरण भाई से मिली। उस समय पुनवासी सो रहा था। उसे उठाया गया। भाई को देख बहन के आंखों से आंसू छलक पड़े, पर पुनवासी उसकी तरह खड़ा रहा। इसके बाद किरण ने अपने भाई को गले लगा। चारपाई पर बैठा कर उसके बचपन की बात बताई। इसके बाद बताया कि कैसे उसकी शादी कराई थी। शादी के बाद उसका गौना आने वाला था, तभी वह लापता हो गया। बहन की यह बातें सुनकर पुनवासी वह उसे पहचानने लगा। इस पर फिर से बहन के खुशियों के आंसू छलक पड़े।
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भाई को खिलाया भूजा और गुड़
मिर्जापुर। पुनवासी को भूजा और गुड़ बहुत पसंद था। उसे लेने के लिए गई बहन उसके लिए भूजा और गुड़ लेकर गई थी। शनिवार को उसने अपने भाई को भूजा और गुड़ खिलाकर उसके बचपन की बात बताती रही। पुनवासी ने भी बहन के हाथ का भूजा और गुड़ चाव से खाया।
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वतन में भी बेगाने जैसा व्यवहार,नहीं मिले ठंडे कपड़े
मिर्जापुर। पाकिस्तान की जेल में यातनाएं झेल कर वतन लौटे पुनवासी के साथ अपने देश में ही बेगानों और बंदियों जैसा ही व्यवहार हो रहा है। इतनी सुविधा तो यहां के जेलों में बंद बंदियों को मिलता है, पर अमृतसर के हेल्थ केयर सेंटर में भीषण़ ठंड के बाद भी उसे जैकेट आदि नहीं दिया गया है। भाई को लेने पहुंची बहन किरण ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर और जेल में आखिर फर्क क्या है।
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हेल्थ केयर सेंटर तक पहुंचने के लिए होना पड़ा परेशान
मिर्जापुर। 1300 किमी का सफर तय कर अमृतसर अपने भाई पुनवासी को लेने पहुंची बहन किरण को परेशानी उठानी पड़ी। अमृतसर पहुंचने के बाद बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज कुमार को घंटों परेशान होना पड़ा। हेल्थ केयर सेेंटर का पता पूछते रहे, पर मदद नहीं मिली। इसके बाद कुछ पुलिसवाले मिले जिन्होंने उन्हें आटो से छेहटां हेल्थ केयर सेंटर भिजवाया, पर वे रास्ता भटक गए। अधिकारियों को फोन करने पर वे सिर्फ पता बताते रहे। अंत में किसी तरह हेल्थ केयर सेंटर पहुंचे।
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लेने गई बहन को रुकने के लिए भी नहीं थी व्यवस्था
मिर्जापुर। भाई को लेेने गई बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज के रूकने के लिए वहां के प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को पहुंचे बहन को यह चिंता सताने लगी कि आखिर दो दिन कहां रहेगी। उसका टिकट चार जनवरी को है। पुनवासी के परिवार को रेड क्रास के सराय में रूकवाया गया। वहां तक ले जाने के लिए साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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आज बेगमपुरा एक्सप्रेस से चलेगा पुनवासी
मिर्जापुर। पुनवासी सोमवार को अपनी बहन किरण और जीजा के साथ बेगमपुरा एक्सप्रेस से घर के लिए चलेगा। जालंधर से सोमवार की दोपहर ट्रेन पर बैठेंगे। ट्रेन मंगलवार को वाराणसी पहुंचेगी। उसके बाद वह बस से घर के लिए चलेंगे।
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देहात कोतवाली के भरुहना निवासी पुनवासी 11 वर्ष पूर्व 2009 में भटककर पाकिस्तान चला गया था। दो वर्ष पूर्व पाकिस्तान की सरकार ने मानसिक रूप से कमजोर हो चुके पुनवासी द्वारा बताए गए अधूरे नाम पते की जानकारी भारत सरकार को भेजा। इसकी सूचना मिर्जापुर में आई। जिसके बाद जिले के एलआईयू निरीक्षक इंद्रभूषण यादव ने दो वर्ष के अथक प्रयास के बाद किसी तरह से पुनवासी का पता खोजा। 17 नवंबर को पुनवासी को अटारी बार्डर पर बीएसएफ को सौंपा गया। वतन वापसी के बाद उसके घर वापसी में परेशानी हुई। घर वापसी के लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया। इसका असर रहा कि निर्वतमान जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल और एसपी अजय कुमार सिंह के प्रयास से एक सिपाही के साथ उसकी बहन किरण और जीजा मुन्नू को एक जनवरी को वाराणसी से बेगमपुरा एक्सप्रेस से भेजा गया। शनिवार को बहन किरण भाई से मिली। उस समय पुनवासी सो रहा था। उसे उठाया गया। भाई को देख बहन के आंखों से आंसू छलक पड़े, पर पुनवासी उसकी तरह खड़ा रहा। इसके बाद किरण ने अपने भाई को गले लगा। चारपाई पर बैठा कर उसके बचपन की बात बताई। इसके बाद बताया कि कैसे उसकी शादी कराई थी। शादी के बाद उसका गौना आने वाला था, तभी वह लापता हो गया। बहन की यह बातें सुनकर पुनवासी वह उसे पहचानने लगा। इस पर फिर से बहन के खुशियों के आंसू छलक पड़े।
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भाई को खिलाया भूजा और गुड़
मिर्जापुर। पुनवासी को भूजा और गुड़ बहुत पसंद था। उसे लेने के लिए गई बहन उसके लिए भूजा और गुड़ लेकर गई थी। शनिवार को उसने अपने भाई को भूजा और गुड़ खिलाकर उसके बचपन की बात बताती रही। पुनवासी ने भी बहन के हाथ का भूजा और गुड़ चाव से खाया।
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वतन में भी बेगाने जैसा व्यवहार,नहीं मिले ठंडे कपड़े
मिर्जापुर। पाकिस्तान की जेल में यातनाएं झेल कर वतन लौटे पुनवासी के साथ अपने देश में ही बेगानों और बंदियों जैसा ही व्यवहार हो रहा है। इतनी सुविधा तो यहां के जेलों में बंद बंदियों को मिलता है, पर अमृतसर के हेल्थ केयर सेंटर में भीषण़ ठंड के बाद भी उसे जैकेट आदि नहीं दिया गया है। भाई को लेने पहुंची बहन किरण ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर और जेल में आखिर फर्क क्या है।
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हेल्थ केयर सेंटर तक पहुंचने के लिए होना पड़ा परेशान
मिर्जापुर। 1300 किमी का सफर तय कर अमृतसर अपने भाई पुनवासी को लेने पहुंची बहन किरण को परेशानी उठानी पड़ी। अमृतसर पहुंचने के बाद बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज कुमार को घंटों परेशान होना पड़ा। हेल्थ केयर सेेंटर का पता पूछते रहे, पर मदद नहीं मिली। इसके बाद कुछ पुलिसवाले मिले जिन्होंने उन्हें आटो से छेहटां हेल्थ केयर सेंटर भिजवाया, पर वे रास्ता भटक गए। अधिकारियों को फोन करने पर वे सिर्फ पता बताते रहे। अंत में किसी तरह हेल्थ केयर सेंटर पहुंचे।
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लेने गई बहन को रुकने के लिए भी नहीं थी व्यवस्था
मिर्जापुर। भाई को लेेने गई बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज के रूकने के लिए वहां के प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को पहुंचे बहन को यह चिंता सताने लगी कि आखिर दो दिन कहां रहेगी। उसका टिकट चार जनवरी को है। पुनवासी के परिवार को रेड क्रास के सराय में रूकवाया गया। वहां तक ले जाने के लिए साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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आज बेगमपुरा एक्सप्रेस से चलेगा पुनवासी
मिर्जापुर। पुनवासी सोमवार को अपनी बहन किरण और जीजा के साथ बेगमपुरा एक्सप्रेस से घर के लिए चलेगा। जालंधर से सोमवार की दोपहर ट्रेन पर बैठेंगे। ट्रेन मंगलवार को वाराणसी पहुंचेगी। उसके बाद वह बस से घर के लिए चलेंगे।