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रोडवेज बस के पहिए ठप
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Fri, 01 May 2015 01:21 AM IST
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सड़क दुर्घटना के कानून में बदलाव करने पर रोडवेज बस के चालकाें ने गुरुवार को बस का पहिया ठप कर हड़ताल शुरु कर दी। कहा कि नये कानून से चालकाें परिचालकाें को काफी परेशानी होगी साथ ही उनके परिवार के लोग भूखाें मरने के कागार पर पहुंच जाएंगे।
इसलिए इस कानून को तत्काल वापस लेकर पुराने कानून को लागू किया जाए। बस का संचालन ठप होने से सोनभद्र, इलाहाबाद, जौनपुर, बनारस समेत अन्य स्थानाें के यात्रियाें को वाहन के लिए परेशान होना पड़ा।
दोपहर बाद पहुंचे एआरएम ने पुलिस की सहायता से धरना दे रहे चालकों को उठवाया।
मिर्जापुर रोडवेज में कार्यरत करीब 250 चालक परिचालक गुरुवार की सुबह छह बजे ही रोडवेज बसाें के पहिए को रोक कर हड़ताल पर चले गए। हड़ताल से 73 बसाें का संचालन प्रभावित रहा जबकि सात बसें चलती रही।
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संचालन प्रभावित होने से जौनपुर, बनारस, इलाहाबाद, सोनभद्र, समेत अन्य स्थानाें पर जाने के लिए बस पकड़ने रोडवेज परिसर पहुंचे यात्रियाें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। छोटे छोटे बच्चाें को धूप में लेकर वाहन की तलाश में इधर उधर भटकने को महिलाएं विवश रहीं।
यात्री पैदल ही जौनपुर एवं बनारस जाने के लिए शास्त्री सेतु और रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। चालकाें ने कहा कि केंद्र सरकार ने यातायात समेत सड़क दुर्घटनाओं के कानून में संशोधन करने का प्रावधान बनाया है।
इससे अब दुर्घटना होने पर चालकाें को छह माह की जगह तीन वर्ष से दस वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा नियमों को तोड़ने पर हजाराें रुपये का जुर्माना अदा करना पड़ सकता है।
सरकार द्वारा किए गए कानून के संशोधन से उनकी रोजी रोजी पर असर पड़ेगा साथ ही उनके परिवार के बच्चे भूखाें मरने लगेंगे।
कहा कि अनजाने में आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन केंद्र सरकार के इस नियम से लोग गाड़ी चालाना बंद कर देंगे इससे रोजगार में कमी आएगी।
दोपहर तक अधिकांश बसाें का परिचालन ठप होने की जानकारी होने पर एआरएम आरके उपाध्याय ने चालकाें से हड़ताल समाप्त कर बस ले जाने के लिए कई बार कहा लेकिन चालक नहीं माने।
दोपहर करीब दो बजे वह पुलिस के साथ पहुंचे। चालकाें से कहा कि उनकी हड़ताल अवैध है। इसे लेकर एआरएम एवं चालकाें के बीच नोकझाेंक हुई। कटरा कोतवाल ने चालकों को शांत किया।
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इसलिए इस कानून को तत्काल वापस लेकर पुराने कानून को लागू किया जाए। बस का संचालन ठप होने से सोनभद्र, इलाहाबाद, जौनपुर, बनारस समेत अन्य स्थानाें के यात्रियाें को वाहन के लिए परेशान होना पड़ा।
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दोपहर बाद पहुंचे एआरएम ने पुलिस की सहायता से धरना दे रहे चालकों को उठवाया।
मिर्जापुर रोडवेज में कार्यरत करीब 250 चालक परिचालक गुरुवार की सुबह छह बजे ही रोडवेज बसाें के पहिए को रोक कर हड़ताल पर चले गए। हड़ताल से 73 बसाें का संचालन प्रभावित रहा जबकि सात बसें चलती रही।
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संचालन प्रभावित होने से जौनपुर, बनारस, इलाहाबाद, सोनभद्र, समेत अन्य स्थानाें पर जाने के लिए बस पकड़ने रोडवेज परिसर पहुंचे यात्रियाें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। छोटे छोटे बच्चाें को धूप में लेकर वाहन की तलाश में इधर उधर भटकने को महिलाएं विवश रहीं।
यात्री पैदल ही जौनपुर एवं बनारस जाने के लिए शास्त्री सेतु और रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। चालकाें ने कहा कि केंद्र सरकार ने यातायात समेत सड़क दुर्घटनाओं के कानून में संशोधन करने का प्रावधान बनाया है।
इससे अब दुर्घटना होने पर चालकाें को छह माह की जगह तीन वर्ष से दस वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा नियमों को तोड़ने पर हजाराें रुपये का जुर्माना अदा करना पड़ सकता है।
सरकार द्वारा किए गए कानून के संशोधन से उनकी रोजी रोजी पर असर पड़ेगा साथ ही उनके परिवार के बच्चे भूखाें मरने लगेंगे।
कहा कि अनजाने में आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन केंद्र सरकार के इस नियम से लोग गाड़ी चालाना बंद कर देंगे इससे रोजगार में कमी आएगी।
दोपहर तक अधिकांश बसाें का परिचालन ठप होने की जानकारी होने पर एआरएम आरके उपाध्याय ने चालकाें से हड़ताल समाप्त कर बस ले जाने के लिए कई बार कहा लेकिन चालक नहीं माने।
दोपहर करीब दो बजे वह पुलिस के साथ पहुंचे। चालकाें से कहा कि उनकी हड़ताल अवैध है। इसे लेकर एआरएम एवं चालकाें के बीच नोकझाेंक हुई। कटरा कोतवाल ने चालकों को शांत किया।