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जमीन की खरीद-बिक्री घटी
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Thu, 12 Jan 2017 12:30 AM IST
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नोटबंदी के चलते जमीन की खरीद-फरोख्त काफी कम हो गई है। दो माह पहले तक उप निबंधन कार्यालय को जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त से स्टांप शुल्क के रूप में हर महीने डेढ़ से दो करोड़ रुपये की आय होती थी जो घटकर एक तिहाई रह गई है।
अक्टूबर माह में जमीन बैनामा में लगने वाले स्टांप आदि की बिक्री से निबंधन विभाग को पौने दो करोड़ रुपये की आय हुई थी। जो नवंबर माह में घट कर महज 76 लाख पर पहुंच गई। सबसे कम बैनामा दिसंबर माह में हुआ, जिसमें मात्र 55 लाख रुपये के स्टांप की बिक्री हुई। चुनार तहसील परिसर में उप निबंधन कार्यालय है।
जहां पर पूरे तहसील के इलाके के जमीन/मकान आदि के खरीद बिक्री का रजिस्टर्ड बैनामा होता है। इसके अलावा वसीयतनामा, किरायेदारी, पट्टा विलेख पत्र सहित कई तरह के दस्तावेज का पंजीयन उप निबंधन कार्यालय द्वारा किया जाता है। इनसे हर माह कम से कम डेढ़ से दो करोड़ रुपये के स्टांप की बिक्री होती थी। निबंधन फीस से भी विभाग को राजस्व मिलता है। गौरतलब है कि बीते आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा होते ही जमीनों के खरीददार नदारद हो गए।
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घोषणा के पूर्व आए दिन दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, चंदौली सहित अनेक शहरों के खरीददार यहां पर जमीन की खरीददारी कर रहे थे। उप निबंधन कार्यालय में दो माह पूर्व प्रतिदिन सैकड़ाें की संख्या में रजिस्ट्री होती थी, यह संख्या अब घट कर कर दहाई की संख्या में पहुंच गई है। जमीन के खरीद फरोख्त कराने वाले क्षेत्र के जानकारों का कहना है की बैनामा में गिरावट का सबसे बड़ा कारण विक्रय मूल्य के लेनदेन के लिए नकदी का संकट है, तो दूसरी ओर विक्रेता जमीन के वास्तविक लेन देन को प्रदर्शित करने का दबाव खरीददार पर डाल रहे हैं, ताकि भविष्य में रुपये का ब्यौरा देने में उनको सहूलियत हो। नकदी की कमी के चलते जमीन की खरीद कम हुई है।
अक्टूबर माह में जमीन बैनामा में लगने वाले स्टांप आदि की बिक्री से निबंधन विभाग को पौने दो करोड़ रुपये की आय हुई थी। जो नवंबर माह में घट कर महज 76 लाख पर पहुंच गई। सबसे कम बैनामा दिसंबर माह में हुआ, जिसमें मात्र 55 लाख रुपये के स्टांप की बिक्री हुई। चुनार तहसील परिसर में उप निबंधन कार्यालय है।
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जहां पर पूरे तहसील के इलाके के जमीन/मकान आदि के खरीद बिक्री का रजिस्टर्ड बैनामा होता है। इसके अलावा वसीयतनामा, किरायेदारी, पट्टा विलेख पत्र सहित कई तरह के दस्तावेज का पंजीयन उप निबंधन कार्यालय द्वारा किया जाता है। इनसे हर माह कम से कम डेढ़ से दो करोड़ रुपये के स्टांप की बिक्री होती थी। निबंधन फीस से भी विभाग को राजस्व मिलता है। गौरतलब है कि बीते आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा होते ही जमीनों के खरीददार नदारद हो गए।
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घोषणा के पूर्व आए दिन दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, चंदौली सहित अनेक शहरों के खरीददार यहां पर जमीन की खरीददारी कर रहे थे। उप निबंधन कार्यालय में दो माह पूर्व प्रतिदिन सैकड़ाें की संख्या में रजिस्ट्री होती थी, यह संख्या अब घट कर कर दहाई की संख्या में पहुंच गई है। जमीन के खरीद फरोख्त कराने वाले क्षेत्र के जानकारों का कहना है की बैनामा में गिरावट का सबसे बड़ा कारण विक्रय मूल्य के लेनदेन के लिए नकदी का संकट है, तो दूसरी ओर विक्रेता जमीन के वास्तविक लेन देन को प्रदर्शित करने का दबाव खरीददार पर डाल रहे हैं, ताकि भविष्य में रुपये का ब्यौरा देने में उनको सहूलियत हो। नकदी की कमी के चलते जमीन की खरीद कम हुई है।