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मिर्जापुर: पाकिस्तान में 11 साल तक यातनाएं झेलने के बाद घर लौटा पुनवासी, अमर उजाला की पहल रंग लाई

Tue, 05 Jan 2021 03:48 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 05 Jan 2021 03:48 PM IST
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punwasi returned home after suffering torture in Pakistan for 11 years in mirzapur
पुनवासी का घर पहुंचकर हुआ स्वागत। - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान में 11 साल तक तरह-तरह की यातनाएं झेलने के बाद मंगलवार को पुनवासी की घर वापसी हो गई। अमर उजाला ने पहले वतन वापसी और फिर घर वापसी का अभियान चलाया था। पुनवासी अपनी बहन और जीजा के साथ मिर्जापुर जिले के भरूहना स्थित घर लौट आया।

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देहात कोतवाली के भरुहना निवासी पुनवासी 11 वर्ष पहले 2009 में भटककर पाकिस्तान चला गया था। दो वर्ष पूर्व पाकिस्तान की सरकार ने मानसिक रूप से कमजोर हो चुके पुनवासी द्वारा बताए गए अधूरे नाम पते की जानकारी भारत सरकार को भेजी। इसकी सूचना मिर्जापुर में आई।
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इसके बाद जिले के एलआईयू निरीक्षक इंद्रभूषण यादव ने दो वर्ष के अथक प्रयास के बाद किसी तरह से पुनवासी का पता खोजा। 17 नवंबर को पुनवासी को अटारी बार्डर पर बीएसएफ को सौंपा गया। वतन वापसी के बाद उसके घर वापसी में परेशानी हुई। घर वापसी के लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया।

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punwasi returned home after suffering torture in Pakistan for 11 years in mirzapur
घर लौटा पुनवासी। - फोटो : अमर उजाला

इसका असर रहा कि निर्वतमान जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल और एसपी अजय कुमार सिंह के प्रयास से एक सिपाही के साथ उसकी बहन किरण और जीजा मुन्नू को एक जनवरी को वाराणसी से बेगमपुरा एक्सप्रेस से भेजा गया। दो दिन रूककर कागजी कार्य पूरा होने के बाद सोमवार की सुबह सभी अमृतसर से घर के लिए निकले और मंगलवार की दोपहर तक वाराणसी पहुंचे। वहां से बस से मिर्जापुर के लिए रवाना हुए।

भाई को खिलाया भूजा और गुड़
पुनवासी को भूजा और गुड़ बहुत पसंद था। किरण उसके लिए भूजा और गुड़ लेकर गई थी। शनिवार को वह भाई को भूजा और गुड़ खिलाकर बचपन की बात बताती रही। पुनवासी ने भी बहन के हाथ का भूजा और गुड़ चाव से खाया।

वतन में भी बेगाने जैसा व्यवहार 
पाकिस्तान की जेल में यातनाएं झेल कर वतन लौटे पुनवासी के साथ अपने देश में ही बेगानों और बंदियों जैसा ही व्यवहार हो रहा है। अमृतसर के हेल्थ केयर सेंटर में ठंड के बाद भी उसे जैकेट आदि नहीं दी गई। भाई को लेने पहुंची बहन किरण ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर और जेल में आखिर फर्क क्या है।

रुकने की भी नहीं थी व्यवस्था
भाई को लेने गई बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज के रुकने के लिए वहां के प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को पहुंची बहन को यह चिंता सताने लगी कि आखिर दो दिन कहां रहेगी। उसका टिकट चार जनवरी को है। पुनवासी के परिवार को रेड क्रॉस के सराय में रुकवाया गया। वहां तक ले जाने के लिए साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।

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