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Mirzapur News: लटकती गईं परियोजनाएं और बढ़ती गई लागत

Fri, 30 May 2025 12:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 30 May 2025 12:20 AM IST
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Projects got delayed and costs increased
मिर्जापुर। जिले में बरसों पहले शुरू हुईं कई बड़ी परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। कोई वित्तीय अनियमितता और मनमानी के चलते तो काेई बजट जारी नहीं होने के कारण लंबे समय तक ठप रहीं। ज्यादातर परियोजनाओं की मियाद दो से तीन बार बढ़ाई गई। इनका निर्माण कार्य फिर शुरू हुआ तो उनकी लागत कई गुना बढ़ती गई। सर्किंट हाउस, इंजीनियरिंग काॅलेज, राजकीय पॉलिटेक्निक और अमृत योजना के काम अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे में आमजन को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
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18 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ सर्किट हाउस का काम
लंका की पहड़ी के पास वित्तीय वर्ष 2007-08 में सर्किट हाउस का निर्माण शुरू किया हुआ था। वर्ष 2012 इसकी मियाद तय की गई थी लेकिन 2.58 करोड़ खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। वित्तीय अनियमितता के चलते निर्माण कार्य रुक गया था। इसके बाद शासन ने 2.96 करोड़ रुपये पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया और मियाद बढ़ाकर अप्रैल 2025 की गई। अभी भी 20 फीसदी काम अधूरा है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के सहायक अभियंता एसके यादव ने बताया कि काम जल्द पूरा कराया जाएगा।।
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इंजीनियरिंग कॉलेज की तीन बार बढ़ी मियाद, फिर भी काम अधूरा
बथुआ स्थित पॉलिटेक्निक परिसर में बन रहे राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज का काम तीन बार मियाद बढ़ने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। अभी हाॅस्टल का निर्माण कार्य चल रहा है। वर्ष 2006 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। उस समय इसका बजट 89 करोड़ रुपये था। बजट जारी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य ठप हो गया था। इसके बाद 2018-19 में काम शुरू हुआ लेकिन बजट बढ़कर 132 करोड़ हो गया। कुछ समय बाद काम फिर बंद हो गया। 2021 में तीसरी बार काम शुरू हुआ लेकिन सुस्त गति के कारण अभी पूरा नहीं हो पाया है। करीब आठ फीसदी काम बाकी है। राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य लवकुश सिंह ने बताया कि काम लगभग पूरा हो गया है।
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2012 तक पूरा करना था पाॅलिटेक्निक का निर्माण, अभी भी अधूरा
राजगढ़ विकास खंड के निकरिका में राजकीय पाॅलिटेक्निक की स्वीकृति वर्ष 2010 में हुई थी और 2012 तक इसे पूरा होना था। इसके लिए 6.12 करोड़ रुपये का बजट था। लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण काम नहीं हो सका। इसके बाद वर्ष 2016 में काम शुरू हुआ लेकिन फिर रुक गया। इसके बाद जनवरी 2024 में फिर काम शुरू हुआ जो अप्रैल 2025 में पूरा करना था। अभी एक किलोमीटर लंबी चहारदीवारी का काम बाकी है। इसके लिए अलग से एक करोड़ का टेंडर होगा। कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता एसके यादव ने बताया कि काम पूरा हो गया है अब हस्तांतरण होना शेष है।


कनेक्शन के लिए अलग से जारी हुआ 21 करोड़
नगर में पेयजल के लिए 2019 में 193 करोड़ रुपये की अमृत पेयजल योजना शुरु की गई थी। इसे वर्ष 2020 तक पूरा हो जाना था। बाद में फिर इसे 2021 और फिर 2023 तक का समय बढ़ाया गया। इसके लिए सभी आधारभूत ढांचा खड़ा कर दिया गया। गंगा से पानी लिफ्ट कर इंटेक वेल तक आने भी लगा और वहां से लालडिग्गी स्थित नगर पालिका के जलाशय तक भी पहुंच गया। पूरे नगर में पाइप बिछा दिया गया लेकिन योजना पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि घरों का कनेक्शन नहीं हो सका था। कनेक्शन का जिक्र डीपीआर में था ही नहीं। इसके लिए फिर से प्रस्ताव हुआ, 21 करोड़ का टेंडर जारी हुआ और काम शुरु हुआ। अब कहा जा रहा है कि मार्च 2026 तक काम पूरा हो सकेगा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक मो. अयाज ने बताया कि कनेक्शन का काम तेजी से किया जा रहा है।
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