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विंध्याचल कॉरिडोर के लिए संभावित प्रक्रिया शुरू
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विंध्याचल। विंध्य कॉरिडोर के लिए तृतीय चरण में प्रस्तावित 1796 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि क्रय करने को आवश्यक भवनों, दुकानों , प्रतिष्ठानों की पैमाइश शुरू हो गई। पीडब्लूडी, नगरपालिका व राजस्व विभाग के कर्मचारी पुरानी वीआईपी मार्ग पर शाम चार बजे के करीब पैमाइश करने पहुंचे । जैसे ही संपत्तियों की नापी का कार्य प्रारंभ हुआ मौके पर काफी लोग एकत्रित हो गए। लोग यह जानने को उत्सुक दिखे कि किसकी कितनी जमीन खरीदी जाएगी पर किसी को भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाया।
विंध्यवासिनी कॉरिडोर के लिए 1796 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मंदिर तक जाने वाले चार प्रमुख मार्गों पर प्रवेश द्वारों के निर्माण तथा जनसुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता संबंधी पत्र सहायक पर्यटन अधिकारी की ओर से भेजा गया था। संयुक्त निदेशक पर्यटन ने महानिदेशक पर्यटन को पत्र लिखकर आवश्यक भूमि के लिए सर्वे कराने व भूमि के मूल्यांकन के लिए जिलाधिकारी मिर्जापुर को आवश्यक निर्देश के लिए लिखा। 18 सदस्यीय दल ने इसके लिए सर्वे भी शुरू कर दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही चिह्नित भवनों, भूमि का सहमति के साथ अधिग्रहण शुरू हो जाएगा।
पर्यटन विभाग द्वारा विंध्य कॉरिडोर में 1796 वर्गमीटर भूमि और खरीदने की तैयारी शुरू हो गई है। 18 सदस्यीय टीम सर्वे करेगी। विंध्य कॉरिडोर में अब 1796 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि खरीदने के लिए पर्यटन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस कार्य के लिए अट्ठारह सदस्यीय दल की तैनाती की गई है। 1796 वर्ग मीटर भूमि में सबसे अधिक भूमि मंदिर के उत्तर पूर्व तरफ, कोतवाली गली प्रवेश द्वार निर्माण के लिए तीन खंडों में जैसे 270 - 270 वर्ग मीटर की जरूरत है। इसी प्रकार पुरानी वीआईपी मार्ग के पर प्रवेश द्वार के लिए 219 वर्ग मीटर की जरूरत बताई गई है। मंदिर परकोटा तथा कोतवाली गली से संलग्न प्रवेश प्रांगण के लिए 765 वर्गमीटर भूमि की जरूरत बताई गई है। मंदिर परकोटा से पश्चिमी प्रवेश के लिए 122 वर्ग मीटर तथा परकोटा के दक्षिण तरफ 150 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण होगा।
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यज्ञशाला और वीवीआईपी के लिए बनेगा सुविधा केंद्र
मंदिर परकोटा से जुड़े दक्षिणी पूर्वी कोण पर यज्ञशाला का निर्माण होगा। 150 वर्गमीटर में बनने वाले विशाल यज्ञशाला में एक साथ कई लोग आहुति दे सकेंगे। इसी प्रकार ओल्ड वीआईपी रोड के समीप अतिविशिष्ट केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। 122 वर्ग मीटर का निर्माण कराया जाएगा।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्यवासिनी कारिडोर के लिए आवश्यक भूमि के संबंध में शासन से पत्र मिला है। उस आधार पर सर्वे इत्यादि की प्रक्रिया शुरू कराने का निर्देश दे दिया गया है।
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विंध्यवासिनी कॉरिडोर के लिए 1796 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मंदिर तक जाने वाले चार प्रमुख मार्गों पर प्रवेश द्वारों के निर्माण तथा जनसुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता संबंधी पत्र सहायक पर्यटन अधिकारी की ओर से भेजा गया था। संयुक्त निदेशक पर्यटन ने महानिदेशक पर्यटन को पत्र लिखकर आवश्यक भूमि के लिए सर्वे कराने व भूमि के मूल्यांकन के लिए जिलाधिकारी मिर्जापुर को आवश्यक निर्देश के लिए लिखा। 18 सदस्यीय दल ने इसके लिए सर्वे भी शुरू कर दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही चिह्नित भवनों, भूमि का सहमति के साथ अधिग्रहण शुरू हो जाएगा।
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पर्यटन विभाग द्वारा विंध्य कॉरिडोर में 1796 वर्गमीटर भूमि और खरीदने की तैयारी शुरू हो गई है। 18 सदस्यीय टीम सर्वे करेगी। विंध्य कॉरिडोर में अब 1796 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि खरीदने के लिए पर्यटन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस कार्य के लिए अट्ठारह सदस्यीय दल की तैनाती की गई है। 1796 वर्ग मीटर भूमि में सबसे अधिक भूमि मंदिर के उत्तर पूर्व तरफ, कोतवाली गली प्रवेश द्वार निर्माण के लिए तीन खंडों में जैसे 270 - 270 वर्ग मीटर की जरूरत है। इसी प्रकार पुरानी वीआईपी मार्ग के पर प्रवेश द्वार के लिए 219 वर्ग मीटर की जरूरत बताई गई है। मंदिर परकोटा तथा कोतवाली गली से संलग्न प्रवेश प्रांगण के लिए 765 वर्गमीटर भूमि की जरूरत बताई गई है। मंदिर परकोटा से पश्चिमी प्रवेश के लिए 122 वर्ग मीटर तथा परकोटा के दक्षिण तरफ 150 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण होगा।
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यज्ञशाला और वीवीआईपी के लिए बनेगा सुविधा केंद्र
मंदिर परकोटा से जुड़े दक्षिणी पूर्वी कोण पर यज्ञशाला का निर्माण होगा। 150 वर्गमीटर में बनने वाले विशाल यज्ञशाला में एक साथ कई लोग आहुति दे सकेंगे। इसी प्रकार ओल्ड वीआईपी रोड के समीप अतिविशिष्ट केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। 122 वर्ग मीटर का निर्माण कराया जाएगा।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्यवासिनी कारिडोर के लिए आवश्यक भूमि के संबंध में शासन से पत्र मिला है। उस आधार पर सर्वे इत्यादि की प्रक्रिया शुरू कराने का निर्देश दे दिया गया है।