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नवरात्र 2026: विंध्याचल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर रहेगा प्रतिबंध, 20 घंटे दर्शन; शृंगार में बंद रहेंगे पट

Fri, 02 Oct 2026 09:55 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 02 Oct 2026 09:55 AM IST
सार

मिर्जापुर जिले में स्थित विंध्याचल मंदिर में नवरात्र मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं नवरात्र के दौरान दर्शन के नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। 

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Navratri 2026 Vindhyachal temple will be prohibited entry into sanctum sanctorum
नवरात्रि में विंध्याचल मंदिर के गर्भगृह में नहीं मिलेगा प्रवेश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

11 अक्तूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले के दौरान में विंध्याचल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश वर्जित रहेगा। श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि मां विंध्यवासिनी के चरण स्पर्श पर भी रोक रहेगी। मां विंध्यवासिनी श्रद्धालुओं को 24 में से 20 घंटे दर्शन देंगी। केवल शृंगार के समय एक-एक घंटे पट बंद रहेंगे।

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नवरात्र मेले की तैयारियों के लिए बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन और पंडा समाज की बैठक हुई। बैठक में श्री विंध्य पंडा समाज ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि दोपहर दो बजे से वीआईपी श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाए ताकि आम श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन हो सकें। जिला प्रशासन ने इस पर सहमति जताई है। इसके अलावा, नवरात्र मेले की तैयारियों, समस्याओं और सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई। 
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संबंधित अधिकारियों को 8 अक्तूबर तक मेले की तैयारियों से संबंधित कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में बताया गया कि मंदिर में रंगाई-पुताई का कार्य शुरू हो गया है। सफाई, बिजली व्यवस्था भी चाक-चौबंद की जा रही है। वहीं, गंगा के बढ़े जलस्तर को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला प्रशासन फ्लोटिंग बैरिकेडिंग कराने की तैयारी कर रहा है। नौका संचालन के संबंध में नियम कड़े किए गए हैं। सभी को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य होगा।
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घाटों पर जमी सिल्ट, स्टेशन व मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण का कार्य अधूरा
मेले की तैयारियों की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। नवरात्र शुरू होने में सिर्फ 10 दिन बचे हैं और प्रमुख गंगा घाटों तक पहुंचने वाले मार्ग बदहाल हैं। अखाड़ा घाट जाने वाले रास्ते पर सड़क क्षतिग्रस्त है। उखड़ीं गिट्टियां, क्षतिग्रस्त नालियां और कीचड़ श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं।

विंध्याचल रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पटेंगरा और मोतीझील वाहन स्टैंड से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अखाड़ा घाट प्रमुख स्नान स्थल है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नवनिर्मित गुलाबी पत्थरों वाले घाट पर मोटी सिल्ट जम गई है। घाट के आसपास अतिक्रमण भी श्रद्धालुओं की राह संकरी कर रहा है। इसके बावजूद अभी तक मार्ग और घाट को व्यवस्थित करने की कवायद शुरू नहीं हुई है।

तीन साल से चौड़ीकरण, अब भी गिट्टी पर सफर
रेलवे स्टेशन रोड के चौड़ीकरण का काम करीब तीन साल से चल रहा है। ध्वस्तीकरण के बाद सड़क पर गिट्टियां डालकर छोड़ दी गई हैं। अमृत योजना के तहत डाली गई सीवर लाइन की मरम्मत का काम भी जारी है। ऐसे में नवरात्र मेले के दौरान भीड़ बढ़ने पर जाम और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट मार्ग और स्टेशन रोड को मेला शुरू होने से पहले दुरुस्त कराना जरूरी है। हालांकि प्रशासनिक बैठक में संबंधित विभाग के एक्सईएन ने चार अक्टूबर तक कार्य पूर्ण कराने का भरोसा दिया।

डीएम बोले

शारदीय नवरात्र को लेकर हमारा पूरा प्रयास है कि सभी श्रद्धालुओं को मां विंध्यवासिनी के सुगम दर्शन हों। तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। परंपरागत तैयारियों के साथ ही भक्तों की जरूरत के हिसाब से आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। -पवन कुमार गंगवार, जिलाधिकारी

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