{"_id":"615dbede8ebc3e61df07e866","slug":"mukut-puja-narada-moh-s-soulful-staged-mirzapur-news-vns615744033","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुकुट पूजा, नारद मोह का भावपूर्ण हुआ मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुकुट पूजा, नारद मोह का भावपूर्ण हुआ मंचन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिगना। भारतीय संस्कृति सेवा संस्था बिहसड़ा रामलीला समिति, रामलीला समिति पाली, आदर्श रामलीला समिति तिवारीपुर, श्रीबजऱग रामलीला समित सर्रोई कटरा व रामलीला समित गोगांव की ओर से अपने-अपने क्षेत्र में रामलीला का मंचन किया गया। पहले दिन मुकुट पूजा, नारद मोह आदि का भावपूर्ण मंचन भगवान विष्णु की आरती के साथ शुरू की गई।
नारद की तपस्या से इंद्र घबरा गए और उन्होंने नारद की तपस्या को भंग कराने की कोशिश की। नारद को उसी समय अहंकार पैदा हो गया और उन्होंने सभी देवताओं से अपनी प्रशंसा भी की। तो विष्णुजी ने नारद का दंभ दूर करने की सोची और एक माया की नगरी रास्ते में बसा दिया। वहां के राजा शीलनिधि बनें। एक पुत्री विश्वमोहिनी थी। नारद रास्ते से जाते समय राजा के दरबार में पहुंचते हैं। राजा कन्या को बुलाकर हस्तरेखा दिखवाते हैं तो नारद बिचलित हो जाते हैं। अमर होने के लिए विश्वमोहिनी कन्या से स्वयं विवाह करने का निर्णय लेते हुए भगवान विष्णु भगवान के पास पहुंचे। उन्होंने भगवान विष्णु से उनका स्वरूप मांग लिया। भगवान विष्णु ने नारद को अपने रूप के बजाय बंदर का रूप दे दिया। स्वयंवर उनका उपहास हुआ। इससे नारद क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। मंचन के दौरान अनिल कुमार सिंह, अजय कुमार, गोपालदास, जीतनारायण, संतोष तिवारी, धीरज तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, अखिलेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार सिंह, संतोष कुमार, रिसू सिंह, राकेश तिवारी सहित काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
......................................................
फुलवारी के मंचन ने मोहा लोगों का मन
रामलीला के पांचवें दिन हुए कार्यक्रम में लगे जयकारे
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत लालगंज मिलिट्री ग्राउंड के मैदान की रामलीला में पांचवें दिन फुलवारी चरित्र का मंचन किया गया। जिसमें राम और सीता मौन संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया।
विज्ञापन
दर्जनों गांव से आए हुए श्रद्धालुओं ने देर रात रामलीला भाव विभोर होकर देखी। फुलवारी लीला के दिन गुरु और शिष्य परंपरा के कर्तव्य निर्वहन के दौरान पूजन के लिए फूल लेने दूसरे राज्य राजा जनक की फुलवारी तक भगवान राम को जाना पड़ा। मार्ग पर नगर वासियों को राम और लक्ष्मण की जोड़ी मोहक और प्रेरक लगी। कलाकारों ने राम और लक्ष्मण के चरित्र का आदर्श और संस्कार युक्त दृश्य को दिखाया। रामलीला शुरू होते ही आए हुए ग्रामीणों ने राम और लक्ष्मण की झांकी की आरती वंदना और पूजन किया। रामलीला देखने आए लालगंज, बरडीहा, मेढरा, डुहिया, लालापुर, रजई, खैरही, खजुरी, कटवाकर, जगदीशपुर आज गांव के दर्शकों ने रामलीला का आनंद लिया। ग्राम प्रधान विजय गुत्ता, अध्यक्ष जय सिंह, संरक्षक राजेंद्र सिंह यादव और गणमान्य नागरिक दर्शकों को उचित स्थान पर बैठाने में लगे रहे।
विज्ञापन
नारद की तपस्या से इंद्र घबरा गए और उन्होंने नारद की तपस्या को भंग कराने की कोशिश की। नारद को उसी समय अहंकार पैदा हो गया और उन्होंने सभी देवताओं से अपनी प्रशंसा भी की। तो विष्णुजी ने नारद का दंभ दूर करने की सोची और एक माया की नगरी रास्ते में बसा दिया। वहां के राजा शीलनिधि बनें। एक पुत्री विश्वमोहिनी थी। नारद रास्ते से जाते समय राजा के दरबार में पहुंचते हैं। राजा कन्या को बुलाकर हस्तरेखा दिखवाते हैं तो नारद बिचलित हो जाते हैं। अमर होने के लिए विश्वमोहिनी कन्या से स्वयं विवाह करने का निर्णय लेते हुए भगवान विष्णु भगवान के पास पहुंचे। उन्होंने भगवान विष्णु से उनका स्वरूप मांग लिया। भगवान विष्णु ने नारद को अपने रूप के बजाय बंदर का रूप दे दिया। स्वयंवर उनका उपहास हुआ। इससे नारद क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। मंचन के दौरान अनिल कुमार सिंह, अजय कुमार, गोपालदास, जीतनारायण, संतोष तिवारी, धीरज तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, अखिलेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार सिंह, संतोष कुमार, रिसू सिंह, राकेश तिवारी सहित काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
विज्ञापन
......................................................
फुलवारी के मंचन ने मोहा लोगों का मन
रामलीला के पांचवें दिन हुए कार्यक्रम में लगे जयकारे
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत लालगंज मिलिट्री ग्राउंड के मैदान की रामलीला में पांचवें दिन फुलवारी चरित्र का मंचन किया गया। जिसमें राम और सीता मौन संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया।
विज्ञापन
दर्जनों गांव से आए हुए श्रद्धालुओं ने देर रात रामलीला भाव विभोर होकर देखी। फुलवारी लीला के दिन गुरु और शिष्य परंपरा के कर्तव्य निर्वहन के दौरान पूजन के लिए फूल लेने दूसरे राज्य राजा जनक की फुलवारी तक भगवान राम को जाना पड़ा। मार्ग पर नगर वासियों को राम और लक्ष्मण की जोड़ी मोहक और प्रेरक लगी। कलाकारों ने राम और लक्ष्मण के चरित्र का आदर्श और संस्कार युक्त दृश्य को दिखाया। रामलीला शुरू होते ही आए हुए ग्रामीणों ने राम और लक्ष्मण की झांकी की आरती वंदना और पूजन किया। रामलीला देखने आए लालगंज, बरडीहा, मेढरा, डुहिया, लालापुर, रजई, खैरही, खजुरी, कटवाकर, जगदीशपुर आज गांव के दर्शकों ने रामलीला का आनंद लिया। ग्राम प्रधान विजय गुत्ता, अध्यक्ष जय सिंह, संरक्षक राजेंद्र सिंह यादव और गणमान्य नागरिक दर्शकों को उचित स्थान पर बैठाने में लगे रहे।