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दहेज हत्या में पति को 10 वर्ष की कैद
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मिर्जापुर। हलिया थाना क्षेत्र के फुरियारी गांव में पांच वर्ष पूर्व दहेज हत्या के मामले में मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने फैसला सुनाया। पति पर दोष सिद्ध पाया। उसे 10 वर्ष की कैद और छह हजार के अर्थदंड से दंडित कर जेल भेज दिया। सास-ससुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र के गढ़वा थाना क्षेत्र के खम्हारडीह गांव निवासी व वादी मुकदमा प्रह्लाद विश्वकर्मा ने पुत्री सीता देवी की शादी 29 मई 2013 को हलिया थाना क्षेत्र के फुलियारी गांव निवासी संतोष विश्वकर्मा से की थी। लेकिन दहेज के लिए उसे परेशान किया जाने लगा। शिकायत पर उन्होंने सीता की विदाई के लिए ससुर राममनी से बात की। 22 मई 2014 को विदाई का दिन रखा गया। लेकिन जब प्रह्लाद विदाई के लिए गए तो पता चला कि 21 मई को उसकी पुत्री सीता ने फांसी लगा ली है। प्रलह्राद ने 22 मई को इसकी थाने पर सूचना दी। पुलिस मुकदमा न दर्ज कर टाल-मटौल करती रही। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद पांच अगस्त को मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना कर पति समेत सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान और अधिवक्ताओं के दलील के आधार पर न्यायालय ने पति संतोष विश्वकर्मा को दोषसिद्ध पाते हुए 10 वर्ष की कैद के साथ छह हजार के जुर्माने से दंडित कर जेल भेजा।
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अभियोजन के अनुसार, मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र के गढ़वा थाना क्षेत्र के खम्हारडीह गांव निवासी व वादी मुकदमा प्रह्लाद विश्वकर्मा ने पुत्री सीता देवी की शादी 29 मई 2013 को हलिया थाना क्षेत्र के फुलियारी गांव निवासी संतोष विश्वकर्मा से की थी। लेकिन दहेज के लिए उसे परेशान किया जाने लगा। शिकायत पर उन्होंने सीता की विदाई के लिए ससुर राममनी से बात की। 22 मई 2014 को विदाई का दिन रखा गया। लेकिन जब प्रह्लाद विदाई के लिए गए तो पता चला कि 21 मई को उसकी पुत्री सीता ने फांसी लगा ली है। प्रलह्राद ने 22 मई को इसकी थाने पर सूचना दी। पुलिस मुकदमा न दर्ज कर टाल-मटौल करती रही। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद पांच अगस्त को मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना कर पति समेत सास-ससुर के खिलाफ दहेज हत्या से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान और अधिवक्ताओं के दलील के आधार पर न्यायालय ने पति संतोष विश्वकर्मा को दोषसिद्ध पाते हुए 10 वर्ष की कैद के साथ छह हजार के जुर्माने से दंडित कर जेल भेजा।
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