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पुत्र के दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा व्रत
mirzapur news
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:51 PM IST
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पूजन
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ललही छठ पर्व पर व्रती महिलाओं ने पुत्र के दीर्घायु के लिए रविवार को पूजन अर्चन किया। इस दौरान महिलाओं ने समूह में अनगढ़ रोड स्थित बालक दास का पोखरा, बरिया घाट, सुंदर घाट आदि स्थानों पर एक साथ बैठकर परंपरागत कथा का श्रवण कर पुत्र की दीर्घायु की कामना की। पोखरों और गंगा घाटों के किनारे मेलों का आयोजन किया गया।
मान्यता के अनुसार माता के द्वारा ललही छठ व्रत करने पर पुत्र को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। भविष्य पुराण में भी व्रत का महात्म पाया गया है, जिसके कथानुसार माता के व्रत करने से उसका मृत बालक जीवित हो उठता है। उसी परंपरा को मान कर महिलाएं पुत्र की दीर्घायु के लिए ललही छठ के दिन व्रत रखती हैं। रविवार को महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद थाल में पूजन सामग्री सजा कर कपड़े से ढंक कर मध्यान्ह में पूजा अर्चन के लिए घर से निकलीं। व्रत के दौरान महिलाएं पूरे दिन फलाहार पर रहकर, दूूसरे दिन बिना हल के प्रयोग से उपजे अन्न को ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं। रविवार को सुबह ही थाल सजा कर महिलाएं बैंडबाजा के साथ तालाबों और गंगाघाटों पर पूजा के लिए पहुंची। यहां ललही छठ गोसाईं की पूजा की गई। महिलाओं ने आपस में कथा सुनाई। छिउल का पत्ता और कुश को मुंह से लगा कर महिलाओं की समाप्ति की। पूजा स्थलों पर मेला लगा था। जगह-जगह खिलौनों की दूकानें सजी थीं। मेले में तरह तरह के मिट्टी व प्लास्टिक से बने खिलौने देखने को मिल रहा था। मां पुत्र की दीर्घायु के लिए पूजा में व्यस्त थी, तो बच्चों का मन खिलौनों पर लगा रहा।
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मान्यता के अनुसार माता के द्वारा ललही छठ व्रत करने पर पुत्र को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। भविष्य पुराण में भी व्रत का महात्म पाया गया है, जिसके कथानुसार माता के व्रत करने से उसका मृत बालक जीवित हो उठता है। उसी परंपरा को मान कर महिलाएं पुत्र की दीर्घायु के लिए ललही छठ के दिन व्रत रखती हैं। रविवार को महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद थाल में पूजन सामग्री सजा कर कपड़े से ढंक कर मध्यान्ह में पूजा अर्चन के लिए घर से निकलीं। व्रत के दौरान महिलाएं पूरे दिन फलाहार पर रहकर, दूूसरे दिन बिना हल के प्रयोग से उपजे अन्न को ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं। रविवार को सुबह ही थाल सजा कर महिलाएं बैंडबाजा के साथ तालाबों और गंगाघाटों पर पूजा के लिए पहुंची। यहां ललही छठ गोसाईं की पूजा की गई। महिलाओं ने आपस में कथा सुनाई। छिउल का पत्ता और कुश को मुंह से लगा कर महिलाओं की समाप्ति की। पूजा स्थलों पर मेला लगा था। जगह-जगह खिलौनों की दूकानें सजी थीं। मेले में तरह तरह के मिट्टी व प्लास्टिक से बने खिलौने देखने को मिल रहा था। मां पुत्र की दीर्घायु के लिए पूजा में व्यस्त थी, तो बच्चों का मन खिलौनों पर लगा रहा।
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