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मनरेगा घोटाले की शुरू हुई जांच---
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हलिया। मनरेगा के तहत हो चुके कार्यों के स्थल पर आरसीसी के बजाय पटिया का बोर्ड लगाने के मामले की जांच शुक्रवार से शुरू हो गई। सीडीओ ने एसडीएम लालगंज अमित शुक्ला को जांच सौंपी है। एसडीएम ने बोर्ड निर्माण स्थल का दौरान करने के साथ ही इस कार्य से जुड़े लोगों के बयान भी लिए। वहीं जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने कहा कि जांच में अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वर्ष 2007 से 10 के मध्य 3.45 करोड़ मनरेगा घोटाले की जांच सीबीआई अभी कर ही रही है कि हलिया विकासखंड में दूसरा घोटाला सिर उठाने लगा है। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने पर इसकी जांच एसडीएम से कराई जा रही है। एसडीएम अमित कुमार शुक्ला मौके पर पंहुचकर खेतों में तैयार हो रहे पटिया बोर्ड की जांच की। साथ ही पटिया के बोर्ड निर्माण करा रही उज्जवला समूह के कोषाध्यक्ष पार्वती का बयान दर्ज किया। उन्होंने बताया कि लगभग 136 पटिया का भुगतान हो चुका है। कासगंज बदायूं से पत्थर मंगाया गया है। हालांकि पटिया का दाम नहीं बता पाईं। इसके बाद ग्राम पंचायत बरी में एक ही खेत में 100 मीटर की दूरी पर शिवराम के खेत में समतलीकरण व मेड़बंदी व बंधूलाल के खेत में समतलीकरण व मेड़बंदी के कार्य में लगाए गए पटिया के बोर्ड को देखा। दूसरे जिले के ठेकेदार से पटिया का बोर्ड बनवाया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि 13 अगस्त से 18 अगस्त तक के बीच पांच लाख 66 हजार 500 रुपये उज्जवला आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह के खाते में आर्यावर्त बैंक हलिया से भुगतान भी हो चुका है। हलिया विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में मनरेगा योजना में हुए कार्यों का बोर्ड लगाया जाना है। मानक के तहत इसका निर्माण आरसीसी से किया जाना है। लेकिन बोर्ड पटिया का लगाकर विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में मनरेगा योजना में खेल शुरू हो गया है। बोर्ड लगाने का कार्य अंतर्जनपदीय उज्जवला आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है। सबसे बड़ा खेल बोर्ड लगाने में ही सामने आया है। मानक के तहत बोर्ड कंक्रीट का लगना चाहिए। जबकि बोर्ड पटिया का लगवाया जा रहा है जिसपर लागत 200 से 300 रुपये आता है। वहीं पेमेंट कंक्रीट बोर्ड के हिसाब से प्रति बोर्ड 3000 से 5000 तक कराया जा रहा है। 136 बोर्ड का भुगतान करा लिया गया है। ज्यादातर बोर्ड के लिए 5000 रुपये लिए गए हैं। दो हजार से ज्यादा बोर्ड क्षेत्र में लगाए जाने थे। विकास खंड के भीटहा , अहुगीकलां, बरी, बबुरा रघुनाथ सिंह बरडीहा कला सहित विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में गाँव में मनरेगा योजना अंतर्गत समतलीकरण एवं मेड़बंदी के कार्यों पर भी पटिया का बोर्ड लगाया जा रहा है। मनरेगा योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत बबुरा रधुनाथ सिंह में अतर सिंह के खेत तक मेड़बंदी निर्माण एक लाख 79 हजार 54 रुपये की लागत से कागज पर कराया जा चुका है। बबुरा रघुनाथ सिंह निवासी अजीज अली, एकाशी देवी ,अहुगी कलां निवासी लल्लू दलित ,कुंवर बहादुर ,केसरी सिंह आदि लोगों ने पटिया का बोर्ड लगाकर मनरेगा में किए जा रहे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता बताई।
केंद्रीय मंत्री ने बीडीओ के खिलाफ दिए जांच के आदेश
- सोशल मीडिया पर संबंधित मामले से जुड़ा दो पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें मंत्री द्वय ने बीडीओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। प्रदेश में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने डीएम को इस प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया है तो वहीं मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। दोनो ही आदेश में खंड विकास अधिकारी हलिया ब्लाक की भूमिका को संदिग्ध मानकर जांच के आदेश दिए गए हैं।
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जांच शुरू होने से भड़के बीडीओ
- सीडीओ के आदेश पर जांच शुरू होने से बीडीओ हलिया विकास खंड शुक्रवार की सुबह अपना आपा खो बैठे। कार्यालय पर फरियाद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को बेवजह डांटने फटकारने लगे। यहां तक कि मनरेगा मामले में जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों से भी बदसलूकी की।
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वर्ष 2007 से 10 के मध्य 3.45 करोड़ मनरेगा घोटाले की जांच सीबीआई अभी कर ही रही है कि हलिया विकासखंड में दूसरा घोटाला सिर उठाने लगा है। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने पर इसकी जांच एसडीएम से कराई जा रही है। एसडीएम अमित कुमार शुक्ला मौके पर पंहुचकर खेतों में तैयार हो रहे पटिया बोर्ड की जांच की। साथ ही पटिया के बोर्ड निर्माण करा रही उज्जवला समूह के कोषाध्यक्ष पार्वती का बयान दर्ज किया। उन्होंने बताया कि लगभग 136 पटिया का भुगतान हो चुका है। कासगंज बदायूं से पत्थर मंगाया गया है। हालांकि पटिया का दाम नहीं बता पाईं। इसके बाद ग्राम पंचायत बरी में एक ही खेत में 100 मीटर की दूरी पर शिवराम के खेत में समतलीकरण व मेड़बंदी व बंधूलाल के खेत में समतलीकरण व मेड़बंदी के कार्य में लगाए गए पटिया के बोर्ड को देखा। दूसरे जिले के ठेकेदार से पटिया का बोर्ड बनवाया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि 13 अगस्त से 18 अगस्त तक के बीच पांच लाख 66 हजार 500 रुपये उज्जवला आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह के खाते में आर्यावर्त बैंक हलिया से भुगतान भी हो चुका है। हलिया विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में मनरेगा योजना में हुए कार्यों का बोर्ड लगाया जाना है। मानक के तहत इसका निर्माण आरसीसी से किया जाना है। लेकिन बोर्ड पटिया का लगाकर विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में मनरेगा योजना में खेल शुरू हो गया है। बोर्ड लगाने का कार्य अंतर्जनपदीय उज्जवला आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है। सबसे बड़ा खेल बोर्ड लगाने में ही सामने आया है। मानक के तहत बोर्ड कंक्रीट का लगना चाहिए। जबकि बोर्ड पटिया का लगवाया जा रहा है जिसपर लागत 200 से 300 रुपये आता है। वहीं पेमेंट कंक्रीट बोर्ड के हिसाब से प्रति बोर्ड 3000 से 5000 तक कराया जा रहा है। 136 बोर्ड का भुगतान करा लिया गया है। ज्यादातर बोर्ड के लिए 5000 रुपये लिए गए हैं। दो हजार से ज्यादा बोर्ड क्षेत्र में लगाए जाने थे। विकास खंड के भीटहा , अहुगीकलां, बरी, बबुरा रघुनाथ सिंह बरडीहा कला सहित विकास खंड के 79 ग्राम सभाओं में गाँव में मनरेगा योजना अंतर्गत समतलीकरण एवं मेड़बंदी के कार्यों पर भी पटिया का बोर्ड लगाया जा रहा है। मनरेगा योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत बबुरा रधुनाथ सिंह में अतर सिंह के खेत तक मेड़बंदी निर्माण एक लाख 79 हजार 54 रुपये की लागत से कागज पर कराया जा चुका है। बबुरा रघुनाथ सिंह निवासी अजीज अली, एकाशी देवी ,अहुगी कलां निवासी लल्लू दलित ,कुंवर बहादुर ,केसरी सिंह आदि लोगों ने पटिया का बोर्ड लगाकर मनरेगा में किए जा रहे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता बताई।
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केंद्रीय मंत्री ने बीडीओ के खिलाफ दिए जांच के आदेश
- सोशल मीडिया पर संबंधित मामले से जुड़ा दो पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें मंत्री द्वय ने बीडीओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। प्रदेश में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने डीएम को इस प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया है तो वहीं मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने भी इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। दोनो ही आदेश में खंड विकास अधिकारी हलिया ब्लाक की भूमिका को संदिग्ध मानकर जांच के आदेश दिए गए हैं।
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जांच शुरू होने से भड़के बीडीओ
- सीडीओ के आदेश पर जांच शुरू होने से बीडीओ हलिया विकास खंड शुक्रवार की सुबह अपना आपा खो बैठे। कार्यालय पर फरियाद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को बेवजह डांटने फटकारने लगे। यहां तक कि मनरेगा मामले में जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों से भी बदसलूकी की।