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काम के महीनों बाद होता है मनरेगा का भुगतान

Mon, 27 Dec 2021 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 11:36 PM IST
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MNREGA is paid after months of work
सिटी विकास खंड के ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत पक्के निर्माण ग्राम पंचायतों के लिए परेशानी का सबब बना है। निर्माण के महीनों बाद भुगतान होने से ग्राम प्रधानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तगादा को लेकर सुबह होते ही एक के बाद एक मैटेरियल दुकानदारों के फोन आते हैं।
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87 ग्राम पंचायत वाले विकास खंड में यह हकीकत महज एक गांव की नहीं लगभग सभी गांवों में है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत इंटरलाकिंग निर्माण, नाली व कैटल शेड निर्माण कराया गया है। नुआंव, अनंतरामपट्टी, खजुरी, हरिहरपुर बेदौली, अरगजा पांडेय, महेंवां, अर्जुनपुर, दुबरा पहाड़ी, दुहौआ, समोगरा, बिकना, टांड़ सहित अन्य ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य कराए गए हैं। अधिकांश ग्राम पंचायतों लगभग तीन महीने से भुगतान नहीं हो रहा है। बकाए को लेकर ग्राम प्रधान सुबह से तगादेदारों के फोन घनघनाने लगते हैं। जिन्हे वे सिर्फ आश्वासन देते फिर रहे हैं। भुगतान के लिए ग्राम प्रधान ब्लाक मुख्यालय का प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं। मैटेरियल बजट न होने से भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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इंटरलाकिंग आदि कार्यों में समय से भुगतान न होने से प्रधानों को समस्याओं की दौर से गुजरना पड़ रहा है। सिटी, छानबे, कोन, मझवां, पहाड़ी व नरायनपुर ब्लाक में मेड़बंदी और समतलीकरण कार्य प्राथमिकता से होनी चाहिए।
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- चंद्रशेखर यादव, चंदू, अध्यक्ष, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन।
मनरेगा के तहत ग्राम प्रधान गांव में इंटरलाकिंग और नाली निर्माण समेत अन्य कार्य करा तो देते हैं, लेकिन समय से भुगतान न होने से ग्राम प्रधान समस्याएं झेल रहे हैं। सिटी ब्लाक में कई ऐसे गांव हैं जहां तीन, चार महीनें से भुगतान नहीं हुआ है।
- जवाहरलाल मौर्य, सिटी ब्लाक अध्यक्ष, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन।
पक्के कार्य ग्राम पंचायतों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। काम तो करा दिया जाता है लेकिन भुगतान न होने से ग्राम प्रधानों को महीनें मैटेरियल दुकानदारों का तगाता झेलना पड़ता है। सरकार को चाहिए समय से भुगतान करे।
-जयशंकर बिंद, ग्राम प्रधान।
मनरेगा के तहत हुए कार्यों को लेकर प्रधानों की हालत सांप व छछुंदर वाली हो गयी है। काम तो करा दिया जाता है लेकिन समय से भुगतान न होने से श्रमिकों के साथ ही दुकानदारों का समय से भुगतान को लेकर दबाव बना रहता है।

-मनोज कुमार मौर्य, ग्राम प्रधान।
मनरेगा का भुगतान ऑनलाइन है। शासन से सीधे इसका भुगतान किया जाता है। हमें तो अभी एक नवंबर को यहां प्रभार मिला है। यदि कहीं कुछ कमियां हैं तो इसे ठीक कराते हुए मनरेगा में बकाया भुगतान कराया जाएगा।
-डा अभिनीत कुमार, एसडीएम, प्रभारी बीडीओ सिटी।
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