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Mirzapur News: स्मार्ट क्लास संचालन में मिर्जापुर प्रथम
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स्मार्ट क्लास संचालन में राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जारी रैंकिंग के अनुसार जिले को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। दूसरे स्थान पर मऊ दूसरे स्थान पर तथा चंदौली तीसरे स्थान पर आया है। परियोजना ने सभी 75 जिलों की रैंकिंग जारी की है। इसमें एटा जिला को अंतिम स्थान प्राप्त हुआ है। जिले में स्मार्ट क्लास की सक्रियता 96 प्रतिशत है।
जिले में वर्तमान में 426 परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय व कम्पोज़िट विद्यालयों में स्मार्ट क्लास का संचालन कराया जा रहा है। अबाध संचालन के लिए समस्त विद्यालयों में इन्वर्टर व बैटरी, डांगल तथा इंटरनेट की व्यवस्था कराई गई है। विषयों व पाठ्यक्रम को रुचिकर बनाने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराये ऑडियो-विजुअल पाठ्य सामग्रियों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से प्रदर्शित कर बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से त्रिआयामी मॉडल, स्केच, शैक्षणिक यू-ट्यूब चैनल्स, ऑडियो व्याख्या इत्यादि का प्रयोग कर बच्चों को सरलतापूर्वक पढ़ाया जा रहा है। बच्चे रुचि लेकर स्वयं स्केच, गणितीय प्रश्नों को हल, रिक्त स्थान को भरने, स्पेलिंग करेक्शन इत्यादि कार्य स्वयं कर रहे हैं, जिससे कठिन टॉपिक बच्चों अत्यन्त सरल एवं रूचिकर लगने लगते हैं, बच्चों की उपस्थिति भी पहले से बढ़ गई है। विवज़, वर्कशीट एवं टेस्ट का प्रयोग कर तत्काल फीडबैक प्राप्त किया जा सकता है, साथ ही बच्चे टेक्नालॉजी से भली-भांति परिचित हो रहे हैं। बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि जिला स्तर पर गठित मॉनीटरिंग सेल मॉनीटरिंग कर प्रतिदिन स्मार्ट क्लास का अनिवार्य रूप से दो से तीन घंटे संचालन कराता है। इसी प्रकार 63 विद्यालयों में आईसीटी लैब व नौ विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं।
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जिले में वर्तमान में 426 परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय व कम्पोज़िट विद्यालयों में स्मार्ट क्लास का संचालन कराया जा रहा है। अबाध संचालन के लिए समस्त विद्यालयों में इन्वर्टर व बैटरी, डांगल तथा इंटरनेट की व्यवस्था कराई गई है। विषयों व पाठ्यक्रम को रुचिकर बनाने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराये ऑडियो-विजुअल पाठ्य सामग्रियों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से प्रदर्शित कर बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से त्रिआयामी मॉडल, स्केच, शैक्षणिक यू-ट्यूब चैनल्स, ऑडियो व्याख्या इत्यादि का प्रयोग कर बच्चों को सरलतापूर्वक पढ़ाया जा रहा है। बच्चे रुचि लेकर स्वयं स्केच, गणितीय प्रश्नों को हल, रिक्त स्थान को भरने, स्पेलिंग करेक्शन इत्यादि कार्य स्वयं कर रहे हैं, जिससे कठिन टॉपिक बच्चों अत्यन्त सरल एवं रूचिकर लगने लगते हैं, बच्चों की उपस्थिति भी पहले से बढ़ गई है। विवज़, वर्कशीट एवं टेस्ट का प्रयोग कर तत्काल फीडबैक प्राप्त किया जा सकता है, साथ ही बच्चे टेक्नालॉजी से भली-भांति परिचित हो रहे हैं। बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि जिला स्तर पर गठित मॉनीटरिंग सेल मॉनीटरिंग कर प्रतिदिन स्मार्ट क्लास का अनिवार्य रूप से दो से तीन घंटे संचालन कराता है। इसी प्रकार 63 विद्यालयों में आईसीटी लैब व नौ विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं।
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