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पुलिस ने 24 घंटे में किया खुलासा: कर्ज से बचने के लिए एजेंट ने रची थी लूट की साजिश, 16 लाख 73 हजार बरामद

Sun, 11 Aug 2024 01:44 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 11 Aug 2024 01:44 PM IST
सार

मिर्जापुर में फाइनेंस कंपनी के एजेंट से लूट की 24 घंटे के अंदर पुलिस ने खुलासा कर दिया है। लूट की सूचना देने वाले ने ही झूठी साजिश रची थी। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से मामले का खुलासा किया गया। 

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Mirzapur police revealed robbery of block coordinator within 24 hours
बरामद नकदी व घटना की जानकारी देती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिर्जापुर के जमालपुर क्षेत्र में ब्लाक कोआर्डिनेटर से लूट का खुलासा पुलिस ने 24 घंटे में कर लिया। शिकायत करने वाले ने खुद साजिश रचकर 16 लाख रुपये की लूट कराकर पुलिस को सूचना दी थी। कर्ज से बचने के लिए लूट का षडयंत्र रचा गया था।

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यह है पूरा मामला
थाना जमालपुर के ग्राम औड़ी टियरा मोड़ के पास प्रवीण पटेल पुत्र इंद्रपाल निवासी शिवपुर मिल्की थाना जमालपुर जो माइक्रो फाइनेंस कंपनी का कैश कलेक्शन व ड्रिस्टीब्यूशन एजेंट है। कंपनी के कलेक्शन का करीब 17 लाख रुपये लेकर अपने साथी दीपू खरवार पुत्र सुरेंद्र खरवार के साथ नौ अगस्त की रात बाइक से घर जा रहा था। 
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आरोप था कि तीन बाइकों पर सवार सात व्यक्तियों द्वारा उसे रोककर रुपयों से भरा बैग छीनकर ग्राम औड़ी की ओर भाग गए। सूचना पर पुलिस उच्चाधिकारी द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। सूचना देने वाले से पूछताछ की गई। घटना के अनावरण के लिए तत्काल टीमों का गठन किया गया।  

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जांच टीम में एसओजी व सर्विलांस टीम को भी शामिल किया गया। टीम ने जहां शिकायतकर्ता द्वारा कैश का कलेक्शन किया गया था, वहां से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की। साथ ही जिस रूट से प्रवीण घटनास्थल तक पहुचां था, उस रूट के सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। जिससे स्पष्ट हुआ कि जिस स्थान पर प्रवीण द्वारा घटना होना बताया जा रहा है, उस रूट पर प्रवीण के आसपास एक घंटे तक कोई वाहन सवार नहीं दिखा। वह सुनसान रोड है, जहां रात में बहुत कम आवागमन होता है। 

जांच से ये पाया गया कि घटना से करीब आधा घंटा पहले प्रवीण द्वारा अपना व अपने साथी के मोबाइल फोन को स्वीच ऑफ कर लिया गया था। गोपनीय सूत्रों से पता चला कि प्रवीण पर पर काफी कर्ज था। तथ्यों के आधार पर जब प्रवीण से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और उसने बताया कि वह करीब तीन वर्ष से माइक्रो फाइनेंस कंपनी का कैश कलेक्शन कर बैंकों में जमा करता है। उस पर करीब सात लाख रुपये कर्ज है। साथ ही करीब ढाई लाख रुपये प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के कर्मचारीयों द्वारा उसका रोक लिया गया था।

प्रवीण ने बताया कि उसको हर महीने करीब 30 हजार रुपये का ब्याज भी भरना पड़ रहा है। यहा वजह है कि उसने झूठी साजिश रची। प्रवीण 16 लाख 73 हजार रुपये कैश अपने कब्जे से बरामद कराया।  

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