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मिर्जापुर: अवैध वसूली की शिकायत पर एआरटीओ निलंबित, राज्यपाल के आदेश पर प्रमुख सचिव ने की कार्रवाई

Fri, 07 Jan 2022 12:46 AM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 07 Jan 2022 12:46 AM IST
सार

एआरटीओ विवेक शुक्ला के खिलाफ आरोप है कि वह ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई न कर अवैध वसूली कर रहे थे। 

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Mirzapur ARTO suspended on complaint of illegal recovery Principal Secretary took action on Governor  order
- फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई न कर अवैध वसूली करने से हो रही राजस्व हानि की शिकायतों पर राज्यपाल के आदेश से प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन विवेक कुमार शुक्ला को निलंबित कर दिया। उनको परिवहन आयुक्त कार्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।

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एआरटीओ विवेक शुक्ला के खिलाफ आरोप है कि वह ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई न कर अवैध वसूली कर रहे थे। इसके अलावा पंजीकरण लाइसेंस फिटनेस वर्क परमिट के नाम पर सुविधा शुल्क दिए बिना कोई कार्य न करने व अन्य अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। इस पर राज्यपाल के आदेश से प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को एआरटीओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन्हें परिवहन आयुक्त कार्यालय से संबंधित किया गया है।

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भदोही में पैरा मेडिकल कॉलेज मिला अवैध
भदोही के गोपीगंज के डॉक्टर कॉलोनी में अवैध ढंग से संचालित एक मेडिकल कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशुतोष पांडेय की जांच में यह खुलासा किया गया है। अधीक्षक ने जांच रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी है। 
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अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने 25 दिसंबर को आईजीआरएस पोर्टल से डीएम को प्रार्थना पत्र दिया। इसमें आरोप लगाया गया था कि गोपीगंज के डॉक्टर कालोनी स्थित एक पैरामेडिकल कॉलेज बिना मान्यता के संचालित है। इसके साथ ही 10 अन्य बिंदुओं पर शिकायत की गई थी। 

डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक ने सीएचसी अधीक्षक गोपीगंज डॉ. आशुतोष पांडेय को जांच अधिकारी नामित कर रिपोर्ट मांगी। तीन जनवरी को अधीक्षक ने उक्त कॉलेज की जांच की। जिसमें कॉलेज किसी भी विश्वविद्यालय से मान्य नहीं मिला। डीएमएलटी के अलावा दूसरा कोई कोर्स न चलाने की बात कही गई, लेकिन जांच में फार्मासिस्ट और जीएनएम के छात्र भी मिले। लैब भी सही नहीं मिली और अग्निशमन की सुविधा भी नहीं थी।

सीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट

प्रबंधन की ओर से 2018 से संचालित कॉलेज में अब तक 50 से अधिक छात्र-छात्राओं को शिक्षण देने की बात कही गई, लेकिन कोई रजिस्टर नहीं दिया गया। संस्थान में प्रधानाचार्य सहित चार कर्मचारी मिले। जिन्हें ढाई से छह हजार का वेतनमान दर्शाया गया है। अधीक्षक ने बताया कि जांच में सभी 10 बिंदुओं पर कमियां मिलीं। इसकी रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी गई है।

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