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कई भाषाओं के जानकार थे आचार्य रामचंद्र शुक्ल

Tue, 27 Oct 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Tue, 27 Oct 2015 12:32 AM IST
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Many languages ??were knowledgeable Acharya Ramchandra Shukla
जगत जननी मां विंध्यवासिनी की गोद में रह कर आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने गद्य व पद्य की कई उत्कृष्ट रचनाएं लिखीं। नगर क्षेत्र के रमईपट्टी मुहल्ले में रह कर आचार्य जी ने हिंदी साहित्य सहित संस्कृत, दर्शन, पुराण तथा भारतीय वांग्मय की विविध शाखाओं का गहन अध्ययन किया।
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हिंदी का सृदृढ़ स्मारक रखने वाले कुशल शिल्पी आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी को हिंदी के साथ ही संस्कृत, अंग्रेजी और फारसी भाषाओं पर पूरा अधिकार था।

आचार्य जी काशी में रहकर मिर्जापुर के प्राकृतिक सौंदर्य को नहीं भूल पाए और हमेशा मिर्जापुर के विकास के बारे में सोचते व लिखते थे। कालजयी रचनाकार आचार्य शुक्ल जी का जन्म बस्ती जनपद के अगौना नामक ग्राम में शारदीय पूर्णिमा वर्ष 1884 को हुआ था।
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सन् 1893 में उनके पिता पंडित चंद्रबली शुक्ल की नियुक्ति सदर कानूनगो के पद पर मिर्जापुर में हुई। पूरा परिवार नगर के रमईपट्टी में आवास बना कर रहने लगा और धीरे धीरे आचार्य जी यहां के निवासी बन गए। आचार्य जी की प्रारंभिक शिक्षा हमीरपुर में हुई। इसके बाद उनकी आगे की शिक्षा मिर्जापुर से हुई।
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 यहां से उन्होंने वर्ष 1898 में मिडिल प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद नगर के लंदन मिशन स्कूल वर्तमान नाम बीएलजे इंटर कालेज से वर्ष 1899 से वर्ष 1901 में उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास किया।

सन 1909 में उनका पहला लेख कविता क्या है.. जो महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित सरस्वती पत्रिका में छपा, जिससे उनको आचार्यत्व प्राप्त हुआ। वर्ष 1919 में पं. मदन मोहन मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी रीडर पद पर नियुक्त किया।


 आचार्य जी की व्यापक योग्यता की परख करते हुए मालवीय जी ने डा. श्याम सुंदर दास के अवकाश ग्रहण करने के बाद 1939 में हिंदी विभागाध्यक्ष बना दिया, जिसका निर्वहन उन्होंने 1941 तक किया।
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