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खुदकुशी के लिए उकसाया, सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sat, 20 Aug 2016 12:26 AM IST
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कोर्ट
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न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट पीएन श्रीवास्तव ने पत्नी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोपी मनोज कुमार मौर्या को दोषसिद्ध पाते हुए सात वर्ष की कड़ी कैद तथा 15 हजार रुपया अर्थदंड लगाया गया है। उसे जेल भेज दिया गया।
अभियोजन अनुसार कटरा कोतवाली के महंत शिवाला निवासी सुनील कुमार मौर्या ने दस मई 2015 को अपने भाई मनोज कुमार मौर्या के खिलाफ तहरीर दी थी कि उसने अपने साथ पढ़ने वाली लड़की वंदना निवासिनी गनेशगंज कटरा के साथ प्रेम विवाह किया था। इससे नाराज वंदना के घरवाले उसके यहां नहीं जाते और न ही वह मायके जाती थी।
ढाई वर्ष बाद मनोज ने रूक्खड़घाट में गोरखपुर की रहने वाली खुशबू शर्मा को अलग से मकान ले कर रखा था। घटना वाले दिन खुशबू वंदना के कमरे पर पहुंची और उसे बताया कि उसके पति मनोज का बच्चा उसके पेट में पल रहा है। यह सुनते ही वंदना ने खुशबू से मनोज को फोन लगाने के लिए कहा। फोन लगाने पर मनोज का फोन नहीं लगा। इससे क्षुब्ध होकर वंदना ने मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा ली। उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया और इलाज के दौरान मौत हो गई।
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पुलिस ने आरोपी मनोज व खुशबू शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम ने आठ गवाह पेश किए। साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर आरोपी मनोज को दोष सिद्ध पाते हुए कोर्ट ने सात वर्ष की कड़ी कैद और 15 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई। खुशबू शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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अभियोजन अनुसार कटरा कोतवाली के महंत शिवाला निवासी सुनील कुमार मौर्या ने दस मई 2015 को अपने भाई मनोज कुमार मौर्या के खिलाफ तहरीर दी थी कि उसने अपने साथ पढ़ने वाली लड़की वंदना निवासिनी गनेशगंज कटरा के साथ प्रेम विवाह किया था। इससे नाराज वंदना के घरवाले उसके यहां नहीं जाते और न ही वह मायके जाती थी।
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ढाई वर्ष बाद मनोज ने रूक्खड़घाट में गोरखपुर की रहने वाली खुशबू शर्मा को अलग से मकान ले कर रखा था। घटना वाले दिन खुशबू वंदना के कमरे पर पहुंची और उसे बताया कि उसके पति मनोज का बच्चा उसके पेट में पल रहा है। यह सुनते ही वंदना ने खुशबू से मनोज को फोन लगाने के लिए कहा। फोन लगाने पर मनोज का फोन नहीं लगा। इससे क्षुब्ध होकर वंदना ने मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा ली। उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया और इलाज के दौरान मौत हो गई।
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पुलिस ने आरोपी मनोज व खुशबू शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम ने आठ गवाह पेश किए। साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर आरोपी मनोज को दोष सिद्ध पाते हुए कोर्ट ने सात वर्ष की कड़ी कैद और 15 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई। खुशबू शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।