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Mirzapur News: मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में मेहराब लगाने पहुंची IIT BHU की टीम, फिटिंग में आ रही थी समस्या
Sun, 16 Jun 2024 02:14 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 16 Jun 2024 02:14 PM IST
सार
मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में आईआईटी बीएचयू की टीम मेहराब लगाने पहुंची। टीम ने मेहराब के दो स्तंभ को अत्यंत सावधानी से लगाने का काम पूरा किया। इस काम के लिए स्थानीय जानकारों ने हाथ खड़े किए तो प्रशासन ने आईआईटी बीएचयू की मदद ली।
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विंध्यवासिनी मंदिर में पहुंची आईआईटी बीएचयू की टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मां विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भगृह में स्वर्ण और रजत मंडित मेहराब तथा स्तंभ लगाने का काम बीच में अटकने पर जिला प्रशासन ने शनिवार को आईआईटी बीएचयू की टीम की मदद ली। टीम ने मेहराब के दो स्तंभ को अत्यंत सावधानी से लगाने का काम पूरा किया। रविवार को स्तंभ को फिट करने का काम पूरा होने की उम्मीद है।
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पुराने मेहराब को काटकर निकालने के बाद उसकी जगह नए मेहराब तथा स्तंभ नहीं लग पा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण पुराने मेहराब को काटकर निकाले जाने के बाद उसकी जगह नए का फिट न हो पाना बताया जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन और श्री विंध्य पंडा समाज की बैठक में निर्णय के बाद वाराणसी से आईआईटी से एक्सपर्ट की टीम बुलाई गई। इसके बाद मां विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भगृह में चार किलो सोना तथा 51 किलो चांदी से निर्मित मेहराब तथा स्तंभ लगाने का काम चल रहा है।
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वीते सात जून से इसका ट्रायल शुरू हुआ था। पुराने मेहराब को काटकर निकाल दिया गया। इसके चार खंभे नीचे और पीछे की दीवारों में फिट किए गए थे। इन्हें निकाले जाने के वाद जब नया लगाने की बारी आई तो वह फिट नहीं हो पा रहा है।
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मंदिर में ज्यादा तोड़फोड़ की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि मां का विग्रह प्राकृतिक रूप से पहाड़ पर स्थित है। दो-तीन दिन तक विचार-विमर्श के बाद वाराणसी के बीएचयू से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई। एडीएम शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि मां का विग्रह सुरक्षित रखते हुए आईआईटी वीएचयू के विशेषज्ञ इस काम को कर रहे हैं।