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कैश लेने में छूट रहा पसीना
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Mon, 19 Dec 2016 11:29 PM IST
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रमईपट्टी स्थित भारतीय स्टेट बैंक में कैश लेने के लिए खड़े खाताधारक ।
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एक दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को नगरीय इलाकों सहित जिले के ग्रामीण अंचलों के बैंकों व एटीएम के खुलते ही ग्राहकों का रेला उमड़ पड़ा। विभिन्न बैंकों एवं एटीएम के शटर खुलने से पहले ही नगर के कई इलाकों में खाताधारक पहुंच कर कतार में खड़े हो गए थे। अधिकांश एटीएम के शटर खुले ही नहीं, वहीं जिस एटीएम से रुपये निकल रहे थे, वहां सुबह से ही खाताधारकाें की लंबी कतार लगी रही।
एक महीने से अधिक का समय बीत गया है लेकिन नोट की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। मोदी के 50 दिन के सब्र की सीमा भी अब पूरी होने वाली है, लेकिन न तो बैंकों पर कतार कम हो रही है और न ही एटीएम के बाहर की कतार। ठंड के मौसम में लंबी कतार में खड़े खाताधारकाें को पसीना छूट रहा है। कहा तो जा रहा है कि पूर्वांचल में करोड़ाें रुपये की खेप बैंकों में भेजी गई है, लेकिन अभी भी खाताधारकों को उनके जरूरत के मुताबिक पैसा नहीं मिल पा रहा है। नोटबंदी का असर खेती-किसानी सहित पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ने लगा है। अब स्कूलाें से बच्चाें को फीस नहीं जमा करने की नोटिस भी भेजा जाने लगा है। ग्राहकों का कहना है कि अब सब्र की सीमा पार हो रही है। जब अपने जिले में ही अपने खून पसीने की कमाई को जब हम अपने बच्चाें पर नहीं खर्च कर पाएंगे तो ऐसे पैसा का क्या मतलब है।
सोमवार को नगर के डंकीनगंज, तेलियागंज, रतनगंज, चौबेटोला, धुंधी कटरा, बेलतर, बरियाघाट, रमईपट्टी, बाजीराव कटरा सहित कई अन्य इलाकों में स्थित बैंकाें में रुपये लेने ग्राहकाें का तांता लगा रहा। गिने-चुने बैंकों से ही ग्राहकाें को 24 हजार रुपये का भुगतान हुआ, वहीं ग्रामीण अंचलाें के बैंकों में तो दो हजार से ऊपर का भुगतान ही नहीं हुआ, जिससे खाताधारकाें में आक्रोश देखा गया। सोमवार को भी अधिकांश एटीएम बंद रहे, वहीं जिस एटीएम से रुपये निकल रहे थे, वहां ग्राहकों का रेला लगा रहा। बैंकों पर उमड़ी ग्राहकाें की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
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एक महीने से अधिक का समय बीत गया है लेकिन नोट की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। मोदी के 50 दिन के सब्र की सीमा भी अब पूरी होने वाली है, लेकिन न तो बैंकों पर कतार कम हो रही है और न ही एटीएम के बाहर की कतार। ठंड के मौसम में लंबी कतार में खड़े खाताधारकाें को पसीना छूट रहा है। कहा तो जा रहा है कि पूर्वांचल में करोड़ाें रुपये की खेप बैंकों में भेजी गई है, लेकिन अभी भी खाताधारकों को उनके जरूरत के मुताबिक पैसा नहीं मिल पा रहा है। नोटबंदी का असर खेती-किसानी सहित पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ने लगा है। अब स्कूलाें से बच्चाें को फीस नहीं जमा करने की नोटिस भी भेजा जाने लगा है। ग्राहकों का कहना है कि अब सब्र की सीमा पार हो रही है। जब अपने जिले में ही अपने खून पसीने की कमाई को जब हम अपने बच्चाें पर नहीं खर्च कर पाएंगे तो ऐसे पैसा का क्या मतलब है।
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सोमवार को नगर के डंकीनगंज, तेलियागंज, रतनगंज, चौबेटोला, धुंधी कटरा, बेलतर, बरियाघाट, रमईपट्टी, बाजीराव कटरा सहित कई अन्य इलाकों में स्थित बैंकाें में रुपये लेने ग्राहकाें का तांता लगा रहा। गिने-चुने बैंकों से ही ग्राहकाें को 24 हजार रुपये का भुगतान हुआ, वहीं ग्रामीण अंचलाें के बैंकों में तो दो हजार से ऊपर का भुगतान ही नहीं हुआ, जिससे खाताधारकाें में आक्रोश देखा गया। सोमवार को भी अधिकांश एटीएम बंद रहे, वहीं जिस एटीएम से रुपये निकल रहे थे, वहां ग्राहकों का रेला लगा रहा। बैंकों पर उमड़ी ग्राहकाें की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
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