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दशहत के साये में गंगा तटवासी

mirzapur Updated Sun, 21 May 2017 11:40 PM IST
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कटान की कगार पर
कटान की कगार पर

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मानसून के आने में अब मात्र एक माह का समय शेष रह गया है। इस बार बारिश ठीक ठाक होने के आसार हैं। पिछली बार ठीक ठाक बारिश हुई तो कई गांवों में गंगा का पानी घुस गया था। कच्चे मकान धराशायी हो गए थे लेकिन इससे प्रशासन ने सबक नहीं लिया। गंगा किनारे बसे सीखड़, कछवां, विन्ध्याचल और जिगना इलाकों के तटीय इलाके के ग्रामीण इससे परेशान नजर आ रहे हैं।       
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जिले के लिए गंगा लाइफ लाइन सरीखी हैं अपने आंचल में जिले के कई गांवों को समेटे गंगा जहां सिंचाई के साधन और ऊपजाऊ भूमि देती हैं वहीं बरसात के समय गंगा के भयावह रूप ले लेने से इसका खामियाजा तटीय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। पिछले वर्ष अगस्त माह में आई बाढ़ का खामियाजा ग्रामीण भुगत चुके हैं। जिले के पश्चिमी छोर छानबे ब्लॉक में गंगा कटान से प्रभावित हरगढ़, भौरुपुर, साटन पट्टी, गोगांव, बसेवरा मिश्रपुर ,नगवासी, दुगौली, डगहर, कोठरा, चडैचा, नीबीगहरवार,आदमपुर, नौगांव, ऊंचडीह, अर्जुनुपर, बबुरा आदि गांवों के ग्रामीणों में अभी से दहशत का माहौल है। इन ग्रामीणों ने अपनी समस्या के प्रति कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया लेकिन आशवासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। इसी प्रकार विन्ध्याचल थाना क्षेत्र के कंतित पुरवा के निवासी भी डरे हुए हैं। उनका कहना है कि गंगा के किनारे काफी बड़ा करार बन गया है। कई लोग इसमें गिर कर घायल हो चुके हैं। गांव में बारात आती है तो दरवाजे पर उन्हें रोकना भी खतरे से खाली नहीं होता है।


यही आलम तिवारीपुर, बनवारीपुर, शिवपुर, मड़गुड़ा, सिद्धपीठ, नैपुरा, कच्चा घाट, बलुवा घाट आदि इलाकों में भी देखने सुनने को मिल रहा है। पिछले वर्ष की बारिश में कई घर गिर गए जिसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है। कंतित निषाद बस्ती के निवासी फौजदार कहते हैँ कि पिछले वर्ष बाढ़ में मेरा कच्चा मकान गिर पड़ा था लेकिन मामला सिर्फ रिपोर्ट लगने तक ही सीमित रहा। नन्हें निषाद ने बताया कि पिछली बाढ़ में उनका चबूतरा ढह गया । संतोष कुमार ने बताया कि तीन वर्ष पहले निषाद बस्ती में बाढ़ से 40 फीट रोड धंस गई थी। सीखड़ विकास खंड के गंगा किनारे बसे गांव बसारतपुर, मण्वां, तराश एवं मेड़िया के बेदौली, रुदौली के चुरामनपुर गांव के लोग अरसे से गंगा कटान के शिकार बनते चले आ रहे हैं। सैकड़ो बीघा जमीन गंगा में समाहित हो चुकी है।

15 वर्ष पर्व बसारतपुर दलित बस्ती एवं मझवां तरास में पत्थर बिछा कर कटान रोकने की कोशिश की गई थी लेकिन बसारतपुर तथा बेदौली चुरामनपुर के निवासी अभी भी भय के साये में जी रहे हैैं। बसारतपुर के प्रधान बिजेेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार शासन और प्रशासन स्तर पर लिखापढ़ी की गई लेकिन सब बेकार। विनोद, सत्यनारायण, शंभू, जवाहिर , हीरा, हूबलाल आदि के मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैैं। बेदौली के साधो यादव, मूरत यादव, छेदी यादव आदि ने गंगा किनारे का घर छोड़ कर कुछ दूरी पर मकान बनवा लिया है। ग्रामीण अब भी प्रशासन की तरफ आशा भरी निगाह से देख रहे हैं।


जिलाधिकारी व‌िमल कुमार दूबे का कहना है क‌ि बाढ़ से निपटने के लिए आगामी 24 मई को कलेक्ट्रेट में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में बाढ़ से निपटने के साथ साथ कटान को रोकने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
 

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