लालगंज। अंतरराष्ट्रीय हालात और गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर पड़े असर के बीच प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में रसोई की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अब गांवों में पारंपरिक चूल्हों की वापसी हो रही है। खास बात यह है कि बदलाव की अगुवाई पढ़ी-लिखी और आधुनिक बहु और बेटियां कर रही हैं।
लालगंज की एमए करने वाली बहू अनन्या ने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना ही समझदारी है। सौम्या का कहना है कि महंगाई के इस दौर में संयम और बचत ही सबसे बड़ा सहारा है। इससे घर की व्यवस्था चल रही है। नाम और पद न छापने की शर्त पर वर्तिका ने बताया कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ यही है कि हर परिस्थिति में समाधान खोजा जाए। जिम्मेदारी निभाई जाए। कटाई, खरिहट, पतार कला, लालगंज, लहंगपुर, गंगहरा, रेही, बघई, लालापुर, बस्तरा आदि गांवों में पढ़ी लिखी बहुएं लकड़ी की आग की आंच पर पकी रोटी के स्वाद को बेहतरीन बता रही हैं